OPINION: SP-BSP को छोड़ कांग्रेस पर इतनी हमलावर क्यों है योगी की सेना, क्या है कोई विशेष प्लान!

OPINION: SP-BSP को छोड़ कांग्रेस पर इतनी हमलावर क्यों है योगी की सेना, क्या है कोई विशेष प्लान!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर योगी आदित्यनाथ की सरकार जितनी तेजी से हमलावर होती है. उतनी तेजी SP-BSP के बयान का जवाब देने में कभी नहीं दिखाती.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति को देखें तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी इस समय समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से ज्यादा कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में देखते हुए नजर आ रहे हैं. अगर लोकसभा चुनाव के बाद पिछले करीब 1 साल के राजनीतिक सफर को देखें, तो कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर योगी आदित्यनाथ की सरकार जितनी तेजी से हमलावर होती है, उतनी तेजी एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के बयान का जवाब देने में कभी नहीं दिखाती. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश बीजेपी की टीम प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस को इतनी अहमियत क्यों दे रहे हैं!

उत्तर प्रदेश की राजनीति को अगर आंकड़ों के हिसाब से समझने की कोशिश करें, तो अभी भी वहां मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ही है. समाजवादी पार्टी अभी भी 49 विधायकों के साथ विधानसभा में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है. एसपी के पास उत्तर प्रदेश से 5 सांसद भी हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी के पास उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 18 विधायक हैं, वहीं प्रदेश से 11 सांसद भी हैं. कांग्रेस उत्तर प्रदेश कोटे से मुश्किल से लोकसभा में अपना खाता खोल पाई थी. पार्टी की हालात ऐसी नहीं थी कि वो अपने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश से संसद में भेज पाए. बात करें विधानसभा की तो 403 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस के सिर्फ 7 विधायक हैं. उनमें से भी एक घर छोड़कर जाने का फैसला कर चुका है. ऐसे में योगी की सेना किस प्लान के तहत कांग्रेस पर हमलावर है, इसे समझने की कोशिश करते हैं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जेल में, प्रियंका के पीए पर एफआईआर
कोरोना के इस संकट में जिस तरह बसों के मुद्दे पर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरने की कोशिश की, उससे साफ है कि कांग्रेस भी किसी तरह राज्य में सत्ता भले न मिले, मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में तो आना ही चाहती है. योगी सरकार ने भी कांग्रेस से इस हमले का जितनी तेजी से जवाब दिया, उससे भी लगा कि उत्तर प्रदेश में राजनीति कांग्रेस और बीजेपी के बीच सिमटती नजर आ रही है. मुख्य विपक्षी दल के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ट्विटर के जरिए यदाकदा याद दिलाने की कोशिश में दिखे कि मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी है, जबकि बीएसपी सुप्रीमो मायवाती तो ये तय ही नहीं कर पा रही हैं कि विरोध बीजेपी का करना है कि कांग्रेस का.



कोरोना संकट का दौर पहला मामला नहीं है जब उत्तर प्रदेश में सरकार और कांग्रेस आमने-सामने हैं. इससे पहले चाहे मिर्जापुर में हुआ नरसंहार रहा हो या प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति हो. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जितनी आक्रामक रहती हैं वैसी आक्रामकता एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती में कम ही देखने को मिलती है, लेकिन इससे भी ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि प्रियंका पर बीजेपी का जवाबी हमला उससे ज्यादा तेज होता है. जबकि एसपी-बीएसपी के नेता जब उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला करते हैं, तो बीजेपी के उन पर जवाबी हमले में वैसी तेजी और धार नहीं दिखती, जैसी कांग्रेस के समय दिखती है. कोरोना संकट में ही देखें, तो जवाबी कार्रवाई में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जेल में हैं, जबकि प्रियंका गांधी के पीए के खिलाफ एफआईआर और जांच जारी है.



योगी की सेना के आक्रामक होने के पीछे ये हो सकता है प्लान!
उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले यह मानते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 साल के कार्यकाल के बाद मंझे हुए प्रशासक के साथ-साथ मंझे हुए राजनेता भी बन गए हैं. ऐसे में जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में 2 साल से कम का वक्त बचा है तो योगी को ये पता है कि किस मोहरे को किस खाने मे सजाना है. कांग्रेस और प्रियंका पर सीधा हमला योगी की राजनीति की एक चाल भी हो सकती है. जानकारों की मानें, तो ऐसे समय में पिछले चुनावों में जब समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और सबसे खराब दौर में भी 22 फीसदी से ज्यादा वोट मिले, तो योगी आदित्यनाथ कभी नहीं चाहेंगे कि उत्तर प्रदेश में मुकाबला आमने-सामने का हो. क्योंकि 5 साल की सरकार चलाने के बाद एक विरोधी वोट बैंक भी खड़ा हो जाता है. ऐसे में यदि सरकार विरोधी ये वोट बैंक एसपी या बीएसपी के साथ गया, तो दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में अकेले या मिलकर बीजेपी को चुनौती दे सकती हैं. जबकि यदि ये सरकार विरोधी वोट कांग्रेस के पास जाता भी है, तो वो इतनी कमजोर हो कि ये वोट बैंक भी उसे लड़ाई में खड़ा न कर सके. साफ है योगी की नजर 2022 के उत्तर प्रदेश चुनावों को बहुकोणीय बनाने की है और कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर जवाबी हमला राजनीतिक शतरंज की बिसात पर अभी तो पहली चाल है.

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First published: May 25, 2020, 2:01 PM IST
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