• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • तबलीगी केस: ओवैसी बोले- बीजेपी को बचाने के लिए जमात को बनाया गया बलि का बकरा

तबलीगी केस: ओवैसी बोले- बीजेपी को बचाने के लिए जमात को बनाया गया बलि का बकरा

असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है. (File Photo)

असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है. (File Photo)

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा, 'यह समयबद्ध निर्णय है. बीजेपी को आलोचना से बचाने के लिए मीडिया ने तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) को बलि का बकरा बनाया.

  • Share this:
    मुंबई. तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) ने  विदेशियों सहित कई लोगों के खिलाफ दायर एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है.  कोर्ट के इस फैसले के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने बीजेपी और मीडिया पर निशाना साधा है. ओवैसी ने कहा कि बीजेपी को आलोचना से बचाने के लिए मीडिया ने तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया.

    असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने ट्वीट किया, 'यह समयबद्ध निर्णय है. बीजेपी महामारी के संभावित खतरे को कम कर रही थी. बीजेपी को आलोचना से बचाने के लिए मीडिया ने तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया. इस प्रचार के परिणामस्वरूप पूरे भारत में मुसलमानों को भयानक घृणा अपराधों और हिंसा का सामना करना पड़ा.'



    29 विदेशियों के खिलाफ दायर की गई थी FIR
    बता दें 29 विदेशी लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC), महामारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, विदेशी नागरिक अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई थी और इसमें कहा गया गया था कि उन्होंने टूरिस्ट वीजा का उल्लंघन किया.  यह सभी लोग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और इसी आरोप में इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.

    हाईकोर्ट की औरंगबाद बेंच के जस्टिस टीवी नलवाड़े और जस्टिस एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने तीन अलग-अलग पीटिशन की सुनवाई की, जिसे आइवरी कोस्ट, घाना, तंजानिया, बेनिन और इंडोनेशिया जैसे देशों के लोगों ने दायर की थी. इन सभी याचिकाकर्ताओं को पुलिस ने कथित तौर पर गुप्त सूचना के आधार पर अलग-अलग मस्जिदों में रहने और लॉकडाउन के आदेशों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया था.

    औरंगाबाद पीठ से याचिकाकर्ताओं ने और क्या कहा?
    हाईकोर्ट की बेंच के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे भारत की सरकार द्वारा जारी वीजा पर भारत आए थे. यहां आने का मकसद था कि वे भारत की संस्कृति, आतिथ्य और भोजन का अनुभव करेंगे. उन्होंने अदालत को बताया कि हवाई अड्डे पर उनकी जांच की गई और जब वह निगेटिव पाए गए तब ही उन्हें बाहर आने दिया गया. उन्होंने दावा किया कि अहमदनगर के पुलिस अधीक्षक को आने की जानकारी दी थी. 23 मार्च को लॉकडाउन लगाए जाने के बाद गाड़ियों की आवाजाही बंद हो गई. होटल और लॉज बंद होने की वजह से उन्हें मस्जिद में रहना पड़ा. अदालत के समक्ष उन्होंने दावा किया वह किसी भी तरह से जिलाधिकारी के आदेश का उल्लंघन में संलिप्त नहीं थे और मरकज में भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया गया.

    'बलि का बकरा बनाया गया'
    औरंगाबाद पीठ की खंडपीठ ने पाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक मजबूरी के तहत काम किया और विदेशी नागरिकों के खिलाफ एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण माना जा सकता है. अदालत ने सभी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया. जस्टिस नलवड़े ने अपने फैसले में कहा कि जब महामारी या विपत्ति आती तो सरकार बलि का बकरा ढूढ़ने की कोशिश करती है और अभी के हालात बता रहे हैं कि इस बात के आसार हैं कि इन विदेशियों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज