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दिल्ली हिंसा : जब मुस्तफाबाद के इन 2 नाईयों ने किया पीड़ितों का खूनी 'हेयरकट'

News18Hindi
Updated: March 4, 2020, 11:49 AM IST
दिल्ली हिंसा : जब मुस्तफाबाद के इन 2 नाईयों ने किया पीड़ितों का खूनी 'हेयरकट'
हिंसा में घायल शख्स की सर्जरी से पहले सिर के बाल काटते वसीम (PTI)

23 फरवरी (रविवार) रात को मुस्तफाबाद सहित उत्तर-पूर्वी जिले के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी. सभी दुकानें और मेडिकल स्टोर बंद थे. सिर्फ अल हिंद अस्पताल ही खुला था. हिंसा में घायल लोगों को मेडिकल सहायता की जा रही थी और घायलों की सर्जरी भी हो रही थी.

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  • Last Updated: March 4, 2020, 11:49 AM IST
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(राखी बोस)

नई दिल्ली. वो 24 फरवरी का दिन था. दिन के 12 बजे थे. पेशे से नाई मोहम्मद शाहजाद अपने सलून पर 17 साल के लड़के का हेयरकट बस खत्म ही करने वाले थे. अचानक उनका मोबाइल फोन बजा. पास के अल हिंद अस्पताल से ये कॉल किया गया था.

ये अस्पताल ओल्ड मुस्तफाबाद के नजदीक है. शाहजाद की दुकान के बगल में वसीम का भी सलून है. दोनों इससे पहले अस्पताल में ड्रेसिंग का काम भी करते थे. सोमवार को जिस वजह से उन्हें अल हिंद अस्पताल से फोन आया, वह उनकी कल्पना के बाहर की चीज थी.



दरअसल, 23 फरवरी (रविवार) रात को मुस्तफाबाद सहित उत्तर-पूर्वी जिले के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी. सभी दुकानें और मेडिकल स्टोर बंद थे. सिर्फ अल हिंद अस्पताल ही खुला था. हिंसा में घायल लोगों को मेडिकल सहायता की जा रही थी और घायलों की सर्जरी भी हो रही थी.



News18 से बात करते हुए शाहजाद (25) बताते हैं, 'हमें मालूम था रविवार रात को हिंसा हुई थी. कई लोग घायल भी हुए लेकिन हमें घटना की भयावहता का अंदाजा नहीं था. कॉल आते ही हम अस्पताल के लिए निकल गए, वहां जाकर जो देखा वो भयानक था.'


शाहजाद और वसीम अस्पताल पहुंचते ही घायलों के सिर के बाल साफ करने लगे, ताकि उन्हें सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर लाया जा सके. वसीम बताते हैं, 'हमने जिस पहले शख्स के बाल साफ किए, मुस्तफाबाद का रहने वाला था. उसके सिर पर लोहे के रॉड के वार के कारण कई गंभीर चोटें थीं.' वसीम ने कहा, 'ये हम दोनों का अब तक का खूनी हेयरकट था.'

वसीम आगे बताते हैं, 'अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले हमने घायलों के सिर से निकल रहा खून साफ किया. फिर उनके बाल काटे. धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही थी. खून से सने सिर के बाल काटना... हम वो मंजर कभी नहीं भूल पाएंगे.'

शाहजाद बताते हैं, 'पहले मैं घर पर भी घायलों की मरहम-पट्टी कर लेता था. अगर कोई तरीका पता नहीं होता, तो भी इसे घंटे भर में सीख लेता. ये सब मानवता की बात है.'

अल हिंद अस्पताल में सिर्फ तीन डॉक्टर और दो नर्स हैं. इसके अलावा अस्पताल की सफाई के लिए और फार्मेसी को चलाने के लिए कुछ स्टाफ हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि ये अस्पताल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है.


इस अस्पताल के डॉक्टर मिराज इकराम बताते हैं, 'हमने लड़कों को प्राथमिक चिकित्सा के बारे में सीखा रखा है. घाव की शुरुआती पट्टी कैसे की जाए इसकी ट्रेनिंग भी दी जाती है. कुछ लोगों को सीपीआर (cardiopulmonary resuscitation) के बारे में भी समझाया गया है. ताकि जरूरत पड़ने पर हर कोई मदद के लिए आगे आ सके.'

डॉक्टर मिराज इकराम 24 फरवरी को भड़की हिंसा के बाद से इस अस्पताल में ही हैं और मरीजों की लगातार मदद कर रहे हैं. वह बताते हैं, 'हिंसा के बाद से अब तक कम से कम 500 घायलों का यहां इलाज किया जा चुका है. हिंसा में घायल हुए हर शख्स को मुफ्त में दवाइयां भी दी जा रही हैं. एक अनुमान के मुताबिक बीते एक हफ्ते में अस्पताल से करीब 2 लाख रुपये की दवाइयां मरीजों को मुफ्त में दी जा चुकी हैं.

बता दें कि हिंसा के एक हफ्ते बाद मुस्लिम बहुल इलाके मुस्तफाबाद में हालात सामान्य हो रहे हैं. अब अल हिंद अस्पताल में हिंसा में घायल हुए कम मरीज रह गए हैं. लेकिन, हिंसा की बू अभी भी हवा में महसूस की जा सकती है.

(इस आर्टिकल को अंग्रेजी में पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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First published: March 4, 2020, 10:34 AM IST
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