Vaccination को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी, 'घर-घर टीकाकरण से बचाई जा सकती थीं जानें '

बॉम्बे हाईकोर्ट ने की वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर टिप्पणी.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने की वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर टिप्पणी.

देश में घर-घर जाकर कोरोना के टीकाकरण की मांग कई बार उठ चुकी है. इस बार बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र के टीकाकरण अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर कुछ समय पहले ही वरिष्ठ नागरिकों को घर-घर जाकर टीका दिया गया होता तो बहुत सी जानें बचाई जा सकती थीं. ये सवाल सुप्रीम कोर्ट भी पहले कर चुका है, जिस पर केंद्र सरकार ने विस्तृत और तार्किक जवाब पेश किया है.

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मुंबई. केंद्र के कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी दी है. कोर्ट ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार कुछ महीने पहले ही घर-घर जाकर सीनियर सिटीजंस को वैक्सीनेशन देती तो देश के जाने-माने लोगों समेत कई की जान बचाई जा सकती थी. ये टिप्पणी बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने की. कोर्ट ने ये भी कहा कि जब सवाल वैक्सीनेशन सेंटर नहीं पहुंच पाने वाले असमर्थ बुजुर्गों का है तो डोर टु डोर वैक्सीनेशन क्यों नहीं किया जा सकता? कोर्ट ने ये टिप्पणी वकील ध्रुति कपाड़िया और वकील कुणाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की. याचिका में 75 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों, विशिष्ट जनों और बिस्तर या व्हीलचेयर तक सीमित लोगों के लिए घर जाकर वैक्सीन देने के कार्यक्रम का आग्रह किया गया था.

22 अप्रैल के आदेश को भी दोहराया

कोर्ट ने 22 अप्रैल के अपने आदेश को दोहराया जिसमें केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह घर-घर जाकर टीकाकरण न करने के अपने फैसले पर एक बार और सोचे. अदालत की ओर से इस पर केंद्र से 19 मई तक शपथपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने उन देशों का उदाहरण भी दिया, जहां टीकाकरण कार्यक्रम घर-घर जाकर चलाया जा रहा है. याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि अगर डोर टु डोर वैक्सीनेशन हुआ होता तो मशहूर हस्तियों समेत अनेक वरिष्ठ नागरिकों की जान बचाई जा सकती थी. अदालत ने कहा कि उसने वैक्सीन सेंटर्स के बाहर लंबी-लंबी कतारों में लगे बुजुर्ग नागरिकों और व्हीलचेयर पर बैठे लोगों की तस्वीरें बेहद दुखदायी हैं. कोर्ट ने बीएमसी के टीकाकरण शिविर की जानकारी पर सुझाव दिया कि ऐसे शिविरों में उन लोगों की पहचान कर टीका लगाया जा सकता है जो घर से बाहर नहीं जा सकते. इसे लेकर कोर्ट ने बीएमसी से शपथपथ दायर करने के लिए भी कहा है.

केंद्र सरकार क्यों नहीं कर रही डोर टु डोर वैक्सीनेशन?
केंद्र से घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल किया था. कोर्ट ने पूछा था - 'क्या सरकार कोविड-19 टीकाकरण के लिए देशव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाने और लोगों का उनके घर पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण इलाकों और वंचित वर्गों तक मोबाइल वैन या रेलवे के जरिये पहुंचने की योजना बना रही है?' केंद्र इस पर 218 पन्नों का विस्तृत जवाब देते हुए बताया था कि वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत सीवीसी की चार प्रमुख जरूरतें हैं- पर्याप्त स्थान, पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधा, पर्याप्त संख्या में टीका लगाने वाले ,सपोर्टिंग मेडिकल स्टाफ और टीकाकरण के बाद किसी भी साइड इफेक्ट से निपटने के लिए प्रबंध. ऐसे में डोर टु डोर वैक्सीनेशन के दौरान वैक्सीन का तापमान बनाए रखने में परेशानी होगी. अगर वैक्सीन लगाने के 30 मिनट में साइड इफेक्ट को तो उसको मैनेज करना भी मुश्किल होगा क्योंकि एक घर में वैक्सीनेशन स्टाफ का 30 मिनट तक रुकना व्यावहारिक नहीं है और इसे अभियान में देरी भी होगी.

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