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बीजेपी के इस नेता ने कहा- पश्चिम बंगाल में नहीं चलेगी पूरे देश में सफल रही चुनावी रणनीति

News18Hindi
Updated: November 29, 2019, 6:38 PM IST
बीजेपी के इस नेता ने कहा- पश्चिम बंगाल में नहीं चलेगी पूरे देश में सफल रही चुनावी रणनीति
बीजेपी के प्रदेश उपाध्‍यक्ष चंद्र कुमार बोस ने कहा कि पार्टी को पश्चिम बंगाल के लिए अब खास योजना बनाने पर ध्‍यान देना चाहिए.

पश्चिम बंगाल (West bengal) की तीन विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव (Bypoll) में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा. इसके बाद पार्टी के अंदर से ही आवाज उठनी शुरू हो गई है. जहां हार के बाद एक बीजेपी (BJP) प्रत्‍याशी ने एनआरसी (NRC) को हार का कारण बताया था. वहीं, आज एक बीजेपी नेता ने कहा, पार्टी को बंगाल के लिए खास रणनीति बनानी चाहिए. बीजेपी को बंगाल के लिए अलग रण‍नीति नहीं होने के कारण ही पिछले विधानसभा चुनाव से उपचुनाव में तीन गुना वोट मिलने के बाद भी हार झेलनी पड़ी.

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  • Last Updated: November 29, 2019, 6:38 PM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव (Bypolls) में बीजेपी को मिली शिकस्‍त के बाद पार्टी के अंदर से ही आवाजें उठने लगी हैं. जहां नतीजे आने के बाद कलियागंज सीट से बीजेपी प्रत्‍याशी कमल चंद्र सरकार ने अपनी हार के लिए नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) को जिम्‍मेदार बताया. वहीं, आज प्रदेश उपाध्‍यक्ष चंद्र कुमार बोस ने कहा कि बीजेपी (BJP) को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के लिए अब खास योजना बनानी चाहिए. यहां पूरे देश में सफल रही चुनावी रणनीति काम नहीं करेगी.

'NRC को नहीं बनाना चाहिए था मुख्‍य चुनावी मुद्दा'
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि विवेकानंद (Vivekanand) और नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) की धरती पर अखिल भारतीय रणनीति से काम नहीं चलेगा. नेताजी के प्रपौत्र बोस ने उपचुनाव में मिली हार के बाद आत्मविश्लेषण की अपील करते हुए कहा कि पार्टी को उपचुनाव के दौरान एनआरसी को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए था. बीजेपी के लिए यह जरूरी है कि वह राज्य में संगठन को दुरुस्त करे और बंगाल पर केंद्रित रणनीति तैयार करे. राजनीतिक दलों को राज्य में मूलभूत बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए काम करना चाहिए न कि वोट बैंक के लिए लोगों का ध्रुवीकरण करना चाहिए.

तीन गुना वोट मिलने के बाद भी तीनों सीटें हारी बीजेपी

बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस हफ्ते की शुरूआत में हुए उपचुनाव में तीनों सीटों पर जीत हासिल कर ली. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने अपनी पार्टी को मिली जीत को एनआरसी के खिलाफ जनादेश करार दिया. साथ ही धर्मनिरपेक्षता और एकता के पक्ष में आया फैसला बताया. वहीं, जिस पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में 18 सीटें जीतकर लोगों को चौंका दिया था, उसे पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले तीन गुना वोट मिलने के बाद भी उपचुनाव में तीनों सीटों पर हार झेलनी पड़ी.

उपचुनाव में बीजेपी को तीनों सीटों पर विधानसभा चुनाव 2016 के मुकाबले ज्‍यादा वोट मिले.


टीएमसी के विकल्‍प के तौर पर तेजी से उभर रही बीजेपीउपचुनाव में बीजेपी को केंद्रीय मंत्री देवाश्री चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के क्षेत्र में भी शिकस्‍त का स्‍वाद चखना पड़ा. बावजूद इसके बीजेपी का कहना है कि भले ही पार्टी तीनों सीटों पर हार गई है, लेकिन मत-प्रतिशत (Vote Share) में भारी इजाफा हुआ है. इससे बीजेपी राज्‍य में दूसरे नंबर पर आ गई है. इस आधार पर पश्चिम बंगाल में बीजेपी टीएमसी के विकल्‍प के तौर पर तेजी से उभर रही है. बता दें कि कालियागंज विधानसभा सीट पर कांटे की लड़ाई के बाद बीजेपी 2,300 वोटों से हार गई. इस सीट पर बीजेपी को विधानसभा चुनाव 2016 में 27 हजार वोट मिले. वहीं, इस बार उपचुनाव में 95 हजार से अधिक वोट मिले हैं.

'अल्‍पसंख्‍यक समुदाय ने टीएमसी को एकजुट वोट दिया'
करीमपुर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के वोटों में शानदार वृद्धि हुई है. विधानसभा चुनाव 2016 में बीजेपी को करीमपुर में 23,302 वोट मिले थे, जबकि उपचुनाव में 78 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं. कमल चंद्र सरकार ने बृहस्‍पतिवार को कहा था, 'मुझे यह नहीं कहना है कि राजवंशी समुदाय ने किसे वोट किया. लेकिन, यह साफ है कि अल्‍पसंख्‍यक समुदाय ने टीएमसी को एकजुट वोट दिया.' पार्टी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी की 18 सीट पर जीत के बाद विपक्षी वोट एकजुट हो गए. ऐसे में वोट बढ़ने के बाद भी बीजेपी उपचुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाई.

पश्चिम बंगाल बीजेपी के नेताओं का कहना है कि टीएमसी को मुस्लिमों ने एकजुट वोट किया. इस कारण बीजेपी हार गई.


'विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी से उम्‍मीद लगा रहे लोग'
करीमपुर सीट पर टीएमसी को विधानसभा चुनाव 2016 के मुकाबले उपचुनाव में 10 हजार वोट ज्‍यादा मिले, जबकि बीजेपी को 55 हजार वोट ज्‍यादा मिले. बावजूद इसके बीजेपी को हार नसीब हुई. बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव रितेश तिवारी ने कहा कि अकसर उपचुनाव में सत्तारूढ़ दल की ही जीत होती है. कालियागंज सीट पर सिर्फ दो हजार वोटों से ही तृणमूल कांग्रेस जीत पाई. साफ है कि राज्य में विधानसभा चुनाव में भी जनता बीजेपी से उम्‍मीद लगा रही है. कलियागंज सीट जिस रायगंज लोकसभा क्षेत्र में आती है, उसमें मुस्लिम आबादी बहुमत में है. कहा जाता है कि लोकसभा चुनाव में माकपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोट बंट गया था. उपचुनाव में कलियागंज सीट पर मुस्लिम वोट एकजुट होने के कारण बीजेपी हार गई.

कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष ने लगाई थी सेंध
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2016 में कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली खड़गपुर सीट पर दिलीप घोष ने बीजेपी को जीत दिलाई थी. इस बार उपचुनाव में 20 हजार से अधिक वोटों से बीजेपी को हार झेलनी पड़ी. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 45 हजार वोटों की बढ़त मिली थी. बता दें कि खड़गपुर से बीजेपी विधायक दिलीप घोष और करीमपुर से तृणमूल विधायक महुआ मित्रा के 2019 में सांसद बनने के कारण उपचुनाव हुआ. वहीं, कांग्रेस विधायक प्रमथनाथ राय के निधन के कारण कालियागंज सीट पर उपचुनाव कराया गया था.

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First published: November 29, 2019, 6:38 PM IST
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