कांग्रेस ने लद्दाख को नहीं दी तवज्जो, इसीलिए डेमचोक में घुसा चीन: भाजपा सांसद नामग्याल

भाषा
Updated: August 18, 2019, 11:19 PM IST
कांग्रेस ने लद्दाख को नहीं दी तवज्जो, इसीलिए डेमचोक में घुसा चीन: भाजपा सांसद नामग्याल
लद्दाख से भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल का मानना है कि कांग्रेस के शासन में इस क्षेत्र को रक्षा नीतियों में उचित तवज्जो नहीं दी गई (फाइल फोटो)

लद्दाख (Ladakh) से भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल (Jamyang Tsering Namgyal) का मानना है कि कांग्रेस की सरकार (Congress Government) में इस क्षेत्र को रक्षा नीतियों में उचित तवज्जो नहीं दी गई और इसलिए ‘‘चीन ने डेमचोक सेक्टर के उसके इलाके तक कब्जा कर लिया.’’

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संसद में अनुच्छेद 370 (Article 370) पर अपने जोशीले भाषण से चर्चा में आए लद्दाख (Ladakh) से भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल (Jamyang Tsering Namgyal) का मानना है कि कांग्रेस के शासन (Congress Government) में इस क्षेत्र को रक्षा नीतियों में उचित तवज्जो नहीं दी गई और इसलिए ‘‘चीन ने डेमचोक सेक्टर के उसके इलाके तक कब्जा कर लिया.’’

पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए सांसद ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकारों ने शत्रुतापूर्ण स्थितियों में ‘‘तुष्टीकरण’’ की नीति का पालन करके कश्मीर को बर्बाद कर दिया और लद्दाख को भी काफी क्षति पहुंचाई.

'लागू करने के दौरान नेहरू की फॉरवर्ड पॉलिसी बनी बैकवर्ड पॉलिसी'
भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने ‘फॉरवर्ड पॉलिसी’ अपनाई जिसमें कहा गया कि हमें एक-एक इंच चीन की ओर बढ़ना चाहिए. इसके कार्यान्वयन के दौरान यह ‘बैकवर्ड पॉलिसी’ बन गई. चीनी सेना लगातार हमारे क्षेत्र में घुसपैठ करती चली गई और हम लगातार पीछे हटते चले गए.’’

34 वर्षीय सांसद ने कहा, ‘‘यही वजह है कि अक्साई चीन पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान डेमचोक ‘नाला’ तक पहुंच गए क्योंकि लद्दाख को कांग्रेस के 55 वर्षों के शासन में रक्षा नीतियों में उचित तवज्जो नहीं मिली.’’ गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में चीन और भारत की सेनाओं के बीच तब गतिरोध पैदा हो गया था जब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने डेमचोक के पास भारत के अपने ही क्षेत्र में ‘नाला’ या नहर बनाने पर आपत्ति जताई थी.

'अब लद्दाख को मिलेगा उचित महत्व'
इस साल जुलाई में चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार कर गई और डेमचोक सेक्टर में घुस गई. इससे पहले कुछ तिब्बतियों ने दलाई लामा के जन्मदिन के मौके पर तिब्बत (Tibet) के झंडे लहराए थे. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बाद में कहा था, ‘‘कोई घुसपैठ नहीं हुई. चीनी आए और उन्होंने अपनी मानी हुई वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त की.’’ यह पूछे जाने पर कि लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने से रक्षा के परिप्रेक्ष्य से कैसे चीजें बदलेंगी, इस पर नामग्याल ने कहा कि क्षेत्र को अब अपनी उचित महत्ता मिलेगी.
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'शहर जैसी सुविधाएं आने के बाद सुरक्षित बनेंगीं सीमाएं'
भारतीय जनता पार्टी के सांसद ने कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित की गई पुनर्वास परियोजना के क्रियान्वयन से सीमा पर गांवों से पलायन खत्म होगा. उन्होंने कहा, ‘‘जब नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में इन इलाकों में सड़कों, संपर्क, स्कूल और अस्पताल समेत शहर जैसी सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी तो सीमाएं सुरक्षित बन जाएंगी.’’

