गुरमीत राम रहीम के करतूतों की कहानी बयां करती है यह किताब

भाषा
Updated: April 25, 2018, 5:54 PM IST
गुरमीत राम रहीम के करतूतों की कहानी बयां करती है यह किताब
गुरमीत राम रहीम

किताब में साल 2007 से गुरमीत के नेतृत्व वाले डेरा सच्चा सौदा में शुरू हुई आपराधिक गतिविधियों के के बारे में बताया गया है. जिसमें कथित तौर पर हत्याएं, यौन उत्पीड़न, निजी सेना, हथियार और अफीम का अवैध कारोबार और जमीन हड़पने के मामले शामिल हैं.

  • Share this:
कभी अपने रौबदार जीवनशैली के लिए जाने जाने वाले गुरमीत राम रहीम को उसके लाखों भक्त भगवान मानते रहे हैं. भक्तों अलावा राजनीति के गलियारे में भी उनकी खूब पैठ थी. लेकिन अब दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे राम रहीम को उनके साथी ‘कैदी’ संख्या 1997 के नाम से जानते हैं.

गुरमीत राम रहीम के जीवन पर लिखी किताब बाजार में आने वाली है. जिसमें उनके जीवन के वो सच लिखे गए हैं जो शायद ही कोई जानता हो. इस किताब को लिखा है अनुराग त्रिपाठी ने और इसका नाम ‘डेरा सच्चा सौदा एंड गुरमीत राम रहीम: ए डिकेड लॉन्ग इन्वेशटिगेशन’ रखा गया है.

किताब में साल 2007 से गुरमीत के नेतृत्व वाले डेरा सच्चा सौदा में शुरू हुई आपराधिक गतिविधियों के संबंध में त्रिपाठी द्वारा की गई खोजी पत्रकारिता की कहानी है. गुरमीत के उभार की कहानी में कथित तौर पर हत्याएं, यौन उत्पीड़न, निजी सेना, हथियार और अफीम का अवैध कारोबार और जमीन हड़पने के मामले शामिल हैं.

त्रिपाठी ने इस किताब में तर्क के साथ बताया है कि डेरा के पहले दो प्रमुखों से राम रहीम का दर्शन मेल नहीं खाता क्योंकि वो अध्यात्म से कोसों दूर था. राम रहीम खुद को शक्तिशाली बनाने पर केंद्रित था. उन्होंने बताया कि गुरमीत ने अपना एक अलग साम्राज्य स्थापित करने के उद्देश्य से धन इकट्ठा करने के लिए अपने श्रद्धालुओं के मन-मस्तिष्क को चालाकी से बहलाना-फुसलाना शुरू किया.

लेखक ने कहा, ‘‘गुरमीत ने अपने भक्तों को यह कहना शुरू किया कि अगर वह परमसत्ता से सीधे तौर पर जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें अपने दुनियावी संपत्तियों को डेरा को देना होगा, इसमें अपनी जमीनों को दान में देना भी शामिल था. कई भक्तों ने इस चक्कर में आकर अपनी संपत्तियां डेरा को दे दी.’’

उन्होंने बताया कि वहीं डेरा ने इन जमीनों को ऊंचे दामों में बेचकर जो पैसे हासिल किए उससे सिरसा में और अधीक जमीनें खरीदी. जैसे-जैसे गुरमीत की संपत्ति बढ़ती गई उसने अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए एक निजी सेना बनाने पर गौर किया.

किताब में बताया गया है कि साल 2000 की शुरुआत में डेरा प्रमुख ने इस विचार को सेना के उन दिग्गजों के साथ साझा किया, जो डेरा भक्त थे. इस संबंध में ब्लूप्रिंट तैयार किया गया और इस उद्देश्य से भर्तियां शुरू की गई.
Loading...

आगे लिखा है कि ‘डेरा मिलिशिया में तीन विंग थे. आंतरिक विंग का काम गुरमीत को काफी नजदीक से सुरक्षा देना था. इस विंग की जिम्मेदारी थी कि वह संकट के समय घटनास्थल से गुरमीत को बाहर निकाले. वहीं संकट के समय डेरा प्रमुख को सुरक्षित शिविर में स्थानांतरित करने के बाद सुरक्षा का बाहरी घेरा बनाना दूसरे विंग का काम था. इसके बाद तीसरे विंग का काम डेरा के सभी जगहों पर नजर रखना और संकट के समय किसी को भी डेरा में प्रवेश देने से रोकना था’

ये भी पढ़ेंः

ये हैं फर्जी बाबा...जिन पर हैं रेप से लेकर हत्या तक के मामले

सिरसा हिंसा मामला: पुलिस ने की लोगों से जांच में सहयोग की अपील

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 25, 2018, 5:54 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...