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झारखंड की हार के बाद बीजेपी को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए बनानी होगी नई रणनीति

झारखंड की हार के बाद बीजेपी को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए बनानी होगी नई रणनीति

झारखंड विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए अपनी नई रणनीति पर फिर से विचार करना होगा.

झारखंड विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए अपनी नई रणनीति पर फिर से विचार करना होगा.

झारखंड (Jharkhand) में चुनाव से पहले ही जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी (JMM-Congress-RJD) गठबंधन की जीत तय मानी जा रही थी. वहीं, बीजेपी (BJP) और आजसू (AJSU) के बीच यही खींचतान चलती रही कि किसका प्रत्‍याशी कहां से चुनाव में उतारेगा. इस खींचतान ने भी जेएमएम को चुनावी समर में ऑक्‍सीजन देने का काम किया.

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    अशोक मिश्रा

    रांची. झारखंड में बीजेपी (BJP) को सत्‍ता से बेदखल करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेृतत्‍व वाला गठबंधन सरकार बनाने को तैयार है. झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 (Jharkhand Assembly Election 2019) में बीजेपी बहुमत से काफी कम सीटें (25) ही जीत पाई, जबकि जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी (JMM-Congress-RJD) गठबंधन ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की. नतीजों के बाद झारखंड में मुख्‍यमंत्री के सवाल पर भी फुलस्‍टॉप लग गया है. राज्‍य में जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लिहाजा, जेएमएम मुखिया हेमंत सोरेन (Hemant Soren) का सीएम बनना तय है. वहीं, कांग्रेस (Congress) और आरजेडी (RJD) कुछ अहम मंत्रालयों की मांग कर सकते हैं.

    जेएमएम के लिए उत्‍साह तो बीजेपी के लिए सबक हैं झारखंड चुनाव के नतीजे
    झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों से जहां जेएमएम उत्‍साह में है, वहीं ये परिणाम बीजेपी के लिए सबक भी लेकर आए हैं. बीजेपी को झारखंड के नतीजों से सबक लेते हुए बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) के लिए अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत होगी. झारखंड में जेएमएम गठबंधन की सरकार बनने की उम्‍मीद चुनाव के काफी समय पहले से ही की जा रही थी. इस दौरान बीजेपी और अजसू (AJSU) के बीच यही खींचतान चलती रही कि किसका प्रत्‍याशी कहां से चुनाव में उतारेगा. इस खींचतान ने भी जेएमएम को चुनावी समर में ऑक्‍सीजन देने का काम किया.

    सरयू राय ने निवर्तमान सीएम रघुवर दास को दी शिकस्‍त
    बीजेपी से विद्रोह कर निर्दलीय प्रत्‍याशी के तौर पर जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से उतरे सरयू राय (Saryu Roy) ने निवर्तमान मुख्‍यमंत्री रघुबर दास (Raghubar Das) को ही हरा दिया. उन्‍होंने पहले ही कहा था कि वह सरकार का काम के आधार पर समर्थन या विरोध करेंगे. आखिर में उन्‍होंने सरकार का विरोध करने का फैसला किया. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) और हरियाणा (Haryana) के बाद झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए झटके के तौर पर सामने आए. ये नतीजे इसलिए भी चौंकाने वाले थे क्‍योंकि कुछ महीने पहले ही हुए लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में बीजेपी ने झारखंड में जबरदस्‍त सफलता हासिल की थी. नतीजों से साफ है कि लोगों ने स्‍थानीय मुद्दे के साथ ही बेरोजगारी (Unemployment) और आर्थिक नीतियों (Economic Policies) के मसले पर वोटिंग की.

    झारखंड विधानसभा चुनाव बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के लिए भी काफी अहम था. माना जा रहा था कि बतौर पार्टी अध्‍यक्ष यह उनका आखिरी चुनाव होगा.


    बतौर बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के लिए अहम माना जा रहा था ये चुनाव
    अयोध्‍या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद झारखंड में पहला चुनाव हुआ था. इसके बाद झारखंड चुनाव के बीच में ही बीजेपी के नेतृत्‍व वाली केंद्र की एनडीए सरकार (NDA Government) ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) भी संसद से पारित करा लिया. ये चुनाव बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के लिए भी काफी अहम था. माना जा रहा था कि बतौर पार्टी अध्‍यक्ष यह उनका आखिरी चुनाव होगा. लोकसभा चुनाव 2019 की जबरदस्‍त सफलता के बाद पार्टी एक के बाद एक राज्‍य में चुनाव हार गई. झारखंड देश के सबसे गरीब राज्‍यों में एक है. माना जा रहा है कि आर्थिक सुस्‍ती (Economic Slowdown) के दौर में सबसे ज्‍यादा असर भी झारखंड पर ही पड़ेगा. वहीं, राज्‍य में बेरोजगारी की दर भी राष्‍ट्रीय दर के मुकाबले ज्‍यादा है.

    पिछले चुनाव में बीजेपी-अजसू गठबंधन को मिले 30 फीसदी एसटी वोट
    जेएमएम की सफलता में सबसे बड़ा योगदान राज्‍य के एसटी मतदाताओं (ST Voters) का है. पिछले चुनाव में बीजेपी और सहयोगी दल आजसू को 30 फीसदी एसटी वोट मिले थे. नतीजतन गठबंधन को 13 आरक्षित विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी. गैर-आदिवासी मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के चलते बीजेपी को गैर-आदिवासी मतदाताओं का समर्थन मिला था. इसके अलावा अन्‍य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाताओं का साथ भी मिला था. इस बार झारखंड की कुल आबादी में 30 फीसदी हिस्‍सेदारी वाले आदिवासी वर्ग (Tribes) के मतदाताओं ने जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन का साथ दिया.

    कांग्रेस और जेएमएम के वादों ने आसान कर दी जीत की राह
    कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्‍ता में आने के बाद 14 फीसदी आरक्षण में 27 फीसदी आरक्षण ओबीसी वर्ग को दिया जाएगा. वहीं, जेएमएम ने भी ओबीसी, एसटी और एससी वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों (Government Jobs) में 67 फीसदी आरक्षण का वादा किया था. साथ ही कहा था कि सत्‍ता में आने के बाद स्‍थानीय लोगों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी. हेमंत सोरेन की पार्टी ने वादा किया था कि अगर वे सत्‍ता में आए तो राज्‍य के बेरोजगार ग्रेजुएट और पोस्‍ट-ग्रेजुएट युवाओं को 5,000 व 7,000 रुपये प्रति माह भत्‍ता दिया जाएगा. दोनों दलों के इन वादों ने जीत की राह आसान बना दी.

    (लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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    Tags: Amit shah, Bihar election, BJP, Hemant soren, Jharkhand Assembly Election 2019, Jharkhand Election Result, Jharkhand mukti morcha, Raghubar Das, Saryu Rai

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