सेक्शन 377 पर SC के फैसले का दुनिया ने किया स्वागत, पर BJP, BSP, TMC ने साधी चुप्पी

इस मुद्दे पर बीजेपी के किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आखिरी बार 2009 में प्रतिक्रिया दी थी. 2009 में जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सेक्शन 377 को रद्द किया था तब तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था, "हम सेक्शन 377 का समर्थन करते हैं."

News18.com
Updated: September 7, 2018, 8:24 PM IST
सेक्शन 377 पर SC के फैसले का दुनिया ने किया स्वागत, पर BJP, BSP, TMC ने साधी चुप्पी
भारत में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है.
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Updated: September 7, 2018, 8:24 PM IST
मानस मितुल, रौनक कुमार गुंजन

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में संविधान के सेक्शन 377 के उस हिस्से को रद्द कर दिया है जिसमें समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखा गया था. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि सेक्शन 377 की वैधता पर केंद्र सरकार ने अपना स्टैंड स्पष्ट नहीं किया. सरकार ने यह फैसला कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया था. (क्या है LGBTQIA का मतलब?)

इस फैसले पर यूएन समेत दुनियाभर की मीडिया, मानवाधिकार संगठनों ने खुशी जाहिर की है. हालांकि फैसला आने के दूसरे दिन भी बीजेपी, बीएसपी, टीएमसी जैसी पार्टियों ने इस पर कोई बयान जारी नहीं किया है. न्यूज 18 ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया के लिए विभिन्न पार्टियों के नेताओं से संपर्क किया.

जब हमने बीजेपी प्रवक्ता से संपर्क किया तो उन्होंने इस संबंध में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया. वहीं एक अन्य प्रवक्ता ने भी कोई टिप्पणी नहीं की. आधिकारिक रूप से बीजेपी ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पार्टी के नेता इस मामले में अब तक चुप्पी साधे हुए हैं.

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इस मुद्दे पर बीजेपी के किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आखिरी बार 2009 में प्रतिक्रिया दी थी. 2009 में जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सेक्शन 377 को रद्द किया था तब तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था, "हम सेक्शन 377 का समर्थन करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि समलैंगिकता प्राकृतिक नहीं है जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता है."

सांसद और पार्टी के यूथ विंग की अध्यक्ष पूनम महाजन बीजेपी की एकमात्र नेता हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के स्वागत में ट्वीट किया. उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर लिखा, “बराबरी मिलने से सभी तरफ खुशी का माहौल है. सेक्शन 377.”

वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. पार्टी के एक प्रवक्ता ने हमें दूसरे प्रवक्ता से संपर्क करने के लिए कहा, लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.

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वहीं तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगता रॉय ने कहा कि अन्य पार्टियों ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है इसलिए उनकी पार्टी ने भी इस पर सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है.

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रशंसा की. पार्टी ने ट्वीट किया, “हम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं. हमें लंबे समय से इसका इंतजार था और हम LGBTQAI समुदाय के अपने दोस्तों के साथ इस जश्न में शामिल हैं. बराबरी की जीत हुई!”

पार्टी की तरफ से शशि थरूर, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, प्रिया दत्त और सुष्मिता देव जैसे नेताओं ने भी बयान जारी की. पार्टी ने राहुल गांधी के पुराने वीडियो भी शेयर किये जिनमें वह एलजीबीटी अधिकारों के समर्थन में बोलते नजर आ रहे हैं.

वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता घनश्याम तिवारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से 377 के खिलाफ लड़ने वालों की जीत बताया. उन्होंने कहा, “हम सभी नागरिकों के बराबरी के अधिकार और मानवाधिकारों पर विश्वास रखते हैं. यह हमारी राजनीति का केंद्र भी है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानवाधिकारों की जीत है. हम एलजीबीटी समुदाय के इस जश्न में शामिल हैं और इस फैसले के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वालों को सलाम करते हैं.” तिवारी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के स्टैंड पर सफाई भी मांगी.

एनसीपी नेता और वकील मजीद मेमन ने कहा कि इस मुद्दे पर एनसीपी का पक्ष वही है जो कांग्रेस का है. उन्होंने कहा, “हम फैसले का स्वागत करते हैं. बीजेपी और आरएसएस को भी इस मुद्दे पर अपनी राय साफ करनी चाहिए. वे इस फैसले पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं.”

डीएमके सांसद कनिमोझी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही इसके समर्थन में ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, “हमारी व्यक्तिगत चॉइस पर कानून का पहरा नहीं होना चाहिए. ऐतिहासिक फैसले के लिए एससी को बधाई. LGBTQ समुदाय के अधिकारों की अंततः पहचान हुई है और भारत ने मानवाधिकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. उम्मीद है कि हम एक अधिक उदारवादी, सहनशील और सबको साथ लेकर चलने वाले समाज बनने की तरफ बढ़ रहे हैं.” सीपीएम ने भी फैसले के स्वागत में बयान जारी किया है.
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