बीजेपी सांसद ने फिर कहा- मानव, बंदर नहीं ऋषियों के वंशज, विपक्ष ने कहा- यह संविधान का विरोध

जब सत्यपाल सिंह मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे, तो उन्होंने कहा था कि वह खुद को बंदरों का वंशज नहीं मानते हैं.

News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 6:54 AM IST
बीजेपी सांसद ने फिर कहा- मानव, बंदर नहीं ऋषियों के वंशज, विपक्ष ने कहा- यह संविधान का विरोध
जब सत्यपाल सिंह मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे, तो उन्होंने कहा था कि वह खुद को बंदरों का वंशज नहीं मानते हैं.
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Updated: July 20, 2019, 6:54 AM IST
भारतीय जनता पार्टी के सांसद सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को डार्विन के विकास के सिद्धांत पर फिर से सवाल उठाते हुए कहा कि मानव ऋषि के वंशज हैं न कि ब्रिटिश वैज्ञानिक द्वारा बताए गए बंदर के. सिंह ने प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स (अमेंडमेंट) बिल, 2019 पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा से ही मानव को महत्व दिया है.

उन्होंने कहा कि 'यह हमारा विश्वास है कि हम ऋषियों (संतों) के वंशज हैं.' उनकी टिप्पणी ने विपक्ष ने तीखे पलटवार किए.उत्तर प्रदेश के बागपत से बीजेपी सांसद ने पहले भी डार्विन के सिद्धांत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह 'वैज्ञानिक रूप से गलत है.'

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पहले भी कह चुके हैं सत्यपाल सिंह यही बात- 

जब वह मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे, तो उन्होंने कहा था कि वह खुद को बंदरों का वंशज नहीं मानते हैं. सिंह ने डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने वाले स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम को बदलने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था.

 DMK सांसद कनिमोझी ने कहा- 

सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, DMK सांसद कनिमोझी ने कहा, 'दुर्भाग्य से, मेरे पूर्वज ऋषि नहीं हैं. मेरे पूर्वज होमो सेपियंस हैं, जैसा कि विज्ञान कहता है, और मेरे माता-पिता शूद्र हैं.'
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उन्होंने कहा कि 'वे किसी भगवान, या किसी भगवान के अंश से भी पैदा नहीं हुए थे. वे बाहर पैदा हुए थे और मैं यहाँ हूँ और मेरे राज्य के कई लोग सामाजिक न्याय आंदोलन और मानवाधिकारों के कारण यहाँ हैं जो हमने आज तक लड़े और हमने वह ऐसा करना जारी रखेगी.'

सिंह के तर्क का विरोध करते हुए, टीएमसी सांसद सुगाता रॉय ने कहा कि टिप्पणी संविधान का विरोध है. रॉय ने कहा 'संविधान का अनुच्छेद 51 (ए), उप-धारा (एच) कहता है कि यह भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद और जांच और सुधार की भावना विकसित करे. सत्यपाल जी ने जो कहा है, वह यह है कि हम बंदरों से विकसित नहीं हुए हैं. वह डार्विन के विकास के सिद्धांत को नकार रहे हैं.'

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First published: July 20, 2019, 6:47 AM IST
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