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एक साथ चुनाव: TMC और CPI ने किया जोरदार विरोध, BJP-कांग्रेस ने नहीं लिया हिस्सा

एक साथ चुनाव: TMC और CPI ने किया जोरदार विरोध, BJP-कांग्रेस ने नहीं लिया हिस्सा

(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर)

‘एक देश, एक चुनाव’ की सरकार की अवधारणा को आकार देने के लिए विधि आयोग के आंतरिक कार्य पत्र में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ कराने की सिफारिश की गई है

    लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर विचार-विमर्श के लिए विधि आयोग के बुलावे पर शनिवार को सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के किसी प्रतिनिधि ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया. आज विचार-विमर्श का पहला दिन था. इस बीच, क्षेत्रीय पार्टियों ने आशंका जताई है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने पर राष्ट्रीय पार्टियां और राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी माहौल में ज्यादा हावी हो जाएंगे और इसका नुकसान छोटी पार्टियों को उठाना पड़ेगा.

    तृणमूल कांग्रेस और भाकपा दो ऐसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां हैं जिन्होंने आज के विचार-विमर्श में हिस्सा लिया. सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का जोरदार विरोध किया. विचार-विमर्श में शामिल रहे विधि आयोग के सूत्रों ने बताया कि केंद्र में सत्ताधारी एनडीए की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि इससे पार्टियों के खर्च में कमी आएगी और विकास कार्यों को बाधित करने वाली आदर्श आचार संहिता की अवधि कम होगी.

    अकाली दल का प्रतिनिधित्व पार्टी के राज्यसभा सदस्य नरेश गुजराल ने किया. उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने के लिए किसी विधानसभा का कार्यकाल बढ़ाए जाने की स्थिति में राज्यसभा चुनावों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया. विधि आयोग के एक सदस्य ने कहा, ‘यह एक अहम मुद्दा है जिसे ध्यान में रखने की जरूरत है.’

    अन्नाद्रमुक का प्रतिनिधित्व लोकसभा के डिप्टी स्पीकर एम थंबीदुरई ने किया. उन्होंने कहा कि दोनों चुनाव एक साथ कराना ‘जरूरी’ तो है, लेकिन कुछ ‘व्यावहारिक’ और ‘गंभीर’ मुद्दे सुलझाने की जरूरत है. तमिलनाडु में सत्ताधारी अन्नाद्रमुक ने कहा कि यदि जरूरी ही है तो एक साथ चुनाव 2024 में कराए जाएं और उससे पहले कतई नहीं.

    सूत्रों ने बताया कि पार्टी का यह भी मानना है कि तमिलनाडु विधानसभा को अपना कार्यकाल पूरा करने की इजाजत दी जानी चाहिए और लोकसभा चुनाव अपने कार्यक्रम के अनुसार कराए जाने चाहिए. बैठक में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पार्टी के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने किया. तृणमूल ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दे हावी हो जाएंगे और राष्ट्रीय पार्टियां अपने ‘धनबल’ पर छोटी पार्टियों को हाशिये पर डालने में कामयाब हो जाएंगी.

    इस बीच , बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा कि एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव ‘अव्यावहारिक और अलोकतांत्रिक’ है. भाकपा, एआईडीयूएफ और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने भी ऐसी ही राय जाहिर की. आईयूएमएल ने चुनाव सुधार पर अपनी राय रखी.

    विधि आयोग के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘लेकिन हमने उनसे कहा कि अभी एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर चर्चा हो रही है.’ सूत्रों के मुताबिक, एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव की समर्थक भाजपा ने इस मुद्दे पर अपना नजरिया पेश करने के लिए आयोग से मोहलत मांगी है. उसे 31 जुलाई तक अपना नजरिया बताने को कहा गया है, क्योंकि मौजूदा विधि आयोग का कार्यकाल अगस्त के अंत तक है.

    इस बीच, कांग्रेस ने कहा कि वह इस बारे में अपने कदम पर फैसला करने से पहले अन्य विपक्षी पार्टियों से विचार-विमर्श करेगी. माकपा ने पिछले हफ्ते विधि आयोग से कहा था कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना सरासर ‘अलोकतांत्रिक’ है और यह संविधान की मूल विशेषता में शामिल ‘संघवाद’ के सिद्धांत के खिलाफ है.

    आयोग ने 14 जून को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से इस मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करने को कहा था. ‘एक देश, एक चुनाव’ की सरकार की अवधारणा को आकार देने के लिए विधि आयोग के आंतरिक कार्य पत्र में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ कराने की सिफारिश की गई है लेकिन कहा गया है कि यह चुनाव दो चरणों में कराए जाएं और इसकी शुरुआत 2019 से हो. दस्तावेज के मुताबिक, एक साथ चुनाव का दूसरा चरण 2024 में होना चाहिए.

    इस दस्तावेज में संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है ताकि इस कदम को प्रभावी बनाने के लिए विधानसभाओं के कार्यकाल में विस्तार किया जाए या कमी की जाए. पहले चरण में उन राज्यों को शामिल किया जाएगा जहां 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं.

    उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य दूसरे चरण में शामिल होंगे. इन राज्यों में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने के लिए इनकी विधानसभाओं के कार्यकाल में विस्तार करना होगा.

    Tags: BJP, Congress, Law commission

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