कृषि विधेयक पर BJP का कांग्रेस पर निशाना, कहा- उनके लिए किसान बस एक वोटबैंक

भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर बोला हमला.
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर बोला हमला.

बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव (Bhupender yadav) ने कहा कि यह उसी प्रकार का झूठ है, जो कांग्रेस ने सीएए और एनआरसी के दौरान बोला था. वे लोगों को गुमराह करना चाहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 1:47 PM IST
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नई दिल्‍ली. किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्‍तावित कृषि विधेयकों (Farm Bills) को रविवार को राज्‍यसभा (Rajya sabha) में पेश किया गया. इस दौरान हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस ने कृषि विधेयक को किसानों को डेथ वारंट तक करार दिया. इसके बाद बीजेपी की ओर से भी कांग्रेस पर हमले किए गए. बीजेपी (BJP) सांसद भूपेंद्र यादव (Bhupender Yadav) ने इस दौरान कांग्रेस (Congress) पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके लिए किसान सिर्फ एक वोटबैंक हैं. हमारे लिए किसान समाज का विकास करने वाला है. हम सच्चाई के साथ हैं. एमएसपी को हटाने का कोई निर्णय नहीं है. उन्‍होंने कहा कि हम इस झूठ को 2024 तक 8 बार उजागर करेंगे.

बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह उसी प्रकार का झूठ है, जो कांग्रेस ने सीएए और एनआरसी के दौरान बोला था. वे लोगों को गुमराह करना चाहते हैं. बीजेपी के भूपेंद्र यादव ने कहा कि इन दोनों विधेयकों की परिस्थिति पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आजादी के समय शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय का अनुपात 2:1 (दो अनुपात एक) था जो अब 7:1 (सात अनुपात एक) हो गया है. उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्यों हो गया ?

उन्होंने कहा कि किसान 70 साल से न्याय के लिए तरस रहे हैं और ये विधेयक कृषि क्षेत्र के सबसे बड़े सुधार हैं. उन्होंने कहा कि दोनों विधेयकों से किसानों को डिजिटल ताकत मिलेगी और उन्हें उनकी उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी. इसके अलावा उन्हें बेहतर बाजार मिल सकेगा और मूल्य संवर्धन भी हो सकेगा.







यादव ने कहा कि भारत में इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बाद भी पांच प्रतिशत उत्पादन का खाद्य प्रसंस्करण हो पाता है. इसके अलावा विश्व व्यापार में भी हमारी हिस्सेदारी कम है. उन्होंने कहा कि जीडीपी में कृषि का योगदान 12 प्रतिशत का है और करीब 50 प्रतिशत आबादी सीधे तौर पर खेती पर आश्रित है. उन्होंने कहा कि 2010 में संप्रग सरकार के कार्यकाल में एक कार्यकारी समूह का गठन किया गया था और उसकी रिपोर्ट में अनुशंसा की गयी थी कि किसानों के पास विपणन का विकल्प होना चाहिए. उसी रिपोर्ट में कहा गया था कि किसानों के लिए बाजार प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.

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यादव ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है और किसानों को रोकना चाहती है. उन्होंने इस आशंका को दूर करने का प्रयास किया कि एमएसपी समाप्त हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है और इन विधेयकों का मकसद एकाधिकारी प्रवृति को समाप्त करना है.

सपा के रामगोपाल यादव ने कहा 'ऐसा लगता है कि कोई मजबूरी है जिसके कारण सरकार जल्दबाजी में है.' उन्होंने कहा 'दोनों महत्वपूर्ण विधेयक हैं और इन्हें लाने से पहले सरकार को विपक्ष के नेताओं, तमाम किसान संगठनों से बात करनी चाहिए थी. लेकिन उसने किसी से कोई बातचीत नहीं की. सरकार ने भाजपा से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ तक से बातचीत नहीं की.' यादव ने सवाल किया कि किसान अपनी फसल बेचने कहां जाएगा? उन्होंने कहा कि अभी राज्यों को मंडियों से पैसा मिलता है लेकिन प्रस्तावित स्थिति में राज्य को पैसे नहीं मिलेंगे, ऐसे में राज्यों की क्षतिपूर्ति कैसे की जाएगी ? इसका आकलन करने के लिए कोई प्रणाली भी नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक किसान विरोधी हैं.
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