इलाज के लिए निजी अस्पताल में शिफ्ट किए जाएंगे स्टेन स्वामी, बॉम्बे HC का आदेश

सांकेतिक फोटो (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

सांकेतिक फोटो (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Bombay High Court: स्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई की अर्जी पर तत्काल सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की पीठ ने जेल प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि स्वामी को अस्पताल में भर्ती कराया जाए.

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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी एक्टिविस्ट स्टेन स्वामी को इलाज के लिए मुंबई के निजी अस्पातल में भर्ती कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने महाराष्ट्र में जेल अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा कि स्टेन को इलाज की आवश्यकता है, इसीलिए उन्हें 2 सप्ताह के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाए.

स्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई की अर्जी पर तत्काल सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की पीठ ने जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि स्वामी (84) को नवी मुंबई में स्थित जेल से उपनगर बांद्रा में होली फैमिली अस्पताल में दिन के वक्त ही भर्ती कराया जाए और इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाए.

अंतरिम जमानत देने का किया था अनुरोध

देसाई ने न्यायमूर्ति एस जे कथावाला की अगुआई वाली अवकाशकालीन पीठ से स्वामी को चिकित्सा सहायता और अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था. पीठ ने उस समय कहा था कि चिकित्सा जमानत के मुद्दे पर फैसला बाद में लिया जाएगा लेकिन स्वामी को इलाज के लिए मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है.
कई बीमारियों से जूझ रहे स्वामी वीडिया कांफ्रेंस के जरिए अदालत के समक्ष पेश हुए थे. उन्होंने यह कहते हुए जेजे अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था कि वह पहले भी दो बार वहां भर्ती हो चुके हैं लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली.


अस्पताल जाने के बजाय जेल में मरना पसंद करूंगी



आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता ने तब कहा था कि वह जेजे अस्पताल जाने के बजाय जेल में मरना चाहेंगे. बहरहाल, उच्च न्यायालय ने स्वामी को होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति दे दी. इससे पहले देसाई ने कहा कि इलाज का खर्च स्वामी और उनके सहायक उठाएंगे. उच्च न्यायालय ने कहा, टहमारा मानना है कि याचिकाकर्ता को 15 दिन के लिए होली फैमिली अस्पताल में इलाज कराने का विकल्प दिया जा सकता है. स्वामी इसका खर्च उठाएंगे.'

भीमा-कोरेगांव मामला क्या है?

महाराष्ट्र में पुणे के भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम हुआ. यलगार परिषद ने इस सम्मेलन का आयोजन किया. इस दौरान हिंसा भड़क उठी थी. भीड़ ने तमाम वाहन जला दिए थे. दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की गई थी. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई, कई लोग जख्मी हो गए. इस मामले में माओवादियों से संपर्क रखने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

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