पश्चिम बंगाल में गणेसोत्‍सव के सहारे सियासी जमीन मजबूत कर रही बीजेपी, टीएमसी ने की थी कभी शुरुआत

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Updated: September 11, 2019, 6:34 PM IST
पश्चिम बंगाल में गणेसोत्‍सव के सहारे सियासी जमीन मजबूत कर रही बीजेपी, टीएमसी ने की थी कभी शुरुआत
कोलकाता में इस साल 250 से ज्‍रूादा जगहों पर गणेश चतुर्थी पूजन का आयोजन किया गया.

2014 में बीजेपी के पश्चिम बंगाल में उभार ने धार्मिक आयोजनों को बढ़ाया, लेकिन मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने राज्‍य में नए त्‍योहारों और देवी-देवताओं को स्‍थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है. उन्‍होंने वामदल को राज्‍य की सत्‍ता से उखाड़ने के लिए त्‍योहारों का जमकर सियासी इस्‍तेमाल किया था. 

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राखी बोस
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) के लोगों के लिए ढाक और पंडाल का मतलब दुर्गा पूजा से रहा है. पिछले कुछ साल में बंगाली लोग राज्‍य में कम प्रचलित अन्‍य हिंदू त्‍योहारों (Hindu Festivals) पर ढाक से अलग ढोल पर भी नाचते हुए दिखने लगे हैं. पिछले कुछ साल में दुर्गा पूजा (Durga Pooja) के अलावा अन्‍य हिंदू त्‍योहारों को भी जोश के साथ मनाने का चलन बढ़ा है. कुछ समय पहले तक बंगाल के लोग दशहरा के समय पारंपरिक तौर पर दुर्गा पूजा और काली पूजा ही मनाते थे. हालांकि, पिछले एक दशक में राज्‍य में शिवरात्रि, जमई शोष्‍टी, सरस्‍वती पूजा, तारकेश्‍वर यात्रा, छठ पूजा का चलन बढ़ा है.

राज्‍य में लगातार बढ़ रही है गणेशोत्‍सव आयोजनों की तादाद
पश्चिम बंगाल में पिछले पांच साल में देश के दूसरे हिस्‍सों में मनाए जाने वाले गणेश चतुर्थी और रामनवमी जैसे हिंदू त्‍योहार भी पूरे जोश के साथ मनाए जाने लगे हैं. इस साल सिर्फ कोलकाता में ही 250 जगह गणेश चतुर्थी पूजा का आयोजन किया गया, जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 210 जगह का था. कोलकाता ही नहीं सिलिगुड़ी जैसी जगहों पर भी गणेश चतुर्थी पर पूजन के आयोजना की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. पिछले साल में सिलिगुड़ी में गणेश चतुर्थी पूजन के आयोजनों की संख्‍या 30 से 180 पहुंच गई है.

'सड़कों पर निकाले जा रहे जुलूस, लोग लगा रहे जय श्रीराम के नारे' 
ज्‍यादातर बंगाली लोग देवी की पूजा घर पर या छोटे पंडालों में करते थे. अब राज्‍य के ज्‍यादातर शहरों में बड़े-बड़े पंडाल बनाकर गणेश चतुर्थी का आयोजन किया जा रहा है. कोलकाता के भवानीपुर में रहने वाले एक शोधकर्ता का कहना है कि हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा. यह बंगाल के लिए जश्‍न मनाने का नया तरीका है. उनके पड़ोसियों ने गणेश चतुर्थी कभी इस तरह नहीं मनाई जैसे अब मना रहे हैं. ज्‍यादातर चौराहों पर घूम रहे लोग जय श्रीराम के नारे लगा रहे हैं. स्‍थानीय युवक आजम ने कहा कि लोग ट्रकों में भर-भरकर आ रहे हैं और प्रिंस अनवर शाह मार्ग पर जय श्रीराम के नारे लगाते घूम रहे हैं.

