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मिशन 2019 के लिए सहयोगी पार्टियों को मनाने में जुटी बीजेपी

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: June 5, 2018, 2:15 PM IST
मिशन 2019 के लिए सहयोगी पार्टियों को मनाने में जुटी बीजेपी
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ अमित शाह की फाइल फोटो

अब तक खामोशी से बीजेपी की अगली चाल का इंतजार करते रहे एनडीए के सहयोगी दल भी उसे आंखे दिखाने लगे हैं. सब जानते हैं कि अपनी बातें मनवाने का अभी जबरदस्त मौका है.

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कर्नाटक में मिला झटका और उत्तर प्रदेश के लोकसभा उपचुनावों में मिली एक के बाद एक हार ने बीजेपी आलाकमान को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है. इन झटकों के बाद आलम ये है कि अब तक खामोशी से बीजेपी की अगली चाल का इंतजार करते रहे एनडीए के सहयोगी दल भी उसे आंखे दिखाने लगे हैं. सब जानते हैं कि अपनी बातें मनवाने का अभी जबरदस्त मौका है. यही वजह है कि शिवसेना से लेकर जेडीयू तक सभी बीजेपी से अपना हिस्सा मांग रहे हैं.

अटल-आडवाणी के दौर में जॉर्ज फर्नांडिस एनडीए के संयोजक थे. फिर इसके बाद 2007 में आडवाणी जब पीएम इन वेटिंग बने तो संयोजक पद की कमान शरद यादव के पास आ गई. उस वक्त भी बीजेपी के खिलाफ शिवसेना का हल्ला जारी था, वहीं बिहार में जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में थी. हालांकि उस वक्त छोटे-बड़े अंतराल पर एनडीए की बैठकें होती रहती थीं, जिसमें आमने-सामने बैठकर रिश्तों में पड़ी गांठें खोलने की कोशिश की जाती थी. फिर 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में छोटे-छोटे क्षेत्रिय दलों से समझौता हुआ. एनडीए में बिहार से रामवलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हुए. इस दौरान शिवसेना से सीटों का तालमेल टूटा, लेकिन फिर भी सरकार गठबंधन की ही बनी.

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हालांकि इसके बाद के चार वर्षों को देखें तो संसद सत्रों के दौरान हुई एनडीए की बैठकों को छोड़कर आपसी तनातनी सुलझाने के लिए ऐसी कोई बैठक नहीं हुई. इस दौरान एनडीए के संयोजक का भी कोई अता-पता नहीं है. ऐसे में एनडीए सहयोगियों के बीच नाराज़गी उभरती दिखी और लंबे अंतराल के बाद एनडीए खेमे में आए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू बैरंग वापस लौट गए. वहीं उपचुनावों के बाद एनडीए के सहयोगी दलों ने जिस तरह से बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ पैंतरेबाजी शुरू कर दी है, उससे बीजेपी आलाकमान थोड़ा परेशान जरूर हुआ है और यही वजह है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहयोगी नेताओं से बातचीत कर मनाने की कोशिशों में जुट गए हैं.



शिवसेना


बीजेपी की सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना को मनाना कभी आसान नहीं रहा. बाल ठाकरे के वक्त भी अटल या आडवाणी के खिलाफ शिवसेना मोर्चा खोले रखती थी. यह पार्टी महाराष्ट्र की सियासत में खुद को जीवंत बनाए रखने के लिए कई उग्र प्रदर्शन करती रही है. लेकिन नरेंद्र मोदी का कभी खुला समर्थन करने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भड़क जाएं, तो बीजेपी के लिए मामला दुरुस्त तो नहीं ही कहा जाएगा. विधानसभा चुनावों में सीटों के तालमेल को लेकर गठबंधन टूट गया और शिवसेना ने लोकसभा चुनाव भी अपने दम पर लड़ने का ऐलान कर दिया.

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नोटबंदी से लेकर मोदी सरकार के हर कदम का शिवसेना खुलकर विरोध करने लगी. हालांकि महाराष्ट्र में मिली कई सफलताओं के बावजूद जब पालघर सीट पर बड़ी मुश्किल से जीत मिली तो बीजेपी आलाकमान को यकीन होने लगा कि सहयोगी की सुनना भी जरूरी है. यही कारण है कि अमित शाह 6 जून को मुंबई में मातोश्री जाकर शिवसेना प्रमुख से मुलाकात करेंगे. अरसे बाद आमने-सामने होने वाली इस मुलाकात को लेकर माना जा रहा है कि इससे रिश्तों पर पड़ी बर्फ पिघलेगी और फिर मिशन 2019 के लिए कंधे से कंधा मिला कर लड़ने की कवायद शूरू होगी.

