पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को हराने के सारे तरीके आजमा सकती है BJP

नवनियुक्त भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय की फाइल फोटो
नवनियुक्त भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय की फाइल फोटो

बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने 26 सितंबर को मुकुल रॉय (Mukul Roy) को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (National vice president) घोषित किया था. बीजेपी के इस कदम से माना जा रहा है कि पार्टी बंगाल की राजनीति (West Bengal Politics) में ममता बनर्जी को हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 9:27 PM IST
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(सुजीत नाथ)

कोलकाता. बीजेपी (BJP) के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय (Mukul Roy) को लेकर पार्टी के सदस्यों का मानना है कि वह पश्चिम बंगाल (West Bengal) में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के लिए उम्मीदवारों के चयन में एक अहम भूमिका अदा करेंगे. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की राजनीति और सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बूथ स्तर के नुकसान और फायदे के बारे में उनसे बेहतर कोई नहीं जानता.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने 26 सितंबर को मुकुल रॉय (Mukul Roy) को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (National vice president) घोषित किया था. बीजेपी के इस कदम से माना जा रहा है कि पार्टी बंगाल की राजनीति (West Bengal Politics) में ममता बनर्जी को हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. बीजेपी (BJP) के मुकुल रॉय को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने पर नवनियुक्त राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद (Former CM) अनुपम हाजरा ने नाराजगी व्यक्त की है.



'मैंने फिर भी अपना कदम पीछे हटाया क्योंकि पार्टी में एक टीएमसी का नेता आ रहा है'
वहीं, बीजेपी में राष्ट्रीय सचिव के पद से हटाए गये राहुल सिन्हा (Rahul Sinha) ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर कहा 'मैंने बीजेपी में एक सैनिक की तरह 40 सालों से सेवा दी है, मैंने फिर भी अपना कदम पीछे हटाया क्योंकि पार्टी में एक टीएमसी का नेता आ रहा है, मेरे लिए शुरुआत से ही बीजेपी की सेवा करने के लिए मिले इस पुरस्कार से अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ और नहीं हो सकता है, मैं इस मुद्दे पर ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं हूं और ना ही में यह तय कर सकता कि यह गलत है या सही, लेकिन आने वाले 10-12 दिनों में मैं अपने भविष्य को लेकर फैसला लूंगा.'

गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में मुकुल रॉय, दिलीप घोष और राहुल सिन्हा के बीच मतभेदों की खबरें आती रही हैं. हालांकि तीनों नेताओं ने इससे इनकार किया था, बीजेपी में शामिल किए गए कई टीएमसी के नेताओं से पार्टी की मंशा साफ नजर आती है कि वह विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को मात देने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

मुकुल रॉय ने खुद को राजनीति का गैरी सोबर्स बताया था
न्यूज 18 से अपने पुराने इंटरव्यू में मुकुल रॉय ने खुद को राजनीति का गैरी सोबर्स बताया था. आज एक बार फिर उन्होंने कहा 'मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि जब तक दुनिया में क्रिकेट का अस्तित्व रहेगा तब तक लोग गैरी सोबर्स को याद करेंगे और जब तक राजनीति रहेगी, हमको कोई नजरअंदाज नहीं कर सकेगा.' वहीं पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष ने रॉय पर टिप्पणी करते हुए कहा था 'यहां किसी भी तरह अंतर नहीं है, मुकुल रॉय को प्रमाण देने वाला मैं कोई नहीं होता, उन्होंने मुझसे कहा कि वह बीजेपी में हैं और बीजेपी में ही रहेंगे, बस मैं इतना कहना चाहता हूं कि मैं फ्रंट-फुट पर आकर खेलने वाला खिलाड़ी हूं.'

इधर, रॉय और घोष की बीच हुई इस बयानबाजी के बाद कैलाश विजयवर्यीय ने कोलकाता में मुकुल रॉय से मुलाकात की तो वहीं दिलीप घोष बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली मिलने पहुंचे थे. इस दौरान आपसी विवाद के अलावा पश्चिम बंगाल में अगले साल अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई थी. लेकिन अब, पार्टी का उपाध्यक्ष घोषित होने के बाद से रॉय के लिए राजनीति में संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती लग रहा है. साथ ही विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर हैं.



'प्रदेश में बीजेपी के अंदर की कलह पुरानी है जो अब जनता के सामने आ चुकी है'
वहीं, जब बीजेपी में पूर्व टीएमसी के नेताओं के बीच कलह के बारे में टीएमसी सांसद सुगाता रॉय से पूछा गया तो उन्होंने कहा 'प्रदेश में बीजेपी के अंदर की कलह पुरानी है जो अब जनता के सामने आ चुकी है, यहा संदेह जैसी कोई स्थिति नहीं है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में बीजेपी कमजोर होती जा रही है, बीजेपी में असंतोष के कारण निचले स्तर के कई भाजपा कार्यकर्ता अब टीएमसी में शामिल हो रहे हैं क्योंकि वे ममता बनर्जी पर विश्वास करते हैं.'

न्यूज 18 से बात करते हुए राजनीतिक विशेषज्ञ कपिल ठाकुर ने कहा ' बीजेपी नेतृत्व ने महसूस किया है कि कुछ राज्य के नेताओं को छोड़कर (जैसा कि उनमें से अधिकांश बंगाल की राजनीति में कोई प्रभाव पैदा करने में विफल रहे थे), उनके लिए सत्तारूढ़ टीएमसी के खिलाफ लड़ना मुश्किल होगा, क्योंकि 18 लोकसभा सीटों में से जीतने वाले तीन नेता टीएमसी के साथ थे.

लोकसभा में ऐतिहासिक जीत के बावजूद BJP को लगातार 3 बार हार का मुंह देखना पड़ा
हालांकि, अनुपम हाजरा की भी लोकसभा चुनाव में हार हुई थी. बावजूद इसके राहुल सिन्हा को राष्ट्रीय सचिव के पद से हटाकर हाजरा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई. वहीं, बाकियों की जीत टीएमसी विरोधी मतों कारण हुई थी. ऐसे में बंगाल में तीन सीटों पर हार ने बीजेपी की आंख खोलने काम किया था. लोकसभा में ऐतिहासिक जीत के बावजूद बीजेपी को बंगाल में लगातार तीन बार हार का मुंह देखना पड़ा. जिसमें कि दिलीप घोष का खुद का निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है.

बीजेपी में रॉय का कद बढ़ने पर उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में रॉय के लिए मतभेदों का कभी अंत नहीं होगा. उन्होंने कहा कि रॉय के सामने दो बड़ी चुनौती है. उनके लिए पहली चुनौती राज्य में ममता बनर्जी के खिलाफ जीत दर्ज करनी है तो वहीं दूसरी चुनौती में उन्हें पार्टी के अंदरूनी नेताओं से पैठ बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि हाल ही में खड़गपुर से एक बीजेपी नेता ने टीएमसी में शामिल होकर उनकी चिंता बढ़ा दी है.

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वहीं, सीपीएम (एम) की आमिया पात्रा ने मुकुल रॉय को बिना किसी विचारधारा वाला और अवसरवादी नेता बताया है. बता दें कि बीजेपी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित होने पर मुकुल रॉय ने कहा कि अगले साल मार्च,अप्रैल या मई में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और अन्य नेताओं के साथ मेरी यह जिम्मेदारी बनती है कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में भारी मतों से सत्ता में लेकर आएं.'
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