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जब रतन टाटा के प्लेन का इंजन फेल हो गया.. लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को सुरक्षित उतारा

जब रतन टाटा के प्लेन का इंजन फेल हो गया.. लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को सुरक्षित उतारा

रतन, जेआरडी की ही तरह एक जोशीले फिक्सड विंग पाइलट हैं.(Photo-Twitter/@RNTata2000)

रतन, जेआरडी की ही तरह एक जोशीले फिक्सड विंग पाइलट हैं.(Photo-Twitter/@RNTata2000)

रतन की उड़ान से जुड़ी हुई कहानियों का सिलसिला रुकता नहीं है. वो बताते हैं कि मैं दो बार ऐसे प्लेन में था जिसका इंजन खराब पड़ गया था. वो एक इंजन का प्लेन था, तो मुझे उसे ग्लाइड करवाना था. पहली बार मुझे सर्किट करते हुए नीचे उतरना था इसिलए वो आसान था लेकिन दूसरी बार में, मैं अपने तीन दोस्तों के साथ था. और कॉरनेल के आसपास, एयरपोर्ट से करीब 9 मील की दूरी पर उड़ान भर रहे थे.

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    रतन टाटा अपने सत्तरवें साल के उत्तरार्ध में थे, जब उन्होंने ये बात कही थी. ‘आपको पता है कार मेरी दीवानगी है और उतनी ही दीवानगी से  मुझे प्लेन खरीदने में है. या हेलीकॉप्टर, इसमें मुझे कम दूरी तक जाने में एक आज़ादी का अहसास होता है. इसलिए मैं रॉबिनसन के बारे में सोच रहा हूं.’ रॉबिनसन हेलीकॉप्टर कंपनी, टॉरेंन्स, कैलिफोर्निया, ये कंपनी छोटे कॉरपोरेट रोटरी-विंग एयरक्राफ्ट के तीन मॉडल की निर्माता है.

    रतन, जेआरडी की ही तरह एक जोशीले फिक्सड विंग पायलट हैं. रतन लाइसेंसधारी पायलट हैं. जो अक्सर निजी तौर पर कंपनी का डसॉल्ट फाल्कन 2000 बिजनेस जेट उड़ाते हैं. लेकिन बीते दिनों उनकी हेलीकॉप्टर में दिलचस्पी फिर से जागी है जबकि उनके उड़ान के अनुभव कुछ खासे अच्छे नहीं रहे.

    वो कॉलेज के दिनों में हेलीकॉप्टर उड़ाने के दौरान उसके इंजन फेल हो जाने की कहानी सुनाते हैं. वह कहते हैं, “मेरे हेलीकॉप्टर का इंजन खराब हो गया था. और ये हेलीकॉप्टर का एकमात्र इंजन था.” उन्होंने बहुत ही शांत भाव से कहा.. “और मैं अभी भी यही हूं… मैं पानी के ऊपर था. मैंने बस उसे ज़मीन के सिरे पर टिकाया था.”

    जब उनसे पूछा गया कि क्या वो उनका मौत का सबसे करीबी अनुभव था, तो उन्होंने कहा, “नहीं मुझे नहीं लगता कि वो मौत के करीब का मामला था. वो बिल्कुल सच्चे पायलट की तरह जवाब देते हैं. मैं ये नहीं कह सकता कि इंजन खराब हो गया था, मुझे लगता है कि हुआ क्या होगा, कि फ्यूल टैंक में पानी घुस गया होगा, इसलिए इंजन बंद पड़ गया फिर वो अचानक चालू हो गया और फिर बंद चालू होता रहा. मैं इंजन का पॉवर वापस लाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि मुझे इस बात की चिंता थी कि हम जल्दी ही अनियंत्रित होने वाले थे. और मैं उसे गिरा सकता था जो मुझे दिख रहा था, इसलिए मैंने उसे ज़मीन पर उतार लिया.”

    लेकिन रतन की उड़ान से जुड़ी हुई कहानियों का सिलसिला रुकता नहीं है. वो बताते हैं कि मैं दो बार ऐसे प्लेन में था जिसका इंजन खराब पड़ गया था. वो एक इंजन का प्लेन था, तो मुझे उसे ग्लाइड करवाना था. पहली बार मुझे सर्किट करते हुए नीचे उतरना था इसलिए वो आसान था लेकिन दूसरी बार में, मैं अपने तीन दोस्तों के साथ था. और कॉरनेल के आसपास, एयरपोर्ट से करीब 9 मील की दूरी पर उड़ान भर रहे थे. सौभाग्य से हमारे लिए, रतन और उनके दो साथियों ने जो उस दुर्घटना के दौरान उनके साथ थे, आने वाली पीढ़ी के लिए उस दुर्घटना का चित्रण एक वीडियो साक्षात्कार के तौर पर संरक्षित किया था. इस साक्षात्कार के जरिए उनके बारे में बहुत कुछ पता चलता है.

