शीला दीक्षित के निधन की खबर सुन भावुक हुए मनोज तिवारी, कहा- वे मेरी मां जैसी थीं

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि 'मैं हैरान हूं. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि शीला जी हमारे साथ नहीं हैं. पार्टी ने सभी कार्यक्रम रद्द करने का फैसला किया है. मैंने शीला जी से मुलाकात की थी.'

News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 8:14 AM IST
शीला दीक्षित के निधन की खबर सुन भावुक हुए मनोज तिवारी, कहा- वे मेरी मां जैसी थीं
शीला दीक्षित को याद करते हुए मनोज तिवारी भावुक हो गए.
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Updated: July 21, 2019, 8:14 AM IST
शीला दीक्षित के निधन की खबर सुन भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि मैंने हाल ही में उनसे मुलाकात की थी. उन्होंने (शीला) मेरा स्वागत एक मां की तरह किया था. दिल्ली उन्हें याद करेगी. ईश्वर उनके परिवार और करीबियों को यह दुख सहने करने की शक्ति दे.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार को एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया.  शीला 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं.

तिवारी ने कहा, 'मैं हैरान हूं. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि शीला जी हमारे साथ नहीं हैं. उनके निधन की खबर मिलते ही पार्टी ने सभी कार्यक्रम रद्द करने का फैसला किया है.'

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नेताओं ने किए अंतिम दर्शन
शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर को उनके निजामुद्दीन स्थित निवास पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया है. जहां पार्टी के नेताओं के अलावा सभी दलों के नेताओं ने उनके अंतिम दर्शन किए. दिल्ली सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान स्वरूप राष्ट्रीय राजधानी में दो दिन का शोक घोषित किया. रविवार को निगमबोध घाट पर उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके आवास पर गए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.


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यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, और कई अन्य नेताओं ने बीजेपी के विजय गोयल और माकपा नेताओं सीताराम येचुरी और बृंदा करात के अलावा उनके आवास पर जाकर उनके अंतिम दर्शन किए. मोदी ने उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के 'परिवर्तनकारी बदलाव' को याद किया. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने उन्हें एक अच्छा प्रशासक करार दिया. मोदी ने कहा कि शीला ने दिल्ली के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया.

15 साल तक रहीं सीएम

साल 1998, 2003 और 2008 में लगातार तीन बार जीत के लिए अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने वाली सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली महिला मुख्यमंत्री के रूप में दीक्षित ने एक सर्वांगीण विकास के युग की शुरुआत की जिसने दिल्ली को विश्व स्तर की राजधानी में बदल दिया. साल 1938 में पंजाब के कपूरथला में एक गैर-राजनीतिक परिवार में जन्मीं दीक्षित ने अपनी स्कूली शिक्षा राजधानी के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से की और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से स्नातक किया.



उन्होंने जुलाई 1962 में नौकरशाह विनोद दीक्षित से शादी की, जिनके पिता उमा शंकर दीक्षित, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के काफी करीबी थे और 1971 में इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में एक मंत्री के रूप में सेवा की और बाद में कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने.

वह हाल ही में उत्तर-पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ीं. उन्होंने दिल्ली विधानसभा में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. दीक्षित 1984 में उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बनी थीं. वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी सहयोगी और उनके मंत्रिमंडल में मंत्री भी थीं. उन्होंने केरल के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया.

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First published: July 21, 2019, 2:36 AM IST
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