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अयोध्या फैसला: BJP का कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं को निर्देश- भावनाओं पर काबू रखें, भड़काऊ बयान न दें

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Updated: November 4, 2019, 7:11 PM IST
अयोध्या फैसला: BJP का कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं को निर्देश- भावनाओं पर काबू रखें, भड़काऊ बयान न दें
बीजेपी ने जल्द ही आने वाले अयोध्या मामले के फैसले को लेकर ये निर्देश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (Ram Mandir-Babri Masjid Land Dispute) मामले में कुछ ही दिनों में फैसला सुना सकता है इसी को देखते हुए भाजपा ने पार्टी नेताओं, प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को ये निर्देश दिए हैं.

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  • Last Updated: November 4, 2019, 7:11 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (Ram Mandir-Babri Masjid Land Dispute) मामले में सुनवाई पूरी कर ली है. कुछ ही दिन में अदालत फैसला सुना सकती है इसी के चलते भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janta Party) ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं. भाजपा (BJP) ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि राम मंदिर मामले को लेकर ज्यादा भावुक न हों. इसके लिए भाजपा ने इसके लिए नेशनल सोशल मीडिया टीम के साथ बैठक की.

भाजपा ने टीम को निर्देश दिए हैं कि वह सिर्फ तथ्यों और तर्कों के आधार पर बात करें. बीजेपी ने अपने प्रवक्ताओं को यह निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की गैरजरूरी डिबेट और बहस से बचें. साथ ही बीजेपी ने यह भी कहा है कि पार्टी के नेता किसी भी तरह के भड़काऊ बयान न दें.

नकवी भी बोले- न हो हाहाकारी हंगामा
उधर अयोध्या में राम मंदिर को लेकर उच्चतम न्यायालय के बहुप्रतीक्षित फैसले से पहले केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कहा कि इस फैसले को लेकर जीत का जुनूनी जश्न नहीं होना चाहिए और न ही हार का हाहाकारी हंगामा होना चाहिए.

उधर देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारियों, उलेमा और बुद्धिजीवियों की बैठक में भी सभी पक्षों से अदालती फैसले को स्वीकार करने और शांति बनाए रखने की अपील की गई.

मुस्लिम संगठनों ने भी की शांति बनाए रखने की अपील
कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि समूह ‘ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत’ की ओर से बुलाई गई इस बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मुशावरत के प्रमुख नावेद हामिद, ‘मरकजी जमीयत अहले हदीश हिंद’ के प्रमुख मौलाना असगर अली इमाम सलफी, ऑल इंडिया उलेमा एंड मशायख बोर्ड के प्रमुख मौलाना अशरफ किछौछवी, पूर्व नौकरशाह वजाहत हबीबुल्ला, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी तथा कई अन्य मौलाना एवं मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी शामिल हुए.
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बैठक के बाद नावेद हामिद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, बैठक में कुछ बिंदुओं पर खासतौर पर जोर दिया गया. मसलन, न्यायालय का जो भी फैसला आए, वो सबको स्वीकार करना चाहिए. दूसरा, देश में यह सबकी जिम्मेदारी है कि शांति बरकरार रखी जाए.

उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही हम यह उम्मीद भी करते हैं कि इस फैसले के बाद सरकार किसी एक पक्ष के साथ खड़ी नजर नहीं आएगी. हमे उम्मीद है कि यह मामला पूरी दुनिया के कानूनी इतिहास में दर्ज होगा.'

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First published: November 4, 2019, 6:58 PM IST
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