भाजपा ने नामांकन वापस लेने के लिए 15 लाख रुपये की पेशकश की: के. सुरेंद्रन के हमनाम का दावा

2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों के नामों में समानता के कारण निर्दलीय उम्मीदवार सुंदर को 467 वोट मिले थे (सांकेतिक तस्वीर)

2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों के नामों में समानता के कारण निर्दलीय उम्मीदवार सुंदर को 467 वोट मिले थे (सांकेतिक तस्वीर)

2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों के नामों में समानता के कारण निर्दलीय उम्मीदवार सुंदर को 467 वोट मिले थे. इस चुनाव में सुरेंद्रन आईयूएमएल के उम्मीदवार पी. बी. अब्दुल रज्जाक से 80 वोटों से हार गए थे.

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कसारगोड. राज्य में छह अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में काले धन (Black Money) के इस्तेमाल के आरोपों में घिरी भाजपा की केरल इकाई शनिवार को उस समय फिर विवादों में आ गई जब एक उम्मीदवार ने दावा किया कि उसे भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख के़ सुरेंद्रन के खिलाफ नामांकन वापस लेने के लिए 15 लाख रुपये की पेशकश की गई थी. भाजपा ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि यह पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र है.

सुरेंद्रन के हमनाम कसारगोड जिले के मंजेश्वरम विधानसभा क्षेत्र से बसपा के उम्मीदवार के. सुंदर ने 22 मार्च को नामांकन पत्र वापस ले लिया था. बहरहाल, सुरेंद्रन चुनाव हार गए थे. 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों के नामों में समानता के कारण निर्दलीय उम्मीदवार सुंदर को 467 वोट मिले थे. इस चुनाव में सुरेंद्रन आईयूएमएल के उम्मीदवार पी. बी. अब्दुल रज्जाक से 80 वोटों से हार गए थे.

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सुंदर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा नेताओं ने मुझसे उम्मीदवारी वापस लेने के लिए कहा. मैंने 15 लाख रुपये की मांग की लेकिन उन्होंने केवल ढाई लाख रुपये और 15 हजार रुपये का एक मोबाइल फोन दिया. सीट जीतने पर मैंने उनसे कर्नाटक में शराब की एक दुकान आवंटित करने की मांग की थी. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन्होंने मुझे फोन तक नहीं किया.’’
भाजपा ने किया आरोपों से इंकार

उम्मीदवारी वापस लेने के अलावा सुंदर भाजपा में शामिल हो गए. मंजेश्वरम विधानसभा उन सीटों में शामिल थी जहां भाजपा को केरल में जीत की उम्मीद थी. बहरहाल, भाजपा ने आरोपों से इंकार किया.

भाजपा के जिला अध्यक्ष के. श्रीकांत ने कहा, ‘‘नामांकन वापस लेने के लिए हमने किसी भी चीज की पेशकश नहीं की थी. हमने खुलेआम बताया था कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी क्यों वापस ली. अब उन्होंने अपना रूख बदल लिया है. लगता है कि कोई उन पर दबाव बना रहा है. हमें संदेह है कि वह माकपा और आईयूएमएल के दबाव में ये आरोप लगा रहे हैं.’’




इस बीच माकपा उम्मीदवार वी वी रमेशन ने कसारगोड पुलिस प्रमुख से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. वह 2021 के चुनावों में तीसरे स्थान पर रहे थे.

आईयूएमएल के ए. के. एम. अशरफ ने 65,758 मतों के साथ जीत दर्ज की थी जबकि सुरेंद्रन को 65,013 वोट मिले थे और रमेशन को 40,639 वोट हासिल हुए.

(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)

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