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सुशांत सिंह राजपूत की बहन को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका, FIR रद्द करने से इनकार

सुशांत की बहनों की याचिका पर हुई सुनवाई. (File pic)
सुशांत की बहनों की याचिका पर हुई सुनवाई. (File pic)

Sushant singh Rajput Death case: हाईकोर्ट ने मीतू के खिलाफ दायर याचिका को रद करने का फैसला दिया है. जबकि बहन प्रियंका के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 15, 2021, 3:06 PM IST
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मुंबई. बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उनकी एक बहन को बॉम्‍बे हाईकोर्ट (Bombay High court) ने सोमवार को से झटका मिला है. एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर खारिज कराने के लिए सुशांत की बहनों मीतू (Mitu Singh) और प्रियंका (Priyanka Singh) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मीतू के खिलाफ दायर याचिका को रद करने का फैसला दिया है. जबकि बहन प्रियंका के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया है.

दिवंगत एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रहीं एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती ने पिछले साल सुशांत की दोनों बहनों मीतू सिंह और प्रियंका सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. इसमें उन्‍होंने आरोप लगाया था कि बहनों ने दिल्‍ली के एक डॉक्‍टर से मुलाकात की थी और सुशांत की मेंटल हेल्‍थ के बारे में बिना जानकारी किए दवाई का फर्जी पर्चा बनवाया था.

रिया ने आरोप लगाया था कि इसी सलाह से दी गई दवा के पांच दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई थी. रिया की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने 8 सितंबर, 2020 को प्रियंका सिंह, मीतू सिंह और डॉ. तरुण कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का शव 14 जून, 2020 को मुंबई स्थित उनके अपार्टमेंट में मिला था.



इससे पहले 3 फरवरी को ही सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में सीबीआई को स्‍टेटस रिपोर्ट दायर करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी. सीजेआई एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी सुब्रमण्यम की पीठ ने वकील पुनित कौर ढांडा की याचिका खारिज कर दी थी. पीठ ने कहा था, 'हम इसे नहीं देखने जा रहे हैं. आप उच्च न्यायालय जाइए.'

याचिकाकर्ता ने कहा था कि उच्चत्म न्यायालय ने 19 अगस्त 2020 को सीबीआई जांच के लिए आदेश दिया था और लगभग पांच महीने का समय बीतने के बावजूद जांच एजेंसी अभी जांच पूरी नहीं कर पाई है.
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