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Bishnupura lok sabha elections 2019: इस सीट पर 1971 से 2014 तक रहा CPM का कब्जा

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

पश्चिम बंगाल की बिष्णुपुर लोकसभा सीट भी अपने आप में काफी खास है. इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें- बारजोड़ा, ओंदा, विष्णुपुर, कातुलपुर, इंदास, सोनामुखी और खंडघोष आती हैं.

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    पश्चिम बंगाल की बिष्णुपुर लोकसभा सीट भी अपने आप में काफी खास है. इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें- बारजोड़ा, ओंदा, विष्णुपुर, कातुलपुर, इंदास, सोनामुखी और खंडघोष आती हैं. बंगाल की राजनीति के लिहाज से ये सीट काफी अहम है. यहां 1962 में हुए लोकसभा चुनाव से लेकर 2009 तक कांग्रेस और सीपीएम का ही कब्जा रहा है. 2014 में पहली बार तृणमूल कांग्रेस ने ये सीट अपने नाम की. यहां टीएमसी की टिकट से चुनाव लड़े सौमित्रा खान ने 578,870 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. जब कि सीपीएम की सुस्मिता बौरी दूरसे (459,185 वोट) और बीजेपी डॉ. जयंत मोंडल (179,530 वोट) तीसरे स्थान पर रहे. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया था और 42 लोकसभा सीटों में से 34 पर जीत हासिल की थी. दो-दो सीटों पर सीपीएम और बीजेपी ने जीत दर्ज की थी, जब कि चार सीटें कांग्रेस के खाते में आईं थी.

    1962 में इस सीट पर कांग्रेस के पशुपति मंडल ने चुनाव जीता था. इसके बाद 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने ने ही जीत दर्ज की. इसके बाद 1971 से शुरू हुआ सीपीएम का दौर. यहां सीपीएम के नेता अजित कुमार साहा ने 1971 के आम चुनाव में जीत दर्ज की और वो चार बार बिष्णुपुरा सीट से सांसद रहे. साहा के बाद भी इस सीट पर सीपीएम का ही दबदबा रहा और 1989 के चुनाव में सीपीएम के ही सुखेंदू खान ने जीत का सिलसिला जारी रखा. सुखेंदू खान बिष्णुपुरा से दो बार सांसद बनें. उनके बाद बारी सीपीएम की ही एक और नेता संध्या बौरी की. उन्होंने 1991 में इस सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद सीपीएम की ही सुस्मिता बौरी ने 2004 में चुनाव लड़ा और वो 2014 तक सांसद रहीं. उन्हें 2014 में टीएमसी के सौमित्रा खान ने मात दी. कुछ महीनों पहले ही सौमित्रो खान को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया.

    आपको बता दें कि बिष्णुपुरा क्षेत्र में बांकुरा और बर्दमान जिलों के कुछ इलाके भी शामिल हैं. 1952 में हुए पहले लोकसभा निर्वाचन के दौरान यह सीट अस्तित्व में नहीं थी. 1962 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे. ये देश का तीसरा लोकसभा चुनाव था. बिष्णुपुरा टेराकोटा मंदिरों और बलूची साड़ी के लिए काफी लोकप्रिय है.

    लोकसभा की 543 सीट पर किस पार्टी का कौन सौ उम्मीदवार कहां से चुनाव लड़ रहा है, ये जानकारी देने के लिए अब आपको मोबाइल या लैपटॉप पर यहां-वहां नहीं भटकना पड़ेगा. न्यूज18 हिन्दी आपको एक ही पेज पर 543 सीटों के नाम, उन पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम, किस चरण में कौन सी तारीख को वोट डाले जाएंगे, ये बताएगा. अब ज़रा एक नज़र डालते हैं चुनाव की उन छोटी-छोटी तैयारियों पर जिन्हें हम नज़रअंदाज़ कर जाते हैं.

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