    रतन के कॉरनेल के सहपाठी मोइज बेन्चौम शुरुआत करते हुए बताते हैं- “मुझे वो दिन अच्छी तरह से याद है., हम लोग अपने ड्राफ्टिंग रूम में अपना आर्किटेक्ट का प्रोजेक्ट तैयार कर रहे थे, तभी रतन ने कहा कोई है जो ब्रेक चाहता हो, आओ मैं थोड़ा हवा की सैर करवा कर लाता हूं. चार्ली ग्रीन, नान ओट्टेसन और मैंने उनका ये प्रस्ताव तुरंत मान लिया और जल्दी ही हम लोग कायुगा के पानी के ऊपर मौजूद थे, वहां से दिखाई दे रहे नज़ारे लाजवाब थे और हम एक किराये के ट्राइ पेस सिंगल इंजन प्लेन से उसके मजे ले रहे थे.”

    नान्ट्टे ओट्टेसन – मो (मोइज) और मैं पिछली सीट पर बैठे हुए थे और चार्ली को-पायलट की सीट संभाले हुए थे, जब हम साइब्ली के ऊपर पहुंचे, टाटा ने कहा, वो डोम देखो, वो रहा साइब्ली डोम, हमें वहां पर होना चाहिए.

    रतन टाटा – और अगले ही पल, ऐसा लगा जैसे पूरा प्लेन हिलकर बिखरने वाला है, और फिर प्रॉप रुक गया. मुझे अहसास हो गया था कि इंजन बंद पड़ गया है. प्लेन के बाहर मौत की शांति थी और प्लेन के अंदर भी वही माहौल बन गया था.

    मोइज बेन्चोम- मुझे तो पता हीं नहीं था कि आखिर हो क्या रहा था, मैंने बस इतना देखा कि रतन लीवर को घुमा रहा है और प्लेन को काबू में लाने की कोशिश कर रहे थे. और जब मैंने आगे झुक कर देखा कि क्या चल रहा है, मुझे प्रोपेलर नजर आया. मेरे होश ही उड़ गए.

    रतन टाटा- मैंने फैसला किया कि मुझे जो कोई भी पहली जगह दिखी मैं वहीं पर लैंड करने की कोशिश करूंगा, वो एक स्टेडियम की प्रैक्टिस फील्ड थी., और तभी मुझे अहसास हुआ कि वहां पर लोग फुटबॉल खेल रहे थे और अगर मैं वहां गया तो मैं सबको मार दूंगा. क्योंकि हमारे प्लेन से किसी तरह की कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. फिर मैने फैसला किया कि मैं एयरपोर्ट पर उतारने की कोशिश करता हूं.

    मोइज बेन्चोम- मुझे याद है रतन हमारी तरफ मुड़े और उन्होंने कहा कि हम एयरपोर्ट के रनवे पर फोर्स लैंडिग करने के हिसाब से काफी ऊंचाई पर हैं. मैं नान की तरफ मुड़ा, वो अपनी सीट में घुसा जा रहा था, मुझे डर नहीं लगा, मैं बस देखना चाहता था कि रतन क्या करने जा रहे हैं.

    नेनेट्टे ओट्टेसन- और फिर मैंने उनका मे डे कॉल सुना और मैं जानता था कि हम मुसीबत में पड़ चुके हैं. और तभी अचानक मैंने देखा कि पेड़ों की एक कतार सामने हैं, मैंने मो बेन्चोम को देखा और उसने मेरी तरफ देखा, लेकिन हमारे मुंह से कोई शब्द नहीं निकला, यहां तक की चार्ली भी चुप था. मुझे यकीन था कि हम इन पेड़ों से टकरा जाएंगे, तभी अचानक हम नीचे आ गए और हम एयरपोर्ट पर थे. ये किसी चमत्कार से कम नहीं था.

    रतन टाटा- और मैंने प्लेन को एयरपोर्ट पर उतार दिया था, लेकिन वो एयरपोर्ट का रॉन्ग साइड था और मैं जानता था कि वहां पर दूसरी तरफ से मोहॉक एयरलाइन प्लेन आते रहते हैं. इसलिए मैंने अपनी लाइट चमकाना शुरू किया और लैंड कर लिया. और वो शायद मेरी बेहतरीन लैंडिग थी, हम टैक्सीवे की तरफ थे. रनवे से अलग हटते ही सभी प्लेन से बाहर निकले और प्लेन को धक्का देने लगे, क्योंकि उसमें कोई इंजन नहीं था और हमारे पीछे बड़ा सा मोहॉक प्लेन चला आ रहा था. वो हमें रास्ते से हटाने की कोशिश में लगा हुआ था, क्योंकि उसे चक्कर लगाकर वापस आना था.

