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जजों, वकीलों को पहले वैक्सीन लगाने की मांग को बॉम्बे HC ने 'स्वार्थपूर्ण' बताया, पूछा- टाइटैनिक फिल्म देखी है?

मुख्य न्यायाधीश दीपाकंर दत्ता और न्यायाधीश जीएस कुलकर्णी की बेंच मुंबई के वकीलों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.  (फाइल फोटो)

मुख्य न्यायाधीश दीपाकंर दत्ता और न्यायाधीश जीएस कुलकर्णी की बेंच मुंबई के वकीलों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. (फाइल फोटो)

Coronavirus Vaccination: पीठ ने कहा, "आपने टाइटैनिक फिल्म देखी है. आपको जहाज का कैप्टन याद है? उसे तब तक इंतजार करना होता है, जब तक कि सभी लोग जहाज से निकाल नहीं लिए जाते."

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 5:51 PM IST
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नई दिल्ली. बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए प्राथमिकता के आधार पर कोरोना टीकाकरण (Corona Vaccination) की मांग वाली याचिका सुनवाई स्थगित कर दी और कहा कि कुछ फैसले कार्यपालिका के ऊपर छोड़ दिए जाने चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा न्यायपालिका के लिए टीकाकरण की मांग करना स्वार्थपूर्ण लगता है. मुख्य न्यायाधीश दीपाकंर दत्ता और न्यायाधीश जीएस कुलकर्णी की बेंच मुंबई के वकीलों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में न्यायाधीशों, वकीलों और कर्मचारियों को फ्रंटलाइन कर्मचारी मानने और प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता वकील वैष्णवी घोलवे और योगेश मोरबले की ओर से विनोद पी. सांगविकर और यशोदीप देशमुख ने पिछले हफ्ते याचिका दायर की थी.

याचिकाकर्ता के वकील ने बुधवार को बेंच से कहा कि हाईकोर्ट महामारी के दौरान काम करता रहा, वकील, न्यायाधीश और कर्मचारियों ने भी अपना काम जारी रखा, बावजूद इसके कि उन्हें संक्रमण का खतरा था. इस पर बेंच ने याचिकाकर्ता को याद दिलाया कि सफाई कर्मचारियों और कई सारे प्राइवेट संगठनों के कर्मचारी भी महामारी के दरम्यान अपना काम जारी रखे हुए थे. बेंच ने कहा, "क्यों ना एक पीआईएल प्राइवेट संस्थाओं के कर्मचारियों और डब्बावालों के लिए दायर की जाए. इस तरह हर व्यक्ति फ्रंटलाइन कर्मचारी है. कुछ फैसले कार्यपालिका के ज्ञानबोध पर भी छोड़ दिए जाने चाहिए."

'बढ़िया काम कर रही है सरकार'
बेंच ने सवाल उठाते हुए कहा, "हमें बताइए कि नीतियों में कहां गड़बड़ी है. नीतिगत मामलों में कोर्ट तब तक हस्तक्षेप नहीं करती, जब तक कि नीतियों का उल्लंघन ना हो." देश में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम पर बेंच ने कहा कि सरकार बढ़िया काम कर रही है. कोर्ट ने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम में न्यायपालिका को प्राथमिकता देने का याचिकाकर्ताओं का मंतव्य स्वार्थपूर्ण प्रतीत होता है. पीठ ने कहा, "आपने टाइटैनिक फिल्म देखी है. आपको जहाज का कैप्टन याद है? उसे तब तक इंतजार करना होता है, जब तक कि सभी लोग जहाज से निकाल नहीं लिए जाते."
'मैं इस जहाज का कैप्टन हूं'


मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा, "पहले सबका टीकाकरण हो जाने दीजिए फिर न्यायपालिका का नंबर आएगा. मैं इस जहाज का कैप्टन हूं." केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस तरह के मामले देश के ज्यादातर हाईकोर्ट में पेंडिंग पड़े हैं. सिंह ने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. इसके साथ कोरोना वायरस वैक्सीन कोवॉक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सभी मामलों को शीर्ष कोर्ट में सुने जाने की गुजारिश की है.

'सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका'
इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वो नीतिगत मामलों पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करेगा, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट याचिकाओं को ट्रांसफर करने के मामले पर फैसला नहीं ले लेता है. हालांकि कोर्ट ने ये जरूर कहा कि सरकार जब भी न्यायपालिका से जुड़े लोगों को टीका लगाने का फैसला लेती है, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और अन्य वकीलों को ये सलाह जरूर देनी चाहिए कि कानूनी सेवाओं से जुड़े लोगों को पहले टीका लगाने पर विचार किया जाए.

17 मार्च को फिर सुनवाई
कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि 17 मार्च को इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करें कि एक व्यक्ति को गंभीर बीमारियों से पीड़ित होना साबित करने के लिए किस तरह के दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है, ताकि वैक्सीन लगवाई जा सके.

बता दें कि देश में मेडिकल स्टाफ और आवश्यक सेवाओं वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण चल रहा है, इसके साथ ही दूसरे चरण में 60 वर्ष से ऊपर के और 45 वर्ष से ज्यादा के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी वैक्सीन का टीका लगाया जा रहा है.
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