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केरल के एक श्रीकृष्‍ण मंदिर में मिलने वाले प्रसाद का नाम बदलने पर खड़ा हुआ 'कड़वा-मीठा' विवाद

News18Hindi
Updated: November 6, 2019, 1:09 PM IST
केरल के एक श्रीकृष्‍ण मंदिर में मिलने वाले प्रसाद का नाम बदलने पर खड़ा हुआ 'कड़वा-मीठा' विवाद
केरल में विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पहली लोकसभा में माकपा के नेता एके गोपालन को सम्‍मानित करने के लिए प्रसाद का नाम बदला जा रहा था.

विरोध के बाद त्रावणकोर देवासम बोर्ड (Travancore Dewaswom Board) ने कहा कि मंदिर में मिलने वाले प्रसाद (Prasad) का नाम बदलने (Rename) की कोई योजना नहीं. बोर्ड प्रसाद के नाम का पेटेंट (Patent) कराने के लिए आवेदन कर रहा है. कांग्रेस (Congress) ने केरल सरकार (Kerala Government) पर आरोप लगाया कि प्रसाद का नाम पहली लोकसभा (First Lok Sabha) में माकपा के नेता (CPM Leader) एके गोपालन को सम्‍मानित करने के लिए बदला जा रहा था.

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  • Last Updated: November 6, 2019, 1:09 PM IST
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चंद्रकांत विश्‍वनाथ

तिरुअनंतपुरम. केरल में त्रावणकोर देवासम बोर्ड (TDB) के एक मंदिर में मिलने वाले प्रसाद (Prasad) का नाम बदलने की सूचना पर विवाद खड़ा हो गया है, क्‍योंकि नए नाम का मतलब 'कड़वा काढ़ा' (Bitter Decoction) होता है. अंबलापुझ श्रीकृष्‍ण स्‍वामी मंदिर (Ambalappuzha Sree Krishna Swamy Temple) में मिलने वाले प्रसाद का नाम पहले 'अंबलापुझ पलपयासम' (Ambalappuzha Palpayasam) था, जिसका मतलब पारंपरिक मिठाई होता है. हाल में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में टीडीबी अध्‍यक्ष ए. पद्मकुमार के हवाले से बताया गया कि बोर्ड प्रसाद का नाम 'गोपाल कश्‍यम' या कड़वा काढ़ा करने की योजना बना रहा है. इसके बाद श्रद्धालुओं ने बोर्ड की योजना का कड़ा विरोध किया. इस पर पद्मकुमार ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स गलत हैं. प्रसाद का नाम बदलने की को‍ई योजना नहीं है.

आम लोगों के साथ ही इतिहासकारों और लेखकों ने भी किया विरोध
केरल (Kerala) में विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) ने आरोप लगाया कि पहली लोकसभा में माकपा (CPM) के नेता एके गोपालन को सम्‍मानित करने के लिए प्रसाद का नाम बदला जा रहा था. प्रसाद का नाम बदलने के फैसले का आम लोगों के साथ ही इतिहासकारों और लेखक ए. गोपाकुमार व कवि श्रीकुमार थंपी ने भी विरोध किया. केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुखिया एमएम हसन ने कहा कि अगर प्रसाद का नाम पहले गोपाल कश्‍यम था और इसे इसीलिए बदला जा रहा था तो उन्‍होंने अपने कार्यकाल के आखिरी समय तक इंतजार क्‍यों किया. उन्‍हें इसका नाम पहले ही बदलना चाहिए था. हालांकि, टीडीबी ने स्‍पष्‍ट किया है कि प्रसाद का नाम बदलने की कोई योजना नहीं है. इसके उलट प्रसाद के नाम 'अंबलापुझ पलपयासम' को पेटेंट (Patent) कराने के लिए आवेदन किया जा रहा है.

नकल से बचने के लिए बोर्ड करना चाहता है प्रसाद के नाम का पेटेंट
बोर्ड ने कहा कि पहले कर्मकांड में इसे गोपाल कश्‍यम ही कहा जाता था. ऐसे में जब हम नाम को पेटेंट के लिए भेजेंगे तो प्रसाद के इतिहास में इसका नाम गोपाल कश्‍यम भी दर्ज किया जाएगा. टीडीबी के उपायुक्‍त जी. बीजू ने News18 को बताया कि प्रसाद के नाम में कोई बदलाव नहीं हो रहा है. टीडीबी नाम का पेटेंट इसलिए हासिल करना चाहता है क्‍योंकि ओणम (Onam) के दौरान मंदिर से महज 20 किमी दूर मौजूद एक बेकरी (Bakery) ने अपनी एक मिठाई की बिक्री बढ़ाने के लिए 'अंबलापुझ पलपयासम' नाम रख दिया था. बेकरी ने नाम में मामूली बदलाव करते हुए अंबलापुझ (Ambalappuzha) की जगह अंबलपझा (Amblpzha) कर दिया था. हालांकि, बाद में बेकरी ने इसके लिए सोशल मीडिया पर माफी मांग ली थी. टीडीबी ने बेकरी के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया है.

मध्‍यकाल के शासक पर भगवान कृष्‍ण का कर्ज है मंदिर का पयासम
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'अंबलापुझ पलपयासम' को दूध, चीनी और चावल मिलाकर बनाया जाता है. कहा जाता है कि यह प्रसाद मध्‍यकाल के एक शासक पर भगवान कृष्‍ण का कभी नहीं उतरने वाला कर्ज है. प्रचलित कहानी के मुताबिक एक राजा को घमंड था कि उसे कोई भी चतुरंग के खेल में हरा नहीं सकता. एक बार एक संन्‍यासी के साथ खेलते हुए राजा ने उसकी मांगी हर वस्‍तु देने का वचन दे दिया. राजा खेल में अपना साम्राज्‍य हार गया. तब साधु ने राजा से कहा कि वह उसका साम्राज्‍य लौटा सकते हैं. इसके लिए राजा को हर दिन अंबलापुझ के भगवान कृष्‍ण को पयासम भेंट करना होगा. तब राजा को अहसास हुए कि साधु के भेष में खुद भगवान कृष्‍ण थे, जो उसके घमंड को तोड़ने आए थे. अब रोज भगवान कृष्‍ण को भोग लगाए जाने के बाद प्रसाद को श्रद्धालुओं को 320 रुपये प्रतिकिलो की दर पर दिया जाता है.

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First published: November 6, 2019, 1:09 PM IST
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