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JEE एग्जाम के मुद्दे पर बीजेपी ने दिया ममता को करारा जवाब, विजयवर्गीय ने कहा 'डिवाइडर दीदी'

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Updated: November 7, 2019, 7:12 PM IST
JEE एग्जाम के मुद्दे पर बीजेपी ने दिया ममता को करारा जवाब, विजयवर्गीय ने कहा 'डिवाइडर दीदी'
JEE Main के मुद्दे पर बीजेपी और ममता बनर्जी आमने सामने हैं.

कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijavargiya) ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को डिवाइडर दीदी कहा है. बीजेपी का कहना है कि बंगाल की ओर से कभी भी केंद्र को बंगाली भाषा में जेईई मुख्य परीक्षा का प्रस्ताव नहीं भेजा गया. कैलाश विजयवर्गीय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का पत्र भी जारी किया है, जिसके अनुसार सरकार की ओर से बताया गया कि सिर्फ गुजरात ही ऐसा राज्य है, जिसने गुजराती में जेईई मुख्य परीक्षा कराने के लिए हामी भरी.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 7:12 PM IST
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नई दिल्ली. जेईई मुख्य परीक्षा (JEE Main) को हिंदी, अंग्रेजी के अलावा गुजराती में कराने के मुद्दे पर ममता बनर्जी पर बीजेपी और उसके नेताओं ने हमला बोला है. बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijavargiya) ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को डिवाइडर दीदी कहा है. उन्होंने ममता बनर्जी के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि आप देश को भाषा के आधार पर मत बांटिए. बता दें कि इससे पहले ममता बनर्जी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए जेईई मुख्य परीक्षा क्षेत्रीय भाषाओं में सिर्फ गुजराती में कराने पर ऐतराज जताया था. इसका जवाब देते हुए बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी पर हमला बोल दिया.

कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijavargiya) ने ट्वीट कर जवाब दिया, उन्होंने लिखा, ''डियर डिवाइडर दीदी, भाषा के नाम पर लोगों को बांटने से राज्य में आपके वोट नहीं बढ़ेंगे. आपने बंगाली भाषा में एग्जाम कराने के लिए कभी अपनी ओर से कहा ही नहीं.'' इसके साथ ही कैलाश विजयवर्गी ने एक नोटिस भी साथ में अटैच किया, जिसके अनुसार सरकार की ओर से बताया गया कि सिर्फ गुजरात ही ऐसा राज्य है, जिसने गुजराती में जेईई मुख्य परीक्षा कराने के लिए हामी भरी.

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भाषा संबंधी ये विवाद
दरअसल ममता बनर्जी ने जेईई मुख्य परीक्षा को हिंदी, अंग्रेजी के अलावा सिर्फ गुजराती में कराने पर ऐतराज जताते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए. उन्होंने लिखा, ''हमारा देश भारत कई भाषाओं और धर्म और संस्कृतियों और समुदायों का घर है. हालांकि, केंद्र में सरकार की मंशा सभी क्षेत्रों और क्षेत्रीय भाषाओं को खराब करना है.''



ममता ने कहा, ''ज्वाइंट एंट्रेस एग्जाम हिंदी और इंग्लिश में बहुत लंबा होता है. मुझे आश्चर्य है कि अब ये इसके अलावा गुजराती में होगा. सरकार का ये कदम सराहनीय नहीं कहा जा सकता. मैं गुजराती भाषा से प्यार करती हूं. लेकिन हमारी क्षेत्रीय भाषा को क्यों अनदेखा किया जा रहा है. ऐसा अन्याय हमारे साथ क्यों किया जा रहा है. अगर गुजराती भाषा में ये हो सकता है तो बंगाली भी होना चाहिए. इस मुद्दे को गंभीरता से सुलझाया जाना चाहिए.''

गुजरात के सीएम ने भी दिया ममता को जवाब
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा, ''डियर डिवाइडर दीदी, आपके राज्य के लोगों को विकास की जरूरत है. इस तरह के बांटने वाले स्टंट की जरूरत नहीं है. अब सच सबके सामने आ गया है. इसलिए आपको माफी मांगनी चाहिए.''

ये है इस मामले की हकीकत
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के पत्र के मुताबिक, 2013 में जेईई मुख्य परीक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में किए जाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था. तब सिर्फ गुजरात ने गुजराती भाषा में एग्जाम कराने पर सहमति दिखाई थी. 2014 में महाराष्ट्र ने मराठी और उर्दू में पेपर कराने पर रजामंदी दी थी. 2016 में इन दोनों राज्यों ने जेईई मुख्य परीक्षा राज्य इंजीनियरिंग कॉलेज के जरिए बंद कर दी. इसके बाद मराठी और उर्दू पेपर बंद कर दिए गए, लेकिन गुजरात के निवेदन पर गुजराती में पेपर जारी रहा. इसके अलावा किसी भी राज्य ने अपनी क्षेत्रीय भाषा के लिए आवेदन नहीं किया.

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First published: November 7, 2019, 6:31 PM IST
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