Exclusive: असम NRC पर बोले हिमंत बिस्वा सरमा- सारे मूल निवासियों को जगह दिलाने तक जारी रहेगी प्रक्रिया

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Updated: September 1, 2019, 9:42 AM IST
Exclusive: असम NRC पर बोले  हिमंत बिस्वा सरमा- सारे मूल निवासियों को जगह दिलाने तक जारी रहेगी प्रक्रिया
हिमंत बिस्व सरमा ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में सूची में शामिल कम से कम 20 फीसदी लोगों का रिवेरिफिकेशन कराए.

पूर्वोत्तर में एनडीए नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए- NEDA) के संयोजक हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में सूची में शामिल कम से कम 20 फीसदी लोगों का रिवेरिफिकेशन कराए.

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मारिया शकील

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन  (National Register of Citizens of India NRC) जारी होने के बाद असम के वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्वा सरमा (himanta biswa sarma) ने कहा कि 'अपडेट करने का प्रॉसेस बेकार की कवायद नहीं है.'

News18 को दिए एक इंटरव्यू में सरमा ने कहा कि 'यह हमारे लिए मिला जुला रहा है. शरणार्थियों के तौर पर साल 1971 के बाद आए लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा ... हम उनके साथ सहानुभूति रखते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्होंने NRC प्रक्रिया में हेरफेर किया है और हम इस पर गौर करेंगे.'

पूर्वोत्तर में एनडीए नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए- NEDA) के संयोजक सरमा ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में सूची में शामिल कम से कम 20 फीसदी लोगों का रिवेरिफिकेशन कराए और असम के बाकी जिलों में 10 फीसदी. उन्होंने कहा, 'SC ने NRC कोआर्डिनेटिंग पर अपना भरोसा दोहराया है ... संघ और राज्य सरकारों ने शीर्ष अदालत को बताया है कि कुछ के रि वेरीफिकेशन की जरूरत है.'

फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तारी के बारे में सरमा ने कहा,'एनआरसी समन्वयक ने नकली दस्तावेज का मुकाबला करने के लिए लेगसी डेटा प्रॉसेस का पालन किया है ... हमने कुछ लोगों को नकली दस्तावेजों के लिए गिरफ्तार भी किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी प्रक्रिया को दोबारा दोहराने की जरूरत है.'

जनसांख्यिकी में हुआ बदलाव
जनसांख्यिकी में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर, सरमा ने कहा, 'कोई मिथक नहीं है ... यदि आप धार्मिक जनगणना के आंकड़ें देखे, तो आप पाएंगे कि जनसांख्यिकी में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है ... हम कुछ अवैध का पता लगाने में कामयाब रहे हैं और हम खोज को जारी रखेंगे. यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक असम के प्रत्येक स्वदेशी लोग को अपनी जगह नहीं मिल जाएगी ... हमने 14-15 लाख विदेशियों का पता लगाया है ... यह साबित हो गया है ... ममता बनर्जी का क्या कहना है, इसका संज्ञान हम नहीं ले रहे हैं. अवैध विदेशी उनके वोट बैंक हैं.'
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पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस के सुप्रीमो ने कहा कि 'NRCविफलता' ने उन सभी लोगों को बेनकाब कर दिया जिन्होंने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की.

मानवाधिकारों के उल्लंघन के संबंध में, वरिष्ठ भाजपा नेता ने आश्वासन दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा और किसी को हिरासत में नहीं लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 'किसी भी मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा ... हम बांग्लादेश से संपर्क करेंगे और उन्हें अपने लोगों को वापस ले जाने के लिए कहेंगे, लेकिन उस दौरान हम उन्हें वोट देने और कुछ निश्चित सुविधाएं देने की अनुमति नहीं देंगे.'

 NRC में नाम न होने से नहीं घोषित होंगे विदेशी
इसके अलावा, उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश सरकार भारत की एक मित्र है और वे हमारे साथ सहयोग कर रहे हैं...जब हमने अवैध आप्रवासन के मामले पेश किए तो वे अक्सर अपने लोगों को वापस ले रहे हैं हैं. संख्या अधिक नहीं है, लेकिन अब हमारे पास उनकी पहचान करने के लिए एक प्रक्रिया होगी.'

सरमा ने कहा कि 'सिर्फ इसलिए कि लोगों का नाम NRC में नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें विदेशी कहा जाएगा और बांग्लादेश भेजा जाएगा. एक कानूनी प्रक्रिया है, जो उन्हें उनके मामले में मदद करेगी, लेकिन तब तक, उन्हें देश की राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.'

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First published: September 1, 2019, 8:59 AM IST
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