2020 विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार के मुद्दे पर बिहार BJP दो फाड़

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: September 12, 2019, 4:37 PM IST
2020 विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार के मुद्दे पर बिहार BJP दो फाड़
सीएम नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी. (फाइल फोटो)

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के समर्थन में सुशील मोदी (Sushil Kumar Modi) के ट्वीट और मिथिलेश तिवारी (Mithilesh Tiwari) द्वारा फैसला लेने का अधिकार केंद्रीय नेतृत्व को वाले बयान से यह साफ जाहिर है कि नीतीश के नेतृत्व के मुद्दे पर BJP में एकमत बिल्कुल नहीं है.

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पटना. 2020 के चुनाव में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एनडीए (NDA) का नेतृत्व करेंगे या नहीं, इस पर बिहार (Bihar) बीजेपी (BJP) में ही इस समय घमासान मचा हुआ है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता संजय पासवान ने पहले बयान दिया कि नीतीश कुमार अब बिहार की गद्दी बीजेपी के लिए छोड़ें. इस बयान पर पहले जेडीयू (JDU) और बीजेपी में बहस शुरू हुई. लेकिन इसे तब और हवा मिली, जब डिप्टी सीएम सुशील मोदी (Sushil Modi) ने ट्वीट कर यह कह दिया कि नीतीश कुमार ही 2020 के चुनाव में एनडीए के कप्तान होंगे. उनके इस बयान का कोई समर्थन करता, इससे पहले बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने यह कह दिया कि इसका फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. इससे साफ हुआ कि नीतीश कुमार के नेतृत्व पर अब बीजेपी में एकमत नहीं है.

बिहार एनडीए में सबसे बड़ी समस्या यह है कि समय-समय पर नीतीश कुमार बिहार एनडीए में सर्वमान्य नेता है या नहीं, इसपर बहस शुरू हो जाती है. आपको याद होगा कि कुछ ऐसी बहस इस वर्ष विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान भी हुई थी, जिस पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी विधानसभा के भीतर वित्तीय मामलों पर सरकार का पक्ष रखते हुए यह बोल गए कि 2020 का चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. इसमें कोई संदेह या सवाल नहीं है.

सुशील मोदी ने नीतीश को कप्तान बताते हुए किया था ट्वीट
उस समय सबने सोचा कि सारे बहस पर विराम लग गया. लेकिन संजय पासवान के बयान ने इस विवाद को फिर से बढ़ा दिया. मामला इतना बढ़ा कि सुशील मोदी को इसमें आगे आना पडा. उन्होंने 11 सितंबर को ट्वीट कर कहा कि नीतीश ही 2020 के चुनाव में एनडीए के कप्तान होंगे. इस ट्वीट के आने के बाद सियासी हलकों में यह चर्चा हुई कि सुशील मोदी नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं.

बीजेपी उपाध्यक्ष बोले- फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या विवाद को खत्म करने के लिए नीतीश कुमार के इशारे पर तो यह ट्वीट नहीं किया गया. लेकिन इसी दिन शाम होते-होते बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी का बयान आया कि 2020 की बात 2020 में ही होगी. और अगर होगी तो इसपर फैसला यहां से नहीं होगा, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के लेवल से होगा. जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव और प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय शामिल हैं.

Sushil Kumar Modi
बीजेपी नेता और बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी. (फाइल फोटो)

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फैसला लेने का अधिकार सुशील मोदी को नहीं
मिथिलेश तिवारी के बयान में साफ संकेत था कि एनडीए के नेतृत्व का फैसला लेने का अधिकार सुशील मोदी को नहीं है. इसी मुद्दे पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉ सीपी ठाकुर ने बोला कि नीतीश कुमार को कप्तान बनाने का बयान सुशील मोदी को नहीं देना चाहिए था.

बिहार में बीजेपी के दो धड़े
यह जगजाहिर है कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी काफी करीब हैं. ये दोनों एक दूसरे पर उस समय भी हमलावर नहीं थे, जब कुछ समय के लिए 2015 में बीजेपी-जेडीयू अलग हुए थे. बिहार बीजेपी में पिछले काफी समय से दो धड़े है. एक सुशील मोदी समर्थक तो दूसरा एंटी सुशील मोदी धड़ा. पूरे घटनाक्रम और बयानों पर नजर डालें तो नीतीश कुमार के नेतृत्व के खिलाफ जिन लोगों ने बयान दिए हैं, वे एंटी सुशील मोदी माने जाते हैं. जबकि उन नेताओं ने इस मामले पर कभी कुछ नहीं बोला जो सुशील मोदी के साथ के माने जाते हैं.

बीजेपी में नीतीश को लेकर एकमत नहीं
बीजेपी का एक बड़ा धड़ा हमेशा से यह मानता है कि बीजेपी के वोटबैंक के दम पर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं. फिर भी बीजेपी को नीतीश कुमार की छाया में रहना होता है. अब समय आ गया है कि बीजेपी को नेतृत्व की कमान अपने हाथ में लेनी चाहिए. अब तो बीजेपी के पास नरेंद्र मोदी जैसा चेहरा है. लेकिन सुशील मोदी और उनके साथ के नेता हमेशा से यह मानते हैं कि चाहे कुछ भी हो नीतीश कुमार के साथ रहने में ही बीजेपी का फायदा है.

2015 का चुनाव इसका उदाहरण है. इसी कारण जब भी नेतृत्व का विवाद होता है, तो उसपर विराम लगाने के लिए सुशील मोदी आगे आते हैं. बिहार के चुनाव में अभी समय है. जाहिर है जैसे-जैसे समय नजदीक आएगा, इस तरह के बयान अभी और आएंगे. रुठने, मनाने और लुभाने का सिलसिला बदस्तूर चलता रहेगा.

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First published: September 12, 2019, 3:41 PM IST
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