    मोइज बेन्चौम- रतन ने कंट्रोल टॉवर के शख्स से पूछा कि आपने हमारे कॉल का जवाब क्यों नहीं दिया. और उस शख्स ने कहा कि वो कोक पीने चला गया था. फिर वो उसके पास गए जिससे उन्होंने प्लेन किराए पर लिया था और उससे कहा कि अगर उन्हें अपना प्लेन चाहिए तो उन्हें उसे रनवे से लाना होगा, और उस शख्स ने बस इतना कहा, कायुगा झील में मछली मारने से तो अच्छा ही है. कई सालों तक वो छेद वाला पिस्टन मेरी डेस्क पर रहा, वो मेरे लिए किसी यादगार खजाने से कम नहीं था.

    नान ओट्टेसन कहते हैं, हम टाटा के उस शांत स्वभाव के आभारी हैं जिसकी वजह से उस हालात में भी हम नीचे आ पाए. और मैं उनका बहुत शुक्रगुजार हूं.

    रतन अमेरिका की आजादी को छोड़ने के इच्छुक नहीं थे लेकिन उन्हें सर्दी में रहने की आदत नहीं थी, वो हमेशा शिकायत करते थे कि वो ऐसे ठंडे माहौल में दोबारा लौट कर कभी नहीं आएंगे, जैसे ही उनका कोर्स पूरा हुआ उन्होंने इलाका छोड़ दिया लेकिन भारत आने के बजाए वो लॉस एंजेल्स चले गए. जहां उन्होंने अपनी आर्किटेक्चर की डिग्री की बदौलत नौकरी पा ली, और धीरे धीरे वो एक अमेरिकी आर्किटेक्ट के तौर पर स्थापित हो गए. उनका भारत लौटने का कोई इरादा नहीं था. हालांकि उनकी दादी नवाजबाई बुरी तरह से बीमार पड़ी तो उन्होंने उन्हें बुला लिया. वो उन्हें इनकार नहीं कर सके और भारत लौट आये, उनके पीछे पीछे उनकी एक अमेरिकी गर्लफ्रेंड भी आई लेकिन कुछ बात नहीं बनी, नवाजबाई बच तो गईं लेकिन उनका स्वास्थ्य दिन पर दिन बिगड़ता गया और रतन को पता ही नहीं चला कि वो कब भारत के होकर रह गए.

    सगाई के कार्ड छपने से पहले ही टूट गया रिश्ता
    आगे के जीवन में रतन ने अपनी चार गर्लफ्रेंड्स के बारे में बताया जिनके साथ उनके रिश्ते गंभीर थे और एक बार बात सगाई तक भी आ पहुंची थी लेकिन कार्ड छपने से पहले ही रिश्ता टूट गया. उन्होंने कभी शादी नहीं की, एक साथी और बच्चों के बिना क्या बात है जो उन्हें प्रोत्साहित करती है, इसे लेकर कई सालों तक अनुमान लगाए जाते रहे. जो नाता वो अपनी दादी नवजाबाई के साथ महसूस करते थे वो काफी सशक्त था और इसी ने उन्हें लॉस एंजेल्स छोड़कर भारत लौटने पर विवश किया. और कुछ समय के बाद उन्होंने खुद को टाटा संस्था के साथ काम के लिए राजी कर लिया. ये उनके कुछ भावुक फैसलों में से एक था. शायद उनके माता-पिता का दुखद मिलन उन्हें शादी से दूर रखता रहा और इसलिए वह इतने शर्मीले स्वभाव के रहे.

    वो क्या था जिसने रतन को अमेरिका छोड़कर भारत में टाटा संस्थान में काम करने के लिए प्रेरित किया. एक बार उन्होंने कहा था कि अगर मेरे पास वैचारिक चुनाव होता तो मैं भारत के लोगों के उत्थान के लिए कुछ करना चाहूंगा, मुझे पैसा कमाने की उतनी तीव्र इच्छा नहीं है जितना ऐसी जगह खुशी पैदा करना जहां पर वो मौजूद नहीं है.

    (This excerpt from The Story of Tata: 1868 to 2021 by Peter Casey has been published with permission of Penguin Random House India.)

    Tags: Aeroplane, Ratan tata

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