जनता दल यूनाइटेड
वहीं बिहार की बात करें, तो राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से 22 बीजेपी के पास हैं, लेकिन उपचुनावों में महागठबंधन की जीत ने जेडीयू को भी पंख लगा दिए हैं. उन्हें ये एहसास होने लगा कि महागठबंधन का ही रास्ता ज्यादा आसान है. इसे लेकर बीजेपी पर आंखें तरेरी, तो तेजस्वी ने साफ कर दिया कि अब नीतीश कुमार पर उन्हें जरा भी भरोसा भी नहीं. तेजस्वी का ये संदेश कांग्रेस को भी था.

ऐसे में नीतीश कुमार खुद को बड़ा भाई कहते हुए आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादा खुद 25 सीटों पर दावा करने लगे. जेडीयू समेत एनडीए के अन्य सहयोगी दलों ने सीटों के तालमेल को लेकर अभी से ही दबाव बनाना शुरू कर दिया है. यही वजह रही कि नोटबंदी का सबसे पहले समर्थन करने वाले नीतीश कुमार अब उस पर सवाल उठाने लगे. उन्होंने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और बाढ़ राहत को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधना भी शुरू कर दिया.

हालांकि बीजेपी आलाकमान अब इस घमासान को आगे बढ़ने देने के मूड में नहीं. ऐसे में बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने 7 जून को पटना में एनडीए नेताओं के लिए महाभोज आयोजित किया है. इसमें नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाहा सहित पार्टी के तमाम सांसद और विधायक मौजुद होंगे. हालांकि सूत्र बताते हैं कि ये आग इतनी जल्दी नहीं बुझने वाली.

लोक जनशक्ति पार्टी
हालिया उपचुनाव के नतीजों के बाद अमित शाह ने लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और सांसद चिराग पासवान से मुलाकात की. रामविलास पासवान दबी जुबान से ही सही, लेकिन कभी एससी/एसटी एक्ट तो कभी अल्पसंख्यकों को लेकर पिछले काफी अरसे से मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले दिखते रहे हैं. उनकी नाराजगी की एक वजह मलाईदार मंत्रालय न मिल पाने की भी बताई जाती है. इस दौरान पिछले कुछ महीनों में उनकी नजदीकियां नीतीश कुमार के साथ भी बढ़ रही हैं, जिसने संभवत: बीजेपी आलाकमान को चौकन्ना कर दिया. सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात में पासवान ने एससी/एसटी ऐक्ट से जुड़ा अध्यादेश जल्द लाने और प्रमोशन में आरक्षण संबंधी कानून पर अध्यादेश लाने की मांग की. सूत्र बताते हैं कि अमित शाह ने पूरी बातें सुनी और उन्हें उचित कदम उठाने का आश्वासन भी दिया.

शिरोमणी अकाली दल
एनडीए बनने की शुरुआत से ही अकाली दल का साथ रहा है. पंजाब के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से ऐसी कोशिशें हुई थी कि ये चुनाव अलग-अलग लड़ा जाए, लेकिन रिश्ते इतने पुराने थे कि टूटे नहीं. हालांकि बीजेपी बतौर जुनियर पार्टनर लगातार समझौता करती रही. ऐसे में अब अमित शाह 7 जून को चंडीगढ़ में अकाली दल के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे, जिसमें पंजाब के ताजा राजनीतिक हालात पर चर्चा के साथ मिशन 2019 पर मंथन होगा.

रालोसपा
पिछले दिनो में अमित शाह ने मानवसंसाधन विकास राज्यमंत्री उपेन्द्र कुशवाहा से भी मुलाकात कर उनकी नाराजगी जानने की कोशिश की और दूर करने का आश्वासन भी दिया.

पिछले कुछ झटकों से सीख लेते हुए अमित शाह ने सहयोगियों की नाराजगी दूर करने की एक पहल शुरू की है. पीएम मोदी जानते हैं कि एनडीए का कुनबा जुड़ा रहता है तो देश भर में अच्छा संदेश जाएगा. वाजपेयी सरकार ने 24 दलों के साथ सरकार शुरू की थी अंत में उसके साथ 4 ही सहयोगी बचे थे. कुछ ऐसा ही हाल मनमोहन सरकार का हुआ था, जब एक-एक कर सारे सहयोगी साथ छोड गए थे. जाहिर है समय रहते बीजेपी आलाकमान चेत गया है, क्योंकि उन्हें पता है 2014 में तो मोदी की हवा थी और अब सरकार के काम पर वोट लेना है. ऐसे में जीतने के लिए सहयोगियों का साथ जरूरी है. देखे रिश्तों में आई तल्खी किस हद तक दूर होती है.

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First published: June 5, 2018, 2:15 PM IST
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