पश्चिम बंगाल में TMC का विकल्‍प बन रही BJP, लोगों के बीच बढ़ रहा प्रभाव: सर्वे

पश्चिम बंगाल में पकड़ मजबूत कर रही बीजेपी. (Pic- File PTI)
पश्चिम बंगाल में पकड़ मजबूत कर रही बीजेपी. (Pic- File PTI)

बीजेपी (BJP) ने खुद ही पश्चिम बंगाल में अपनी और विपक्ष की ताकत पहचानने के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों से राज्‍य के 78 हजार बूथों पर सर्वे कराया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 7:25 AM IST
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नई दिल्‍ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election 2020) के बीच बीजेपी के लिए एक अच्‍छी खबर आई है. यह खबर बिहार के पड़ोस के राज्‍य पश्चिम बंगाल (West Bengal) से है. हाल ही में कराए गए दो सर्वे के मुताबिक बीजेपी (BJP) का प्रभाव अब पश्चिम बंगाल में बढ़ रहा है. बंगाल की जनता अब बीजेपी को स्‍वाकार करने लगी है. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए झटका यह है कि अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी उसके विकल्‍प के तौर पर उभर रही है.हालांकि सर्वे में यह भी कहा गया है कि बीजेपी को कुछ क्षेत्रों में संगठनात्मक मुद्दों का समाधान निकालना बाकी है.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में अगले साल यानी 2021 में विधानसभा चुनाव प्रस्‍तावित हैं. राज्‍य में बीजेपी और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच सत्‍ता संघर्ष चलता रहता है. इसका सबसे अधिक उदाहरण पिछले विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था. अब बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव में बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर सत्‍ता पर खुद को विराजमान करना चाहती है. इसके लिए पार्टी पूरी कोशिश कर रही है.

बीजेपी ने खुद ही पश्चिम बंगाल में अपनी और विपक्ष की ताकत पहचानने के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों से राज्‍य के 78 हजार बूथों पर सर्वे कराया. इसमें पार्टी जनता का मिजाज जानना चाहतीथी. सूत्रों के अनुसार बीजेपी ऐसा ही एक और सर्वे इस महीने के अंत तक कराएगी. दोनों सर्वे 2019 के अंत और इस साल जुलाई में कराए गए थे. इन दोनों सर्वे को पार्टी के शीर्ष नेताओं के समक्ष पेश किया गया है. अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में पार्टी की रणनीति में ये सर्वे अहम भूमिका निभा सकते हैं.

पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे के संबंध में एक भाजपा नेता ने कहा है कि दूसरे सर्वे में पाया गया कि अम्फान चक्रवात के बाद तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों ने जमीनी परिस्थितियों में बड़ा बदलाव किया और यह परिवर्तन बीजेपी के पक्ष में है. ऐसे में पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है. इसलिए जमीनी हालात जानने के लिए सर्वे कराए गए.
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