आचार संहिता मामले पर रोते हुए बच्चे की तरह बर्ताव न करे कांग्रेस: जेटली

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मंगलवार को कहा कि आदर्श आचार संहिता के कारण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है.

News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 3:21 AM IST
आचार संहिता मामले पर रोते हुए बच्चे की तरह बर्ताव न करे कांग्रेस: जेटली
फोटो-ANI
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Updated: May 8, 2019, 3:21 AM IST
देश के वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने एक बार फिर से कांग्रेस पर तंज कसा है. जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा है, 'कांग्रेस बार-बार आचार संहिता के उल्लंघन की बात करना अब बंद कर दे. वो इस मामले पर किसी रोते हुए बच्चे की तरह बर्ताव करना भी बंद कर दे. आदर्श आचार संहिता के कारण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया जा सकता है.'

अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकता. राजनीतिक दलों ने अब नया तरीका अपना लिया है कि अपने विरोधियों के खिलाफ हर बात पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा दें.

जेटली के मुताबिक, 'आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत चुनाव आयोग से करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि एमसीसी द्वारा किसी भी तरीके से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को कम नहीं आंका जा सकता है.'

फाइल फोटो


बता दें कि अरुण जेटली ने यह बात नरेंद्र मोदी के भाषणों को लेकर चुनाव आयोग से लगातार हो रहे शिकायतों के बाद कही है. लोकसभा चुनाव 2019 में अब तक कई बार पीएम मोदी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत विरोधियों के द्वारा दर्ज की चुकी है. चुनाव आयोग की तरफ से हर बार पीएम मोदी को आचार संहिता के उल्लंघन मामले में क्लिन चिट मिलती रही है.

जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा है, 'आदर्श आचार संहिता (MCC) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संचालन के लिए चुनाव आयोग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली साधन है. एक समय था जब MCC केवल निर्देशन मात्र था. इसकी कानूनी वैघानिकता के बारे में अक्सर मुकदमे चलते रहते थे. अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन चुनाव आयोग की अगुवाई वाली पहली एनडीए सरकार ने एमसीसी को वैधानिक समर्थन देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की थी. उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ एम एस गिल और कानून मंत्रालय मैं देख रहा था.

पीएम मोदी और राहुल गांधी

जेटली ने आगे लिखा है, 'इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी एक 'क्राई बेबी’ (रोते हुए बच्चे) के रूप में है, जो एक झुंड का नेतृत्व कर रही है. अनुच्छेद 19 (1) (ए) में प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से भाषण देने का अधिकार देता है. अनुच्छेद 19(1) (ए) संविधान का एक अस्वीकार्य हिस्सा है. अनुच्छेद 19 (1) (ए) के प्रभाव को न तो संसद और न ही सर्वोच्च न्यायालय किसी भी तरह से कम कर सकता है. चुनाव के दौरान भी यह अधिकार निलंबित या कम नहीं होता है.

जेटली ने आगे लिखा है कि हालिया मामलों में पीएम पहली बार मतदाताओं से अपील की थी कि वे हमेशा वोट देते समय शहीदों के बलिदान को ध्यान में रखें. पीएम के इस भाषण में किसी पार्टी या उम्मीदवार का उल्लेख नहीं किया गया था. दूसरा मामला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा वायनाड से चुनाव लड़ने के संबंध में की गई थी. यदि इस तरह के भाषणों को MCC के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है, तो यह वास्तव में फ्री स्पीच की संवैधानिकता पर प्रश्नचिन्ह है.

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