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राहुल गांधी बोले- BJP और RSS के डीएनए में है आरक्षण खत्म करना, हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 1:31 PM IST
राहुल गांधी बोले- BJP और RSS के डीएनए में है आरक्षण खत्म करना, हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे
राहुल गांधी

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण (Reservations) का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है. ऐसे में कोई अदालत राज्य सरकारों को SC और ST वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं जारी कर सकती है. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक पार्टियों में बयानबाजी का दौर जारी है.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 1:31 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने आरक्षण (Reservations) को लेकर मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर जमकर हमला बोला है. राहुल ने कहा कि बीजेपी-RSS के डीएनए को आरक्षण चुभता है. आरक्षण खत्म करना उनकी रणनीति है. बीजेपी नौकरियों में कभी आरक्षण नहीं लाएगी, लेकिन हम हम आरक्षण कभी नहीं खत्म होने देंगे.'

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'ये (सरकार) आरक्षण के खिलाफ है. ये किसी न किसी तरह से आरक्षण को संविधान से निकालना चाहते हैं. इनकी तरफ ऐसे प्रयास होते रहते हैं. ये चाहते हैं कि एससी-एसटी समुदाय आगे नहीं बढ़ें.’ उन्होंने कहा, 'बीजेपी और आरएसएस वाले जितना भी सपना देख लें, हम आरक्षण को कभी नहीं मिटने देंगे. ये संविधान का मुख्य हिस्सा है.'



कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अब फैसला आया कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है. यह सब उत्तराखंड की सरकार ने शीर्ष न्यायालय में कहा है. यह आरक्षण को निरस्त करने का बीजेपी का तरीका है.
केरल के वायानाड से सांसद राहुल गांधी ने कहा, 'मैं हिन्दुस्तान की जनता को कह रहा हूं खास तौर पर दलित, एससी/एसटी समाज के लोगों को मोदी जी सपना देखें या मोहन भागवत जी सपना देखें, हम आरक्षण को खत्म नहीं होने देंगे.'


 राहुल ने सरकार पर लगाए ये आरोप
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर संविधान पर आक्रमण करने के आरोप भी लगाए हैं. उन्होंने कहा, 'संविधान पर हमला हो रहा है. लोगों को बोलने नहीं दिया जाता. ये न्यायपालिका पर दबाव बनाते हैं. संविधान के स्तंभों को एक-एक करके तोड़ा जा रहा है.’

क्यों उठ रहा आरक्षण का मुद्दा?
दरअसल, बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है. ऐसे में कोई अदालत राज्य सरकारों को SC और ST वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं जारी कर सकती है. आरक्षण देने का अधिकार और दायित्व राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर है. अदालत के इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक पार्टियों केंद्र सरकार को घेरने में जुटी है.

RESERVATION
कोर्ट ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है.


उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने की थी ये टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी उत्तराखंड हाईकोर्ट के 15 नवंबर 2019 के उस फैसले पर की थी, जिसमें उसने राज्य सरकार को सेवा कानून, 1994 की धारा 3(7) के तहत एससी-एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए कहा था. जबकि उत्तराखंड सरकार ने आरक्षण नहीं देने का फैसला किया था.

इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण नागरिकों का मौलिक अधिकार नहीं है. इसके लिए राज्य सरकारों को बाध्य नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं कोर्ट भी सरकार को इसके लिए बाध्य नहीं कर सकता.


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) तथा (4ए) में जो प्रावधान हैं, उसके तहत राज्य सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के अभ्यर्थियों को प्रमोशन में आरक्षण दे सकते हैं, लेकिन यह फैसला राज्य सरकारों का ही होगा. अगर कोई राज्य सरकार ऐसा करना चाहती है तो उसे सार्वजनिक सेवाओं में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की कमी के संबंध में डाटा इकट्ठा करना होगा, क्योंकि आरक्षण के खिलाफ मामला उठने पर ऐसे आंकड़े अदालत में रखने होंगे, ताकि इसकी सही मंशा का पता चल सके, लेकिन सरकारों को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: February 10, 2020, 11:39 AM IST
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