बूंद-बूंद को तरसता चेन्नई, पानी पी जा रहा पूरी सैलरी, कुएं पर लग रहा लॉटरी से नंबर

चेन्नई की सड़कों पर इन दिनों वाटर टैंकरों के सामने लंबी कतारें लगी दिख रही हैं. वहीं कुंवों से पानी निकालने के लिए लॉटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 12:19 PM IST
बूंद-बूंद को तरसता चेन्नई, पानी पी जा रहा पूरी सैलरी, कुएं पर लग रहा लॉटरी से नंबर
चेन्नई में कई होटल ने ताला लगा लिया है. रेस्टोरेंट में मेन्यू से लंच के आइटम गायब हो गए हैं.
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Updated: June 19, 2019, 12:19 PM IST
चेन्नई मेट्रो सिटी में रहने वाली एम शेषाद्रि ने 17 मई को राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त एक वाटर-सप्लायर के यहां एक वाटर टैंकर की बुकिंग की थी. अब यह बुकिंग किए हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लेकिन 68 वर्षीय एम शेषा‌द्रि अब भी अपनी पानी की टंकी के आने का इंतजार कर रहे हैं. इतना ही अपनी वाटर टैंकर पाने के लिए वो अब तक वल्लुवर कोट्टम स्थिति वाटर ब्रांच के 10 से ज्यादा चक्कर भी लगा चुके हैं, लेकिन भी अब उनको कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है कि कब उन्हें पानी की टंकी मिल जाएगी.

पानी ना मिलने से होने वाली दुर्दशा के चलते अब यह वरिष्ठ नागरिक परेशानियों की सुनामी से घिर गए हैं. बहरहाल, यह चेन्नई में रहने वाले एक बुजुर्ग की कहानी नहीं है. पानी की किल्लत से जूझ रहे चेन्नई मेट्रो के हर घर में कमोबेस यही हालत है. इस साल पानी की किल्लत की एक खास बात यह भी है कि इसने आम नागरिकों के साथ कॉर्पोरेट जगत के लोगों को भी बराबर परेशान कर रखा है.

हाल ही में चेन्नई स्थित कई आईटी कंपनियों ने पानी ना होने के चलते अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम करने को कहा. इतना ही नहीं शहर में स्थित कई गेस्ट हाउस और होटलों ने यात्रियों की बुकिंग लेने से इनकार कर दिया है. उनके पास इतना भी पानी नहीं है कि होटल में आने वाले मेहमानों की जरूरत भर की पानी की आपूर्ति कर दें. कई रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू से दोपहर के खानों को हटा दिया है. वे अब महज ऐसे खाने परोस रहे हैं, जिनमें पानी ना के बराबर इस्तेमाल होता हो.

protest for water crises
पानी की किल्लत को लेकर चेन्नई के लोगों ने पीएम मोदी की तमिनाडु की यात्रा के दौरान प्रदर्शन भी किया था.


25 दिन से कम नहीं पहुंच पा रहे लोगों तक वाटर टैंकर
इन दिनों चेन्नई की सड़कों पर वाटर टैंकरों के सामने लंबी कतारें और लॉटरी सिस्टम से कुंवों से पानी निकालने के लिए लगी कतारों को देख सकते हैं. चेन्नई की मौजूदा परिस्थितियों में लोग अपनी दिनचर्या के कामों के लिए वाटर टैंकर बुक करने के लिए मजबूर हैं. लेकिन लोगों की बुक की हुई वाटर टैंकर पहुंचने में भी 25 दिन से कम नहीं लग रहे हैं.

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20 हजार रुपये की सैलरी बस पानी पर बहा रहे हैं हुसैन
चेन्नई के टीनमपेट क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद हुसैन कहते हैं, 'मैं एक अस्पताल में काम करता हूं. हर महीने 20 हजार रुपये कमाता हूं. इसके अलावा मुझे परिवार का बड़ा सपोर्ट है, क्योंकि मेरी सैलेरी तो बस पानी खा जाती है. बल्कि कई बार तो मेरी सैलेरी से ज्यादा पैसे पानी खरीदने पर खर्च करने पड़ते हैं.'

700 वाले वाटर टैंकर के बदले वसूले जा रहे हैं 4000 रुपये
चेन्नई में अभी वाटर टैंकरों का आलम ये है कि सरकारी वाटर सप्लायरों की कोई गारंटी नहीं है कि वे पानी टैंकर महीने भर में पहुंचा ही देंगे. इसके अलावा जो प्राइवेट वाटर सप्लायर हैं वे भी 15 दिन से पहले वाटर टैंकर पहुंचाने में समर्थ नहीं हैं. ब‌ल्कि जो 9000 लीटर की वाटर टैंकर आमतौर पर 700 से 900 रुपये में मिला करता था, उसी टैंकर के लिए प्राइवेट वाटर सप्लायर लोगों से 4000 से 5000 रुपये तक वसूल रहे हैं. इसके बाद भी वो लोगों से कम से कम दो सप्ताह का इंतजार करने को कह रहे हैं.

 protest for water in chennai in the front of pm modi
पीएम मोदी के सामने पानी की समस्या को बयां करने के लिए लोगों ने प्रर्दशन का रास्ता चुना था.


घर के बजट में शामिल हो गया है पानी का खरीदने का खर्च
चेन्नई में ‌इन दिनों मिडिल क्लास फैमिली और कम आय वाले परिवारों के लिए पानी के ऊपर होने वाला खर्च एक बड़ी चुनौती हो गया है. यहां तक कि वे अपने महीने के बजट में पानी के खर्च को बजट का हिस्सा बनाने को बाध्य हो गए हैं.

कितनी है चेन्नई में पानी की डिमांड
आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार चेन्नई में प्रतिदिन 95 करोड़ लीटर पानी की मांग है. लेकिन शहर में सरकारी पानी की सप्लाई 75 करोड़ लीटर की ही हो पा रही है. ऐसे में करीब 20 करोड़ लीटर पानी रोजाना प्राइवेट टैंकरों से की जा रही है. इससे लोगों की जेब खाली हो रही है.

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First published: June 19, 2019, 11:28 AM IST
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