बीजेपी का आरोप, कांग्रेस सरकार चीन की व्यापार नीति के आगे पूरी तरह से नतमस्तक थी

बीजेपी का आरोप, कांग्रेस सरकार चीन की व्यापार नीति के आगे पूरी तरह से नतमस्तक थी
मोदी सरकार अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ व्यापार समझौतों पर व्यापक चर्चा कर रही है.

बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अगर कांग्रेस सरकार RCEP के खिलाफ थी तो चीन के साथ व्यापार समझौते के लिए 2012 में क्यों आगे बढ़ी. जब कांग्रेस 2007 में चीन के साथ एक रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट के लिए रास्ता तलाश रही थी और अब से चीन विरोधी हो गए हैं.

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नई दिल्ली. पीएम मोदी सरकार (Modi government) ने भारत को RCEP-REGIONAL COMPREHENSIVE ECONOMIC PARTNERSHIP से बाहर निकलने का फैसला लिया. इस समझौते में चीन समेत ASEAN के सभी देश शामिल थे. इससे भारतीय उद्योगों को चीन के बहुत ही सस्ते सामान के आयात से सुरक्षा मिलेगी. इसमें कई संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं जैसे, कृषि, दुग्ध उत्पाद और छोटे, सूक्ष्म और लघु उद्योग. लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की मंशा पर सवाल उठा दिए हैं. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार चीन की व्यापार नीति के आगे पूरी तरह से नतमस्तक हो गई थी.

बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अगर कांग्रेस सरकार RCEP के खिलाफ थी तो चीन के साथ व्यापार समझौते के लिए 2012 में क्यों आगे बढ़ी. जब कांग्रेस 2007 में चीन के साथ एक रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट के लिए रास्ता तलाश रही थी और अब से चीन विरोधी हो गए हैं. 2005 में मनमोहन सिंह और चीनी प्रीमियर वेन झीनबाओ को एक प्रेजेंटेशन (Presentation) दिया गया था. रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट पर जिसमें जब की यूपीए सरकार अपनी रुचि दिखा रही थी. तब के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने प्रस्तावित रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट को उच्च स्तर कि ट्रेड एंड इकोनॉमिक रिलेशन कमिटी को दिखाया जिसमें इसे पूरा करना चाहिए. तब के पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली ट्रेड एंड इकोनॉमिक रिलेशन कमिटी ने 2012 में कहा था कि RCEP से बाहर रहना व्यवहारिक उपाय नहीं है.

बीजेपी ने दिखाए सभी दस्तावेज
बीजेपी ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि मनमोहन सरकार जानती थी चीन के अलावा बाकी देशों से भारत का पहले से फ्री ट्रेड ग्रीमेंट है. फिर भी भारत बातचीत में कूदा. क्या कांग्रेस तब ये नहीं जानती थी. रिपोर्ट ये भी थी कि इससे चीनी सामान का आयात और चीन से ट्रेड डिफिसिट बहुत ज्यादा है फिर भी 2011 में यूपीए सरकार RCEP में जाना क्यों स्वीकार किया और आनंद शर्मा ने ये फाइल क्यों साइन की और 2013 में ब्रुनेई की पहली बैठक में भी हिस्सा लिया. कांग्रेस पूरी तरह से भ्रमित है. पहले कांग्रेस ये साफ करे कि वो इस समझौते के लिए बात आगे करने के पक्ष में थी या नहीं थी. यूपीए के दौरान चीन के साथ कुल ट्रेड डिफिसिट 33 गुना ज्यादा बढ़ गया. ये 36.2 बिलियनलर था जब पीएम मोदी ने कार्यभार संभाला.
भविष्य में व्यापार को लेकर मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वो भारत पहले की नीति पर चलेगी. मोदी सरकार अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ व्यापार समझौतों पर व्यापक चर्चा कर रही है. इन विकसित देशों के साथ समझौता कर भारतीय उद्योगों और सर्विस सेक्टर को एक बेहतर कंपीटिशन मिलेगा और साथ ही बड़े विकसित बाजारों का फायदा भी.  कुल मिलाकर बीजेपी और मोदी सरकार कांग्रेस के आरोपों का जवाब भी दे रही है और उनकी यूपीए सरकार को चीनपरस्ती के लिए कठघरे में भी खड़ा कर रही है.
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