बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद फेंक दी हिंदुत्व की सीढ़ियां: शिवसेना

बीजेपी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने दावा किया कि हिंदू आज निराश हैं. भाजपा ने उसी तरह से हिंदुओं का इस्तेमाल किया, जैसे कांग्रेस ने मुसलमानों का.

भाषा
Updated: September 11, 2018, 8:31 PM IST
बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद फेंक दी हिंदुत्व की सीढ़ियां: शिवसेना
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
भाषा
Updated: September 11, 2018, 8:31 PM IST
शिवसेना ने मंगलवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘हिंदुत्व की सीढ़ियां’ चढ़कर सत्ता में आई, लेकिन उद्देश्य पूरा होने के बाद इसे फेंक दिया गया. हिंदुओं से किया गया एक भी वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में ऐसा आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने कम से कम इतने वर्षों तक मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश की, लेकिन भाजपा हिंदुओं का ख्याल रखने की बजाय उन्हें धर्मनिरपेक्ष बनाने में लगी हुई है.

शिवसेना ने दावा किया कि हिंदू आज निराश हैं. भाजपा ने उसी तरह से हिंदुओं का इस्तेमाल किया, जैसे कांग्रेस ने मुसलमानों का. हिंदुओं से किया गया एक भी वादा भाजपा ने अब तक पूरा नहीं किया है, चाहे वह राम मंदिर हो या समान नागरिक संहिता हो. चुनाव से पहले यह सब भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व एजेंडे में था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस आक्रामकता की हवा निकल गई. भाजपा कांग्रेस की तरह हो गई है. देश का कांग्रेस से कांग्रेस तक का सफर शुरू हो गया है.

शिवसेना ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी उनके उस बयान के लिये आड़े हाथ लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को वर्चस्व की कोई आकांक्षा नहीं है. इसपर शिवसेना ने कहा कि उनसे अपेक्षा थी कि वह देश के मौजूदा हालात के बारे में बोलेंगे. जहां हिंदुओं को आतंकवादी बताया जा रहा है और उन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही है.

बता दें कि पिछले शुक्रवार को शिकागो में द्वितीय विश्व हिंदु कांग्रेस को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा था कि हिंदुओं को वर्चस्व की कोई आकांक्षा नहीं है. उन्होंने हिंदुओं से आह्वान किया था कि वे एकजुट हों और खुद को संगठित करें. शिवसेना ने कहा कि नरेंद्र मोदी सिर्फ इसलिये प्रधानमंत्री बने क्योंकि हिंदू एकसाथ आए और आक्रामक हुए, लेकिन साथ आने और इस आक्रामकता से क्या फायदा हुआ?

सामना ने लिखा है, ‘शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़कर हिंदुत्व की पीठ में छुरा घोंपा गया है और जो लोग हिंदुत्व और देश के पक्ष में आक्रामक तरीके से बोलते हैं उन्हें भाजपा द्वारा शत्रु करार दिया जाता है.’ सामना में लिखा है कि सत्ता में बैठे फर्जी हिंदुत्ववादी आज आक्रामक हिंदुत्व की आवाज को दबाने की आकांक्षा रखते हैं और अपने ही देश में हिंदुओं को आतंकवादी बताकर खत्म करने में लगे हुए हैं.’

पार्टी ने कहा कि भागवत से अपेक्षा थी कि वह शिकागो में इस बारे में बोलेंगे. पार्टी ने यह भी पूछा कि विश्व हिंदू कांग्रेस में उसके लिये कोई जगह क्यों नहीं थी? जबकि वह खुलेआम और आक्रामक तरीके से हिंदुत्व के बारे में बात करती है. सामना ने लिखा है कि शिवसेना की तरह अन्य संगठन भी अपनी क्षमताओं के अनुसार हिंदुओं के मुद्दे के लिये कार्य कर रहे होंगे. उन्हें भी विश्व हिंदू कांग्रेस में जगह दी जानी चाहिए थी। सामना ने लिखा है, ‘अगर हिंदू धर्म को साथ आना है, तो यह छुआछूत क्यों?'

संपादकीय में कहा गया है कि कश्मीर में आक्रामक होना तो दूर, ‘हिंदू राष्ट्र’ के लोग हिंदू विरोधी और पाकिस्तान समर्थक महबूबा मुफ्ती से प्रेम करने लगे और कश्मीरी पंडितों से विश्वासघात किया. इन सबके बीच हमने मोहन भागवत से तीखी प्रतिक्रिया की अपेक्षा की थी.
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