'कांग्रेस ने किया जम्मू-कश्मीर को बर्बाद और लद्दाख को पहुंचाई क्षति'
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (Jammu-Kashmir) विधेयक पर एक पखवाड़े पहले लोकसभा में अपने भाषण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से तारीफ बटोरने वाले नामग्याल ने कहा कि कांग्रेस ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर गलती की थी. उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा जब भी कश्मीर में हालात बिगड़े तो उसने तुष्टीकरण की नीति अपनायी. वह कभी उससे सख्ती से नहीं निपटी.’’

नामग्याल ने यह भी कहा, ‘‘जब भी कश्मीर में हालात बिगड़ते हैं कांग्रेस विशेष पैकेज की घोषणा करके आक्रोश को शांत करने की कोशिश करती. उसने पथराव करने वालों को खुश किया और अलगाववादियों को संरक्षण दिया. न उसकी नीति अच्छी थी और न ही मंशा. उसने कश्मीर को बर्बाद कर दिया और लद्दाख को भी काफी क्षति पहुंचाई.’’

'लद्दाखी छात्रों को तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा करने में लग जाते हैं पांच साल'
लद्दाख के सांसद ने अनुच्छेद 370 (Article 370) के लगभग सभी प्रावधानों को हटाने के बाद कश्मीर में स्थिति पर केंद्र पर हमला करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके जैसा व्यक्ति ‘‘अपनी कुर्सी बचाने के लिए’’ कुछ भी कह सकता है. नामग्याल ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने 55 वर्षों तक शासन किया लेकिन वह इतना साहसी कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पायी. अब वे इसे बेवकूफी बता रहे हैं.’’

कश्मीर के साथ रहने से लद्दाख को हुए नुकसान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास यहां एक डिग्री कॉलेज है जो कश्मीर विश्वविद्यालय के तहत आता है. अगर किसी नाम में गलती भी होती है तो छात्र को इसे सही कराने के लिए श्रीनगर जाना पड़ता है. अगर कश्मीर में दिक्कत है तो लद्दाखी छात्र को तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा करने में पांच साल लग जाते हैं.’’

'बाहर के लोगों के जमीन खरीदने और पर्यावरण के बर्बाद होने जैसी कोई चीज नहीं होगी'
उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख के किसी सरकारी अधिकारी का तबादला या पदोन्नति होती है तो उस कर्मचारी को फाइल आगे बढ़ाने के अनुरोध के लिए श्रीनगर या जम्मू जाना पड़ता था. उन्होंने आरोप लगाया कि बोधी भाषा के लिए शिक्षकों के पदों को कश्मीरी भाषा के शिक्षकों के पदों में परिवर्तित कर दिया गया.

लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के भविष्य पर नामग्याल ने कहा, ‘‘गृह मंत्री ने संसद में कहा है. एलएएचडीसी (LAHDC) बकरार रहेगी. लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.’’ स्थानीय लोगों की इन आशंकाओं पर कि बाहरी लोग जमीन खरीदेंगे और लद्दाख के पर्यावरण को बर्बाद कर देंगे, इस पर भाजपा सांसद ने लोगों को आश्वासन दिया कि ऐसी कोई चीज नहीं होगी.

छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को एक आदिवासी क्षेत्र घोषित करने का किया अनुरोध
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग कह रहे हैं कि बड़ी मछलियां (बाहरी लोग) छोटी मछलियों को खा जाएंगी. लद्दाख की भूमि उसके लोगों की है. लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कानून, 1997 के अनुसार भूमि से संबंधित मामले एलएएचडीसी (LAHDC) के तहत आते हैं.’’

नामग्याल ने कहा कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि लद्दाख में कई सेक्टर ऐसे हैं जिनकी संभावनाओं को अभी तक तलाशा नहीं गया है और वहां निवेश से रोजगार पैदा होगा. उन्होंने केंद्र से लद्दाख की भूमि, संस्कृति और पहचान की रक्षा करने के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत उसे एक आदिवासी क्षेत्र घोषित करने का अनुरोध किया.

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First published: August 18, 2019, 6:31 PM IST
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