राज्यसभा में बीजेपी सांसद ने कहा- महिलाओं का फिगर पुलिस की ड्रेस के मुताबिक नहीं

वत्स ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद महिलाकर्मियों की सहूलियत और कामकाज को गरिमामय बनाने का सुझाव देना था.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 3:36 AM IST
राज्यसभा में बीजेपी सांसद ने कहा- महिलाओं का फिगर पुलिस की ड्रेस के मुताबिक नहीं
वत्स ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद महिलाकर्मियों की सहूलियत और कामकाज को गरिमामय बनाने का सुझाव देना था.
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Updated: July 31, 2019, 3:36 AM IST
राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य डी पी वत्स ने मंगलवार को राज्य सभा में शून्य काल के दौरान पुलिस एवं फौज में तैनात महिलाकर्मियों की वर्दी को उनके काम के लिहाज से असुविधाजनक बताते हुये इसमें बदलाव करने की मांग की.

वत्स ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुये कहा कि सुरक्षा सेवा में महिलाकर्मियों को पेंट, बेल्ट और शर्ट पहनना पड़ती है. साथ ही शर्ट को पेंट और बेल्ट के भीतर दबाना होता है. यह बेहद असुविधाजनक होती है खासकर गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद. महिलाकर्मियों को इस प्रकार की वर्दी पहनने से खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

वत्स ने हालांकि भारतीय महिलाओं की ‘कदकाठी’ को इस ड्रेस के मुताबिक नहीं होने की भी दलील दी. इस पर कुछ विपक्षी दलों की महिला सांसदों ने आपत्ति दर्ज करायी.

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सभापति ने खारिज की आपत्ति

सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस आपत्ति को यह कहकर खारिज कर दिया कि शून्य काल में किसी सदस्य द्वारा उठाये गये मुद्दे पर सदस्य अपनी सहमति और असहमति दर्ज करा सकते हैं लेकिन किसी सदस्य को उनकी मर्जी के मुताबिक बोलने के लिये निर्देश नहीं दे सकते हैं.

वत्स ने सरकार को महिलाओं की गरिमा और कामकाज की सहूलियत के अनुरुप वर्दी के तौर पर में सफारी सूट या सलवार कमीज पहनने का विकल्प देने का सुझाव दिया. उन्होंने विशेष सुरक्षा बल (एसपीजी) और संसद की सुरक्षा में तैनात महिलाकर्मियों की ड्रेस में सफारी सूट होने को बेहतर उदाहरण बताया.
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वत्स ने कहा- 

वत्स ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम में बेटियों के कामकाज को गरिमामय और सहूलियत भरा बनाने का सुझाव देते हुये कहा कि यद्यपि सैन्यबलों ने महिलाकर्मियों को साड़ी का विकल्प मुहैया कराया है लेकिन उनका मानना है कि परेड के लिहाज से असुविधाजनक हो सकता है.

वत्स ने कहा कि महिलाकर्मियों की कदकाठी को मौजूदा वर्दी के लिहाज से उपयुक्त नहीं बताये जाने के बयान से अगर किसी सदस्य की भावनायें आहत हुयी हों तो वह इसके लिये खेद व्यक्त करते है. वत्स ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद महिलाकर्मियों की सहूलियत और कामकाज को गरिमामय बनाने का सुझाव देना था.

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First published: July 31, 2019, 3:33 AM IST
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