रामनवमी के जुलूसों में कई जगह हुई थीं हिंसक घटनाएं
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गणेश चतुर्थी के अलावा बंगाल में रामनवमी की भी धूम नजर आई थी.  यह त्‍योहार तेजी से राज्‍य में प्रचलित हुआ. कई जगह सत्‍तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और तेजी से उभर रही बीजेपी (BJP) के कार्यकर्ताओं में रामनवमी मनाने को लेकर हिंसक झड़प हुईं. लोकसभा चुनाव के समय अप्रैल-मई में राज्‍य में हर तरफ बीजेपी नजर आ रही थी. बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष दिलीप घोष ने रामनवमी के जुलूसों में लोगों के हथियार लेकर चलने को सही ठहराया. उन्‍होंने दलील दी कि जब मुहर्रम में लोग हथियार लेकर चल सकते हैं तो रामनवमी के जुलूस के लिए अलग नियम क्‍यों? दो दिन के जश्‍न के दौरान बर्धवान और आसनसोल में हिंसा की कई वारदातें हुईं.

गणेश चतुर्थी के अलावा बंगाल में रामनवमी की भी धूम नजर आई थी. यह त्‍योहार तेजी से राज्‍य में प्रचलित हुआ.


विहिप ने राज्‍य सरकार को ठहराया था हिंसा के लिए जिम्‍मेदार
विश्‍व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्‍ता एस. मुखर्जी ने रामनवमी के दौरान हिंसा के लिए राज्‍य सरकार को जिम्‍मेदार ठहराया. विहिप ने ही कुछ साल पहले राज्‍य में रामनवमी और जन्‍माष्‍टमी की रैलियां निकालना शुरू किया था. राज्‍य में गणेश पूजन के आयोजनों में बढ़ोतरी पर मुखर्जी का कहना है कि लोगों की धार्मिक चेतना जागने के कारण ऐसा हो रहा है. मुखर्जी ने News18 से कहा कि अब लोगों को राज्‍य सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति साफ दिखने लगी है. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के बंगाल सचिव जिश्‍नु बसु ने News18 से कहा कि गणेश पूजन के आयोजनों में बढ़ोतरी के पीछे कोई सियासत नहीं है. बंगाल के लोग बहुत धार्मिक हैं और उन्‍हें उत्‍सव पसंद हैं. इसलिए ऐसा हो रहा है.

टीएमसी ने कहा, त्‍योहारों के जरिये समर्थन जुटा रहे विपक्षी दल
टीएमसी विधायक उदयन गुहा का कहना है कि गणेश चतुर्थी के अलावा राज्‍य में साप्‍ताहिक शनि पूजा और शिव पूजा का चलन भी तेजी से बढ़ा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया. उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि बहुत से टीएमसी कार्यकर्ता और वह खुद गणेश पूजन में शामिल हुए. उन्‍होंने News18 से कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्‍हें लोगों का समर्थन करना होता है. उनके आयोजनों में शामिल होना होता है. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि टीएमसी ने गणेश चतुर्थी के लिए किसी तरह का आधिकारिक दान नहीं किया है. उन्‍होंने अंदेशा जताया कि अचानक गणेश पूजन की बढ़ी संख्‍या के जरिये विपक्ष राज्‍य में अपने लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक दल त्‍योहारों का इस्‍तेमाल राज्‍य में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए कर रहे हैं.

टीएमसी ने शुरू किया था त्‍योहारों के सियासी इस्‍तेमाल का चलन
बेशक 2014 से पश्चिम बंगाल की सियासत में तेजी से उभर रही बीजेपी ने धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा दिया है, लेकिन मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी लोगों को लुभाने के लिए नए-नए त्‍योहारों और हिंदू देवी-देवताओं को राज्‍य में स्‍थापित कने में कोई कसर नहीं छोड़ी. राजनीतिक व सांस्‍कृतिक टिप्‍पणीकार जवाहर सरकार के मुताबिक यह नई बोतल में पुरानी शराब जैसा है. ममता बनर्जी ने भी वामदलों की सरकार को उखाड़ने के लिए कुछ ऐसे ही तरीकों का इस्‍तेमाल किया था. बनर्जी ने सीधे वामदलों के स्‍ट्रीट गैंग्‍स को चुनौती दी थी, जिससे टीएमसी के समर्थकों की संख्‍या लगातार बढ़ती चली गई. जवाहर सरकार के मुताबिक, बीजेपी ने नहीं ममता बनर्जी की टीएमसी ने राज्‍य में त्‍योहारों का इस्‍तेमाल सियासत के लिए किया.

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First published: September 11, 2019, 6:34 PM IST
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