बीजेपी नेता ने लिखा PM मोदी को खत, दलाई लामा को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग

तिब्‍बतियों के सर्वोच्‍च धर्मगुरु दलाई लामा (फाइल फोटो)
तिब्‍बतियों के सर्वोच्‍च धर्मगुरु दलाई लामा (फाइल फोटो)

Bharat Ratna be conferred Dalai Lama: अपने खत में शांता कुमार ने प्रधानमंत्री से दो खास मांग की है. जिसमें धर्मगुरु दलाई लामा को भारत रत्न से सम्मानित करना और तिब्बत के विषय को संयुक्‍त राष्ट्र संघ में उठाना शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 10:59 PM IST
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नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार (BJP Shanta Kumar) ने प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) को खत लिखा है. पीएम को लिखे अपने खत में शांता कुमार ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा (Dalai Lama) को भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित करने की मांग की है.

अपने खत में शांता कुमार ने प्रधानमंत्री से दो खास मांग की है. जिसमें धर्मगुरु दलाई लामा को भारत रत्न से सम्मानित करना और तिब्बत के विषय को संयुक्‍त राष्ट्र संघ में उठाना शामिल है. शांता कुमार का कहना है कि दलाई लामा विश्व में सबसे अधिक सम्मानित आध्यात्मिक नेता हैं.

दलाई लामा को मिल चुका है नोबेल पुरस्कार
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी को लिखे खत में कुमार ने कहा कि दलाई लामा को विश्व का सबसे बड़ा नोबेल पुरस्कार मिला है. बहुत से अन्य देशों के भी सर्वोच्च पुरस्कार से वे सम्मानित हुए हैं. उन्होंने कहा इस समय दलाई लामा विश्व में सबसे अधिक सम्मानित आध्यात्मिक नेता हैं. भारत को अपना गुरु कहते हैं. उनको सम्मानित करके भारत भी सम्मानित होगा.
जानिए दलाई लामा के बारे में...


दलाई लामा आध्यात्मिक नेता है. उन्हें 61 साल पहले 1959 तिब्बत से भागना पड़ा था. तब से वो भारत में रह रहे हैं. ऐसा कहा जाता है कि दलाई लामा 17 मार्च को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से पैदल ही निकले थे. यात्रा के दौरान उनकी और उनके सहयोगियों की कोई ख़बर नहीं आने पर कई लोग ये आशंका जताने लगे थे कि उनकी मौत हो गई होगी.

तिबब्त और चीन के बीच पहले से ही तनाव चला आ रहा था, जिसकी वजह थी चीन का तिब्बत को अपना हिस्सा मानना. इसपर बातचीत के लिए चीन ने दलाई लामा को अपने यहां आने का न्यौता दिया लेकिन उसकी शर्त थी कि वे बिना किसी सुरक्षा के आएं. ये चीन की कोई चाल हो सकती थी. ये समझने के बाद तिब्बतियों ने अपने धर्म गुरु को चीन जाने से रोक दिया. वार्ता शुरू होने से पहले ही विफल देखकर भड़के हुए चीन ने योजना बनाई और साल 1959 में आजाद तिब्बत पर भारी संख्या में चीनी सैनिकों ने हमला किया और उसपर कब्जा कर लिया. इससे पहले से ही People's Republic of China और तिब्बतियों के बीच लड़ाई चल रही थी. माना जाता है कि इस लड़ाई में लगभग 87,000 तिब्बती मारे गए.
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