बीजेपी कुछ बना नहीं सकती सिर्फ बर्बाद कर सकती है- राहुल गांधी

एक रिपोर्ट के अनुसार देश की जीडीपी वृद्धि जून तिमाही में 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है.

News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 3:08 PM IST
बीजेपी कुछ बना नहीं सकती सिर्फ बर्बाद कर सकती है- राहुल गांधी
(AP Photo Altaf Qadri)
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Updated: August 3, 2019, 3:08 PM IST
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऑटो क्षेत्र के संकट और आर्थिक विकास में आई सुस्ती संबंधी खबरों को लेकर शनिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश में कुछ निर्माण नहीं कर सकती, वह सिर्फ दशकों की कड़ी मेहनत से बनी संस्थाओं को नष्ट कर सकती है.

गांधी ने ट्वीट किया, 'भाजपा सरकार कुछ निर्माण नहीं कर सकती. वह सिर्फ उन चीजों को नष्ट कर सकती है जो दशकों की कड़ी मेहनत और लगन से निर्मित हुई हैं.' इससे पहले पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि देश के कुछ जानेमाने उद्योगपतियों के आगाह करने के बावजूद यह सरकार 'विकास के बजाय विभाजन' में लगी हुई है.

इससे पहले 1 अगस्त को राहुल ने कहा था कि 'प्रधानमंत्री जी, अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. सुरंग में दूर-दूर तक कोई रोशनी दिखाई नहीं दे रही है. अगर आपकी असमर्थ वित्त मंत्री आपको बता रही हैं कि रोशनी है तो मुझ पर विश्वास करिए कि मंदी की ट्रेन पूरी रफ्तार पकड़ने वाली है.' टि्वटर पर शेयर की गई खबर के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल सुस्त चल रही है. अभी निकट भविष्य में इसके रफ्तार पकड़ने का कोई संकेत भी नहीं दिख रहा है.'
वहीं सुरजेवाला ने ट्वीट किया, "कार बिक्री में 15 से 48 प्रतिशत तक की गिरावट. 30 इस्पात कंपनियां बंद हुईं.' उन्होंने दावा किया, "औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख नाम राहुल बजाज, आदि गोदरेज, नारायणमूर्ति ने सामाजिक वैमनस्य, घृणा अपराध और मंदी को लेकर आगाह किया.'


सुरजेवाला ने कहा, 'फिर भी मोदी सरकार ‘रोजगार के बजाय तिरस्कार’ और ‘विकास के बजाय विभाजन’ पर ध्यान लगाए हुए है. यह न्यू इंडिया है.'

आई थी यह रिपोर्ट

बीते दिनों आई एक रिपोर्ट के अनुसार नीति निर्माताओं की ओर से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को फिर से तेज करने के प्रयासों के बावजूद देश की जीडीपी वृद्धि जून तिमाही में 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है. जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा की हालिया रपट में यह कहा गया है. नोमुरा की रपट के मुताबिक भारत में 'लघु अवधि में मायूसी और मध्यम अवधि में आशा' का अनुमान है.
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रपट में कहा गया है कि उपभोग एवं सेवाओं में सुस्ती के कारण नरमी रहेगी. इसके लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जारी संकट को कारक बताया गया है. ये कंपनियां सितंबर, 2018 में नकदी के संकट में फंस गयीं. इससे पहले लोगों को टिकाऊ उपभोग के सामानों की खरीदन के लिए कर्ज में उनका बड़ा योगदान था. इसके अलावा कमजोर वैश्विक वृद्धि और नकदी में कमी को भी नरमी के कारकों के रूप में गिनाया गया है.

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'जीडीपी को अभी और नीचे आना है'

हालांकि, ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक उद्योग एवं निवेश संकेतक अपेक्षाकृत स्थिर हैं. रपट में कहा गया है, 'हमारा मानना है कि जीडीपी को अभी और नीचे आना है. हमारा अनुमान है कि मार्च के 5.8 प्रतिशत से घटकर यह जून तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर रह जाएगा.'

नोमुरा का अनुमान है कि सितंबर में देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो जाएगी. उसके बाद की तिमाही में जीडीपी वृद्धि की रफ्तार 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. उल्लेखनीय है कि मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 5.8 प्रतिशत एवं वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी की रफ्तार सुस्त होकर कई वर्ष के निम्न स्तर 6.8 प्रतिशत पर आ गयी.

भारत की जीडीपी रफ्तार में यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गयी है जब सरकार ने 2025 तक देश को पांच हजार अरब की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है और इस लक्ष्य को हासिल करने को कम-से-कम आठ प्रतिशत की सालाना वृद्धि आवश्यक है.

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भाषा इनपुट के साथ
First published: August 3, 2019, 3:04 PM IST
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