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प्रियंका गांधी बोलीं- सरकार ने भारतीय रेल को बुरी हालत में पहुंचाया, अब बेचना शुरू करेगी

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 1:26 PM IST
प्रियंका गांधी बोलीं- सरकार ने भारतीय रेल को बुरी हालत में पहुंचाया, अब बेचना शुरू करेगी
प्रियंका गांधी ने कैग की रिपोर्ट के आधार पर हमला बोला.

संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे का परिचालन अनुपात (आपरेटिंग रेशियो) 2015..16 में 90.49 प्रतिशत, 2016..17 में 96.5 प्रतिशत रहा था

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  • Last Updated: December 3, 2019, 1:26 PM IST
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नई दिल्ली. रेलवे (Indian Railway) का परिचालन खर्च 10 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस (Congress) महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi vadra) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भाजपा (BJP) सरकार ने भारतीय रेल को बुरी स्थिति में ला दिया है और अब वह इसे बेचने की कवायद शुरू कर देगी.

प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, 'भारतीय रेल देश की जीवन रेखा है. अब भाजपा सरकार ने भारतीय रेल को भी सबसे बुरी हालत में लाकर खड़ा कर दिया है.' प्रियंका ने दावा किया, 'कुछ दिनों बाद बाकी सरकारी उपक्रमों की तरह भाजपा सरकार रेलवे को भी बेचना शुरू कर देगी... क्योंकि भाजपा सरकार का स्किल बनाना नहीं, बेचना है.'

प्रियंका गांधी वाड्रा का ट्वीट


गौरतलब है कि संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग- CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे का परिचालन अनुपात (ऑपरेटिंग रेशियो) 2015..16 में 90.49 प्रतिशत और 2016..17 में 96.5 प्रतिशत रहा था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेल का परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत रहने का मुख्य कारण इसका संचालन खर्च बढ़ना है. रेलवे की परिचालन लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. यह बात इसके परिचालन अनुपात से पता चलती है जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 10 साल के उच्च स्तर 98.44 प्रतिशत पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि रेलवे को 100 रूपये कमाने के लिये 98.44 रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेल का परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत रहने का मुख्य कारण इसका संचालन खर्च बढ़ना है.

पूंजीगत व्यय 5.82 प्रतिशत घटा 
इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2008..09 में रेलवे का परिचालन अनुपात 90.48 प्रतिशत था जो 2009..10 में 95.28 प्रतिशत, 2010..11 में 94.59 प्रतिशत, 2011..12 में 94.85 प्रतिशत, 2012..13 में 90.19 प्रतिशत, 2013..14 में 93.6 प्रतिशत, 2014..15 में 91.25 प्रतिशत हो गया. कैग ने सिफारिश की है कि रेलवे को आंतरिक राजस्व बढ़ाने के लिए उपाय करने चाहिए ताकि सकल और अतिरिक्त बजटीय संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सके.रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेल का कुल व्यय 2016..17 में 2,68,759.62 करोड़ रूपये से बढ़कर 2017..18 में 2,79,249.50 करोड़ रूपये हो गया. इसमें पूंजीगत व्यय 5.82 प्रतिशत घटा है जबकि वर्ष के दौरान राजस्व व्यय में 10.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके अनुसार कर्मचारी लागत, पेंशन भुगतानों और रोलिंग स्टाक (रेल डिब्बे आदि) पर पट्टा किराया मद में खर्च 2017..18 में कुल संचालन व्यय का लगभग 71 प्रतिशत था.

कैग की रिपोर्ट में की गई यह सिफारिश 
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेल का सबसे बड़ा संसाधन माल भाड़ा है और उसके बाद अतिरिक्त बजटीय संसाधन और यात्री आय है. हालांकि, अतिरिक्त बजटीय संसाधन और डीजल उपकर की हिस्सेदारी 2017..18 में बढ़ गई है जबकि 2012..17 के दौरान प्राप्ति के औसत आंकड़ों की तुलना में माल भाड़ा, यात्री आय, जीबीएस और अन्य हिस्सेदारी 2017..18 में घट गई.

कैग की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि रेलवे को आंतरिक राजस्व बढ़ाने के लिए उपाय करने चाहिए ताकि सकल और अतिरिक्त बजटीय संसाधनों पर निर्भरता रोकी जा सके. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे बाजार से प्राप्त निधियों का पूर्ण रूप से उपयोग करना सुनिश्चित करे.

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First published: December 3, 2019, 1:02 PM IST
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