भारतीय वायुसेना बनेगी और ताकतवर, 2022 तक रुद्रम मिसाइल भी बेड़े में होगी शामिल

एंटी रेडिएशन मिसाइल (Anit Radiation Missile) की तकनीक आधुनिक है जो बहुत कम देशों के पास है. (सांकेतिक तस्वीर)
एंटी रेडिएशन मिसाइल (Anit Radiation Missile) की तकनीक आधुनिक है जो बहुत कम देशों के पास है. (सांकेतिक तस्वीर)

इस मिसाइल (anti-radiation missile Rudram) के वायुसेना में शामिल होने के साथ दुश्मनों के रडार और सविलांस सिस्टम को ध्वस्त करने की क्षमता और भी ज्यादा घातक हो जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2020, 10:40 PM IST
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नई दिल्ली. देश की पहली एंटी-रेडिएशन मिसाइस रुद्रम (anti-radiation missile Rudram) 2022 तक भारतीय वायुसेना के बेडे़ में शामिल की जा सकती है. इस मिसाइल के वायुसेना में शामिल होने के साथ दुश्मनों के रडार और सविलांस सिस्टम को ध्वस्त करने की क्षमता और भी ज्यादा घातक हो जाएगी. हिंदुस्तान टाइम्स पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक यह बात अधिकारियों ने बताई है.

DRDO ने किया तैयार
रुद्रम मिसाइस भारत में ही बनाई गई है. इसे डिफेंस रिसर्च एंड एनालिसिस ऑर्गेनाइजेशन ने भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किया है. बीते 9 अक्टूबर को DRDO ने इसका सफल परीक्षण किया था. पिछले कुछ समय से चल रहे कई सैन्य परीक्षणों में यह भी एक अहम परीक्षण है जो वर्तमान भारत-चीन (India-china) सीमा विवाद के लिहाज से देखा जा रहा है. पूरी तरह से स्वदेश में विकसित यह नई पीढ़ी की मिसाइल भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ाएगी.

दुश्मनों की वायु सुरक्षा पर काबू करना उद्देश्य
इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना की हवा में वर्चस्व और रणनीतिक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है. इसका प्रमुख कार्य दुश्मन की वायु सुरक्षा को काबू (Suppression Of Enemy Air Defenses, SEAD) करना है. यह हवा से जमीन पर मार करने वाली नई पीढ़ी की एंटी रेडिशयन मिसाइल (NGARM) है जिसका काम दुश्मन देश की राडार जैसी मिसाइल की पहचान करने वाली तकनीक को बेकार करते हुए लक्ष्य पर सटीक वार करना है.



इस मिसाइस की रेंज 100 किमी से 150 किमी तक की है. लेकिन यह ऊंचाई के साथ और ज्यादा हो सकती है. इसे 500 मीटर से लेकर 15 किलोमीटर तक की ऊंचाई से लॉन्च किया जा सकता है और 250 किमी दूर तक के लक्ष्यों को भी सटीकता से भेदने में सक्षम है. इस वजह से भारत और चीन के बीच तनाव के बीच यह मिसाइल बहुत ही उपयोगी हो जाती है.

GPS/NAVIC सैटेलाइट गाइंडेंस भी शामिल
इसमें मिलीमीटर वेव सीकर (Seeker) की सुविधा है जो 30 गीगाहर्ट्ज और उससे ऊपर की फ्रीक्वेंसी से ट्रांसमिशन कर सकता है. उड़ान के दौरान दिशाओं की जानकारी के लिए इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के साथ ही GPS/NAVIC सैटेलाइट गाइंडेंस भी शामिल है. इसका पैसिव होम हेड (PHH) सीकर 100 किलोमीटर दूर तक के रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन को पकड़ सकता है. जिसमें रेडिएशन उत्सर्जन की पहचान करने वाली मोनोलिथिक माइक्रोवेस इंटीग्रेटेड सर्किट का उपोयग किया गया है
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