सबरीमाला पर केरल सरकार की बैठक फेल, कांग्रेस-बीजेपी ने किया वाकआउट

सबरीमाला पर केरल सरकार की बैठक फेल, कांग्रेस-बीजेपी ने किया वाकआउट
सबरीमाला मंदिर पर विवाद बढ़ता जा रहा है.

मंदिर में महिलाओं की एंट्री वाले फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई है. वहीं, बीजेपी की ओर से केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर सबरीमाला मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की मांग की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2018, 4:08 PM IST
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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है. गुरुवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की. हालांकि बैठक सफल नहीं रही. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों बैठक से वाकआउट कर गए. इससे पहले कांग्रेस और बीजेपी ने केरल सरकार को सलाह दी कि सबरीमाला मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करने के लिए शीर्ष अदालत से थोड़ी और मोहलत लेनी चाहिए.

गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर से जुड़े कई मामलों पर चर्चा हुई. कांग्रेस और बीजेपी समेत बाकी दल मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सहमत थे, लेकिन इन दलों ने फैसला लागू होने को लेकर राज्य में तनाव और हिंसा की आशंका भी जाहिर की. कांग्रेस और बीजेपी ने कहा कि राज्य की शांति के लिए पिनराई सरकार को सबरीमाला पर फैसला लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगना चाहिए.

वहीं, मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वाले लोगों ने आगे भी प्रदर्शन जारी रखने का फैसला लिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर महिलाओं से मंदिर की रक्षा करेंगे.



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बता दें कि सबरीमाला मंदिर में 10 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था. इसके बावजूद स्थानीय लोगों और कुछ धार्मिक संस्थाओं के विरोध के चलते 10 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया.

मंदिर में महिलाओं की एंट्री वाले फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई है. वहीं, बीजेपी की ओर से केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर सबरीमाला मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की मांग की गई है. इस याचिका पर हाईकोर्ट ने केरल सरकार से पक्ष मांगा था. सोमवार को केरल सरकार की तरफ से कहा गया है कि सबरीमाला मंदिर धर्म निरपेक्ष है और मंदिर के द्वार सभी लोगों के लिए खुले हैं.

सरकार की तरफ से दायर किए गए शपथपत्र में कहा गया है, 'यह ऐतिहासिक सत्य है कि सबरीमाला मंदिर धर्मनिरपेक्ष है. मंदिर में किसी भी श्रद्धालु का धर्म या जाति के आधार पर प्रवेश प्रतिबंधित नहीं है.' शपथपत्र में लिखा है, 'यह सच है कि सन्नीधनम में वावर नादा सबरीमाला के साथ सह-अस्तित्व में थे. अति प्राचीन काल से मुसलमान वावर नादा और सबरीमाला मंदिर दोनों जगह प्रार्थना करने आते थे.'
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