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बिहार में जाति जनगणना पर बयानबाजी तेज, BJP MLC बोले- गरीबों की गिनती की जरूरत

संजय पासवान ने जातिगत राजनीति को लेकर कही बात. (File pic)

संजय पासवान ने जातिगत राजनीति को लेकर कही बात. (File pic)

Caste Politics in Bihar: बीजेपी एमएलसी संजय पासवान (Sanjay Paswan) ने कहा कि पहले हमें यह मापदंड बनाना चाहिए कि कौन गरीब है. फिर उन्‍हें जाति और धर्म आधार पर गिना जाए.

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    नई दिल्‍ली. बिहार में जातिगत जनगणना (Caste Census) को लेकर राजनीति गरम है. अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के एमएलसी संजय पासवान (Sanjay Paswan) ने विपक्ष और समाजवादी विचारधारा की पार्टियों पर कोटा पॉलिटिक्‍स करने का आरोप लगाया है. मंगलवार को उन्‍होंने कहा कि इस समय गरीबों की जनगणना करने की जरूरत है ना कि जातिगत जनगणना. उनका यह बयान तब आया है जब जनता दल (यूनाइटेड) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ललन सिंह के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से सोमवार को मुलाकात की थी. साथ ही बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार भी यह कह चुके हैं कि इस मुद्दे पर वह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को तैयार हैं.

    संजय पासवान ने इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा कि विपक्ष और समाजवादी दल आरक्षण वाली राजनीति करने को लेकर उत्‍साहित हैं. बीजेपी ने ईडब्‍ल्‍यूएस को 10 फीसदी कोटा देकर आरक्षण की राजनीति को खत्‍म किया है, जो लोग जातिगत आधारित जनगणना चाह रहे हैं, वे संभवत: बड़ी संख्या में ओबीसी और ईबीसी की ओर देख रहे हैं, ताकि वे आरक्षण की राजनीति में थोड़ा और शामिल हो सकें.

    पासवान ने कहा कि पहले हमें यह मापदंड बनाना चाहिए कि कौन गरीब है. फिर उन्‍हें जाति और धर्म के आधार पर गिना जाए. यहां जातिगत जनगणना की कोई जरूरत नहीं है. चूंकि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए जनगणना है तो इसका मतलब यह नहीं है कि सभी जातियों को गिनने की जरूरत है.

    हालांकि, पासवान ने जातिगत जनगणना के सामाजिक कलह पैदा करने के खतरे से भरे होने पर अपनी पार्टी के सहयोगियों से असहमति जताई. उन्होंने कहा, ‘मैं इस तरह के विचारों का समर्थन नहीं करता. मैं केवल यह कहने की कोशिश कर रहा हूं कि हमें पहले गरीबी को परिभाषित करने के बाद गरीबों को गिनने की जरूरत है.’

    बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि वह जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगेंगे. जद(यू) नेता ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी और केंद्र सरकार का नेतृत्व करने वाली बीजेपी द्वारा अपनाए गए अलग-अलग रुख गठबंधन को प्रभावित नहीं करेंगे.

    नीतीश कुमार ने कहा था, ‘कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा (गठबंधन पर). बिहार में द्विसदनीय विधानमंडल ने जाति-आधारित जनगणना के समर्थन में दो बार प्रस्ताव पारित किए हैं. दोनों मौकों पर सभी पार्टियों ने इसके पक्ष में मतदान किया है.’

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