अलविदा चिंटूजी: चला गया पुरुष प्रधान बॉलीवुड की नायिका प्रधान फिल्‍मों का सुपरस्‍टार

अलविदा चिंटूजी: चला गया पुरुष प्रधान बॉलीवुड की नायिका प्रधान फिल्‍मों का सुपरस्‍टार
Bollywood के मशहूर एक्टर ऋषि कपूर का मुंबई के अस्‍पताल में निधन

यह भी संयोग ही है कि अपने पूरे करियर में चॉकलेटी और रोमांटिक हीरो की तरह मशहूर रहे ऋषि कपूर की बचपन की फिल्‍म मेरा नाम जोकर और बुढ़ापे की मशहूर फिल्‍म मुल्‍क दोनों ही ट्रेजडी फिल्‍में थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 11:00 AM IST
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कपूर खानदान का एक और चराग बुझ गया. 67 साल की उम्र में भी चिंटू जी कहलाने वाले ऋषि कपूर चले गए. कैंसर की बीमारी ने उन्‍हें थका दिया था, लेकिन इस आखिरी थकान से पहले उन्‍होंने एक लंबा सफर तय किया. अप‍ने पिता राज कपूर की फिल्‍म 'मेरा नाम जोकर' में अगर वे बाल कलाकार के तौर पर नजर आए, तो अपने अंतिम समय की फिल्‍म मुल्‍क में वे सफेद दाढ़ी वाले बूढ़े मुसलमान के किरदार मे परदे पर थे. यह भी संयोग ही है कि अपने पूरे करियर में चॉकलेटी और रोमांटिक हीरो की तरह मशहूर रहे ऋषि कपूर की बचपन की फिल्‍म मेरा नाम जोकर और बुढ़ापे की मशहूर फिल्‍म मुल्‍क दोनों ही ट्रेजडी फिल्‍में थीं. जीवन के रंग ऐसे ही होते हैं जहां कॉमेडी और ट्रेजडी साथ साथ चलती है.

लेकिन अपनी इन दोनों पहचानों से इतर ऋषि कपूर जिस चीज के लिए याद रखे जाएंगे, वह है कामयाब नायक होते हुए भी नायिकाओं को स्‍टारडम प्रदान करना. हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री का हाल हमेशा से यह रहा है कि फिल्‍म हीरो के इर्द-गिर्द घूमती है और हीरोइन का काम गानों के समय हीरो के इर्द-गिर्द नाचने तक सीमित हो जाता है. सुपरस्‍टार्स का हाल तो यह होता है कि हीरोइन तो क्‍या बाकी चरित्र किरदारों को भी वे एक हद से आगे नहीं बढ़ने देते. लेकिन हिंदी फिल्‍मों के सबसे ताकतवर खानदान से आने और भारत के सबसे बड़े शोमैन राज कपूर के लाड़ले होने के बावजूद ऋषि कपूर की फिल्‍मों ने नायिकाओं को खूब जगह दी.

हीरो के रूप में उनकी पहली फिल्‍म बॉबी ने जितना ऋषि कपूर को उठाया, उससे कहीं ज्‍यादा शोहरत इस फिल्‍म ने उनकी नायिका डिंपल कपाड़िया को दी. प्राण और प्रेमनाथ जैसे भारी-भरकम कलाकारों वाली इस फिल्‍म का नाम ही हीरोइन के नाम पर था और यह नायिका प्रधान फिल्‍म सुपर डुपर हिट रही. इस तरह ऋषि कूपर का करियर ही एक तरह से नायिका प्रधान फिल्‍म से शुरू हुआ.




दामिनी फिल्‍म में अगर वे मीनाक्षी शेषाद्री को नायिका के तौर पर स्‍थापित कर रहे थे, तो अपनी आखिरी फिल्‍म मुल्‍क में तापसी पन्‍नू को एक आक्रामक नायिका की भूमिका में नया मकाम दे रहे थे. चांदनी में उनसे ज्‍यादा श्रीदेवी नजर आती हैं तो दीवाना में वे दिव्‍या भारती को स्‍थापित करते नजर आते हैं. यह भी कैसा संयोग है कि जिस तरह आज ऋषि कपूर अचानक चले गए उसी तरह दिव्‍या भारती और श्रीदेवी भी असामयिक मौत का शिकार हुई थीं.

हीरोइन को स्‍थापित करने के अलावा ऋषि कूपर ऐसे नायक भी रहे, जिन्‍होंने बड़ी संख्‍या में मल्‍टीस्‍टारर फिल्‍म कीं और कई फिल्‍मों में तो उनके साथ काम करके सहयोगी कलाकारों का जीवन ही बदल गया. दामिनी में नायक ऋषि कपूर थे, लेकिन पर्दे पर सन्‍नी देओल लोगों को आज तक याद हैं. इसी तरह दीवाना फिल्‍म में शाहरुख खान इंटरवल के बाद एंट्री करने के बावजूद दर्शकों के दिल पर छा जाते हैं. एक तरह से देखा जाए तो शाहरुख खान को असली स्‍टारडम तो ऋषि कपूर के साथ दीवाना में काम करने के बाद ही मिला. इसके अलावा अमिताभ बच्‍चन के साथ अमर अकबर एंथॉनी और कई फिल्‍मों में ऋषि कपूर छोटे भाई की भूमिका में नजर आए.

कोई और कलाकार होता तो इस तरह की भूमिकाएं करते हुए कहीं खो जाता, लेकिन ऋषि कपूर न सिर्फ जमे रहे, बल्कि अपनी खास पहचान के साथ विविध भूमिकाएं निभाते रहे. उन्‍हें कभी इस बात पर कुंठा नहीं हुई कि वे कैसे फिल्‍मों में नंबर दो की भूमिका में आ जाते हैं. दरअसल ऋषि कपूर उन कलाकारो में थे जो कला को स्‍टारडम से ऊपर समझते रहे. आज उनकी विदाई की बेला में जब लोग उनके योगदान को याद करेंगे तो अंत में यह जरूर कहेंगे कि वे नायिकाप्रधान फिल्‍मों के महानायक और भारतीय सिनेमा में महिलाओं की हिस्‍सेदारी बढ़ाने के एक बड़े कारक थे.

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