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बीएस येडियुरप्पा के कैबिनेट विस्तार से BJP नेता भड़के, बोले- CM को ब्लैकमेल किया गया

बीएस येडियुरप्पा (फाइल फोटो)
बीएस येडियुरप्पा (फाइल फोटो)

Karnataka Politics: कर्नाटक सरकार में एक्साइज मंत्री एच नागेश ने सत्ता को सीधी धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें पद से हटाया गया, तो उनका समुदाय विद्रोह करेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 5:22 PM IST
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बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर जारी सियासी ड्रामे पर बुधवार को विराम लग गया. राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने 7 नामों को शामिल करने की तैयारी कर ली है. इसी बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों में असंतोष पैदा हो गया है. पार्टी के भीतर कई नेताओं ने बगावती सुर अपना लिए हैं. नेता मुख्यमंत्री पर वादा तोड़ने के आरोप लगा रहे हैं.

सीएम पर गंभीर आरोप
अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रिमंडल में जगह बनाने में असफल रहे एमएलसी विश्वनाथ ने सीएम पर अपना वादा तोड़ने का आरोप लगाया है. वहीं, एक अन्य बागी बीजेपी विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने दावा किया है कि येडियुरप्पा को ब्लैकमेल किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आज शपथ लेने जा रहे कम से कम 3 नेताओं ने सीएम को ब्लैकमेल किया है.

यह भी पढ़ें: कर्नाटक: येडियुरप्पा कैबिनेट में सात मंत्री आज करेंगे शपथ ग्रहण, एक सीट रखी जाएगी खाली
यतनाल के अनुसार, मुख्यमंत्री लिंगायत मठों को पैसा भी बांट रहे थे, ताकि अगर उन्हें अपना पद छोड़ना पड़े, तो वे लोग केंद्र के खिलाफ बगावत कर सकें. कर्नाटक सरकार में एक्साइज मंत्री एच नागेश ने सत्ता को सीधी धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें पद से हटाया गया, तो उनका समुदाय विद्रोह करेगा. खास बात है कि इस मंत्री पर बीते साल दिसंबर में एक तबादले के बदले 1 करोड़ रुपये की घूस के आरोप लगे थे. इस पर उन्होंने कहा था कि दलित होने के चलते उन्हें निशाना बनाया गया है.



कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 24 लोगों का नाम सामने आ रहा था, जिसमें से 7 लोगों को जगह मिली है. सरकार ने कैबिनेट में एक सीट को खाली छोड़े जाने का फैसला किया है. इन सात लोगों में उमेश कट्टी, अरविंद लिंबावल्ली, मुरुगेश निरानी, सीपी योगेश्वर, एस अंगारा, एमटीबी नागराजू और आर शंकर का नाम शामिल है. खास बात है कि कैबिनेट विस्तार को लेकर किए इस फैसले के साथ उन अटकलों पर विराम लग जाएगा, जिनमें सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए जा रहे थे.
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