जम्मू-कश्मीर के लिए ये है बीजेपी का पूरा प्लान, इन 6 बदलावों का लिया संकल्प

बीजेपी की वर्किंग कमेटी ने अपने नए संकल्प में जम्मू और लद्दाख के इलाकों में पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकारों के जरिये किए गए अन्याय को खत्म करने की बात भी कही है. इसके लिए बीजेपी के पास अपना प्लान है.

News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 9:07 PM IST
जम्मू-कश्मीर के लिए ये है बीजेपी का पूरा प्लान, इन 6 बदलावों का लिया संकल्प
बीजेपी ने पिछली बार जम्मू और कश्मीर में पीडीपी के समर्थन से सरकार बनाई थी लेकिन बाद में समर्थन वापस ले लिया था (न्यूज18 क्रिएटिव)
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Updated: June 17, 2019, 9:07 PM IST
जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने नई तरह से विधानसभा सीटों के परिसीमन की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आने वाली 24 सीटों पर भी बंद चुनावी प्रक्रिया को खत्म करते हुए वहां चुनाव करवाने की मांग की है. पार्टी की वर्किंग कमेटी ने कई ऐसे संकल्प रखे हैं जिससे कश्मीर को लेकर बीजेपी का भविष्य का पूरा प्लान सामने आता है. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के ये 6 संकल्प हैं.

पार्टी की वर्किंग कमेटी ने अपने नए संकल्प में जम्मू और लद्दाख के इलाकों में पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकारों के जरिये किए गए बड़े अन्याय पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि उस दौरान किए गए परिसीमन में कश्मीर के प्रति पक्षपाती रवैया अपनाया गया था.

नेशनल कांफ्रेस के पक्षपात को मिटाने के लिए नए परिसीमन की मांग
बीजेपी की वर्किंग कमेटी की मीटिंग में पार्टी की नए तरह से विधानसभा सीटों के परिसीमन की मांग उठाई गई. इसके अलावा उन्होंने पीओके में आने वाली विधानसभा की 24 में से एक-तिहाई सीटों पर भी चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने इस मांग के लिए बाकायदा एक प्रस्ताव पारित किया.

पीओके के इलाकों को परिसीमन के बाद जम्मू इलाके के साथ गिना जाए
उन्होंने प्रस्ताव में यह भी मांग की कि इन सीटों को जम्मू इलाके को दिया जाना चाहिए क्योंकि यहां से विस्थापित लोग 1947-48 से ही जम्मू के इलाकों में रह रहे हैं.

कश्मीरी पंडितों के लिए खत्म हो एम फॉर्म की अनिवार्यता
इसके अलावा उन्होंने प्रवासी कश्मीरी पंडितों के लिए घाटी में वोट डालने के लिए एम फॉर्म भरे जाने की अनिवार्यता भी खत्म करने का प्रस्ताव भी रखा है.

कश्मीरी जनजातियों के लिए की गई आरक्षण की मांग
पार्टी की वर्किंग कमेटी ने राज्य की अनुसूचित जनजातियों के लिए राजनीतिक आरक्षण की मांग भी की है. बताते चलें कि इलाके में मुस्लिम गुज्जर और बकरवाल जातियां बड़ी संख्या में हैं और राज्य में इन्हें अनुसूचित जनजातियों में रखा गया है. ये जातियां कश्मीर के अलावा पीर पंजाल पर्वत और चिनाब की घाटी में बड़ी संख्या में फैली हुई हैं. कश्मीरी पंडितों की तरह ही इन जातियों की संख्या भी जम्मू-कश्मीर में अच्छी-खासी है लेकिन पंडितों की तरह ही ये भी जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में बिखरी हुई हैं.

पीओके में आने वाली 24 में से 8 सीटों पर हों चुनाव
कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं. जिनमें से 87 सीटों पर चुनाव कराए जाते हैं. जबकि 24 सीटें चूंकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के इलाके में आती हैं इसलिए वहां चुनाव नहीं कराए जा सकते और वे खाली रहती हैं.

बीजेपी के नेताओं के मुताबिक 1947 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भगाए गए बहुत से लोगों में से एक-तिहाई आज भी जम्मू के कई अलग-अलग इलाकों में रहते हैं. ऐसे में जब पीओके के इलाके के लिए 24 सीटें खाली रखी जाती हैं. वहां से आए लोग दूसरे इलाकों के प्रतिनिधियों के लिए वोट दे रहे हैं. ऐसे में पार्टी चाहती है कि ये लोग जिन इलाकों से आए हैं, उन्हीं इलाकों के लिए वोट डालने का अधिकार मिल सके ताकि इन 24 सीटों में से एक-तिहाई का खालीपन भरा जा सके.

इससे न सिर्फ लोगों को मिलेगा प्रतिनिधित्व बल्कि मजबूत होगा पीओके पर भारत का दावा
पार्टी के नेताओं का मानना है कि ऐसा करने से न सिर्फ इन प्रवासी लोगों को अपना प्रतिनिधित्व वापस मिल सकेगा बल्कि इस कदम से पीओके के इलाके पर भारतीय दावे को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.

SOS इंटरनेशनल, पीओके से विस्थापित लोगों की एक संस्था है. इसके चेयरमैन राजीव चुन्नी बताते हैं, 1947 में पीओके से करीब 3 लाख लोगों का इस ओर विस्थापन हुआ था. जिसके बाद से बॉर्डर के इस पार विस्थापित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 12 से 13 लाख हो चुकी है.

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