सहयोगियों को मनाने में जुटी BJP, उद्धव से मिलने मातोश्री जाएंगे अमित शाह

सहयोगियों को मनाने में जुटी BJP, उद्धव से मिलने मातोश्री जाएंगे अमित शाह
अमित शाह की फाइल फोटो

शिवसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि शाह और ठाकरे के बीच बुधवार शाम छह बजे मातोश्री में मुलाकात होगी.

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उपचुनाव में खराब नतीजों के करीब हफ्ते भर बाद बीजेपी ने नाराज चल रहे अपने सहयोगी दलों को मनाने की कवायद शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मुंबई जाकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे. शिवसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि शाह और ठाकरे के बीच बुधवार शाम छह बजे मातोश्री में मुलाकात होगी.

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दरअसल महाराष्ट्र के पालघर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में दोनों सहयोगी दलों के बीच जोरदार आरोप-प्रत्यारोप देखा गया. पालघर सीट पर बीजेपी ने फतह जरूर हासिल की, लेकिन जीत के बेहद अंतर ने राज्य और केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को चौकन्ना कर दिया. केंद्र और राज्य स्तर पर कई बीजेपी विरोधी दल एकजुट होते दिख रहे हैं. इसी का नतीजा रहा कि भंडारा-गोंदिया सीट पर एनसीपी-कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ते हुए बीजेपी का यहां मात दे दी.



पालघर उपचुनाव के दौरान शिवसेना ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में गड़बड़ी को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा. पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी ने अपने फायदे के लिए ईवीएम में छेड़खानी की है.



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एनडीए के छोटे घटक दलों की कथित अनदेखी को लेकर शिवसेना लगातार ही बीजेपी पर हमलावर रही है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने तो अपनी पार्टी को बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक शत्रु तक करार दिया. उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दोनों को 'नहीं चाहता' है, लेकिन कांग्रेस या जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा को 'स्वीकार' कर सकता है.

दिल भले न मिले, रिश्ता जुड़ा रहे
शिवसेना और बीजेपी का रिश्ता काफी पुराना है. यही वजह है कि अमित शाह भी खुलकर कह चुके हैं कि रिश्ता नहीं टूटना चाहिए, दिल मिले न मिले. उधर शिवसेना आसानी से मानने को तैयार नहीं. उसके मंत्रियों की शिकायत है कि सरकार में रहने हुए भी उनके बहुत से काम नहीं हो रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक, अंदर की बात ये है कि शिवसेना प्रमुख उदधव ठाकरे के बेटे आदित्य पार्टी को अकेले दम पर आगे बढ़ाने का जोर दे रहे हैं. उनकी जिद पर ही विधानसभा और उसके बाद बीएमसी का चुनाव शिवसेना ने अकेले लड़ा, लेकिन समझदारी दिखाते हुए उद्धव अब तक सरकार से हटने और मंत्रियों को हटाने से बच रहे हैं.

नए गठजोड़ की भी चर्चा गर्म
दरअसल शिवसेना को लगता है कि बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में 123 सीटें जीत ली थी और अब 288 सीटों का बंटवारा हुआ, तो बीजेपी आधे यानी 144 से कम पर नहीं मानेगी. सियासी गलियारे में एक चर्चा यह भी है कि शिवसेना विधानसभा चुनाव के बाद अपने विकल्प खुले रखना चाहती है, ताकि वक्त आने पर एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाया जा सके. राज्य में दोनों क्षेत्रीय पार्टियों के वोट बैंक का एक दूसरे से कोई टकराव भी नहीं.

ऐसे में शिवसेना को लगता है कि फिलहाल अगर बीजेपी से सौदेबाजी हो जाए तो बेहतर होगा. अमित शाह से मुलाकात का एक और एजेंडा मंत्रिमंडल में बदलाव का भी बताया जा रहा है. दरअसल शिवसेना की जिद पर ही बीजेपी ने नारायण राणे को मंत्री नहीं बनाया. ऐसे में शिवसेना नए मंत्री बनाना भी चाहती है. इस सब मुद्दों पर बुधवार को अमित शाह से उद्धव की बात होगी.

जेडीयू ने भी बढ़ाया दबाव
अमित शाह की उद्धव ठाकरे से यह मुलाकात ऐसे समय होने जा रही है, जब बिहार में जोकीहाट विधानसभा सीट पर आरजेडी उम्मीदवार से हार के बाद जेडीयू ने लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है.

जेडीयू राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से अपने लिए 25 सीटें मांग रही है. उसका कहना है कि वह राज्य में गठबंधन का बड़ा घटक दल है और ऐसे में यहां लोकसभा चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए.

वहीं बीजेपी के तरफ से भी इस पर तुरंत ही जवाब आया कि नीतीश कुमार बिहार में एनडीए सरकार के चेहरा हैं, लेकिन लोकसभा का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.

बिहार में जेडीयू और बीजेपी में लोकसभा चुनाव से पहले जारी इस खींचतान के बीच यहां गुरुवार को एनडीए की बैठक होने वाली है. आरजेडी का साथ छोड़ बीजेपी से मिलकर नीतीश कुमार के सरकार बनाने के बाद एनडीए की यह पहली बैठक होगी.
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