राहुल के इस करीबी नेता को हराने के लिए पूर्व कांग्रेसी नेता उतारने की तैयारी में बीजेपी!

गुजरात जैसे राज्य में जहां हर सीट पर सीधी लड़ाई बीजेपी-कांग्रेस के बीच में होती है वहां चुनाव का माहौल गर्म हो गया है.

News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 7:10 PM IST
राहुल के इस करीबी नेता को हराने के लिए पूर्व कांग्रेसी नेता उतारने की तैयारी में बीजेपी!
(फाइल फोटो- प्रधानमंत्री मोदी के साथ राहुल गांधी)
News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 7:10 PM IST
विजयसिंह परमार.

लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. हर राजनीतिक पार्टी प्रमुखता से अपने-अपने उम्मीदवारों का चयन कर रही है. गुजरात जैसे राज्य में जहां हर सीट पर सीधी लड़ाई बीजेपी-कांग्रेस के बीच में होती है वहां चुनाव का माहौल गर्म हो गया है. बीजेपी ने राहुल गांधी के करीबी परेश धनानी के गढ़ में मिशन-26 को साधने के लिए अपने भरोसेमंद उम्मीदवार और लाठी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक हनुभाई ढोराजिया को उतारने की तैयारी कर रही है.

हनुभाई ढोराजिया लेवा पटेल समुदाय के वरिष्ठ नेता हैं. हाथीगढ़ गांव से ताल्लुक रखने वाले हनुभाई सूरत में रहते हैं. पेशे से व्यापारी हनुभाई की आसपास के इलाकों में दानी की छवि है. ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विधवाओं और जरूरतमंदों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराते हैं.

(यह भी पढ़ें: कैसे नॉर्थ-ईस्ट को बीजेपी ने बना दिया 'कांग्रेस मुक्त'?)

हनुभाई को ग्रामीण इलाके में भाभा कहा जाता है. उनके समर्थक उन्हें इसी नाम से बुलाते हैं. 2007 से 2012 के बीच वे लाठी विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं लेकिन उन्हें बाद में टिकट नहीं दिया गया. टिकट न मिलने से नाराज हनुभाई ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया और कुछ दिनों बाद कांग्रेस में शामिल हो गए. लाठी विधानसभा क्षेत्र से 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी उम्मीदवार बावकु उनढाड से उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

(यह भी पढ़ें: मोदी के घर में बीजेपी की राजनीतिक जमीन मजबूत करेंगे कांग्रेस के ये नेता)

लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने उन्हें फिर से वापस बुला लिया. भगवा पार्टी का अमरेली जिले में 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में जनाधार डांवाडोल नजर आया ऐसे में हनुभाई का राजनीतिक समर में लौटना बीजेपी के लिए संजीवनी का काम कर सकती है.
Loading...

भाजपा में लौटने के बाद, उन्होंने कहा कि उनका बीजपी में लौटना 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थिति को मजबूत करने के लिए हुआ है.

अमरेली जिले में भाजपा की स्थिति को देखते हुए बीजेपी की मजबूरी है कि वो हर वो पैंतरे अपनाए जिसके चलते कांग्रेस कमजोर हो.

अमरेली लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें से बीजेपी को 2017 में हुए राज्य विधानसभा चुनावों सिर्फ दो सीटें हासिल हुई थीं. वहीं इसके उलट कांग्रेस को 5 विधानसभा सीटों पर आसान जीत मिली थी.

(यह भी पढ़ें: गुजरात में कांग्रेस को मजबूत होता देख ‘स्पेशल 26’ प्लान पर काम कर रही है BJP)

ध्यान देने वाली बात यह है कि बीजेपी से तीन बार के विधायक डॉक्टर कनुभाई कलसारिया हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं. कलसरिया अहिर जाति से आते हैं. महुआ विधानसभा सीट अमरेली लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है जहां इस समुदाय का पर्याप्त वर्चस्व है.

सूत्रों का कहना है कि अमरेली जिला बारिश से अछूता नहीं है जिसके चलते यहां के ज्यादातर लोग कृषि व्यवसाय पर निर्भर हैं. यह इलाका ग्रामीण लोगों के प्रभुत्व वाला है.

हनुभाई की घरवापसी को बीजेपी की उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी हर वो पैंतरे अपना रही है जो उसे लोकसभा चुनावों में जीत के करीब ले जाए. बीजेपी सधे कदमों से चाहे कांग्रेस के नेताओं को अपने पक्ष में लाना हो या अपने नेताओं को करीब लाना हो हर वह उपाय कर रही है जिससे उसे बढ़त मिले.
सौराष्ट्र इलाके में ग्रमीणों का बीजेपी के खिलाफ रुख जगजाहिर है. अब बीजेपी के लिए यह बड़ी चुनौती है कि किस तरह से ग्रामीण लोगों को अपने पक्ष में लाया जाए.

(यह भी पढ़े: सियासी कैलेंडर @1.00: गुजरात में 58 साल बाद फिर इस काम को दोहरा रहे हैं राहुल-प्रियंका-सोनिया)

3 फरवरी से कांग्रेस के चार विधायक- जवाहर चावड़ा (मानवधर), परसोतम साबरिया (ध्रंगधढ़ ), वल्लभ धारविया (जामनगर ग्रामीण) और आशाबेन पटेल (ऊंझा) बीजेपी में शामिल हुए हैं.

इससे पहले बीजेपी में कांग्रेस के दिग्गज नेता और जसदान विधायक कुंवरजी बावलिया पिछले साल जुलाई में पार्टी में शामिल हुए थे. उन्होंने भाजपा के टिकट पर जसदान उपचुनाव जीता था और अब रूपानी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. जसदान सीट राजकोट लोकसभा क्षेत्र में आती है. बावलिया सौराष्ट्र क्षेत्र में संख्यात्मक रूप से शक्तिशाली कोली (ओबीसी) समुदाय से आते हैं. उनकी एंट्री से 2019 के चुनावों में भाजपा की ग्रामीण बढ़त निश्चित तौर पर मजबूत होगी.

राहुल गांधी के दाहिने हाथ-परेश धनानी के लिए यह चुनाव एक लिटमस टेस्ट की तरह होगा. बीजेपी में गए 'अपनों' के साथ होने वाली लड़ाई में उन्हें किस तरह से जीत मिलती है या नहीं.
एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 14, 2019, 6:54 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...