चेन्‍नई में फंसे थे 7 वर्कर, फ्लाइट बुक कर बॉस खुद आए वाराणसी में घर छोड़ने, सैलरी भी दी

चेन्‍नई में फंसे थे 7 वर्कर, फ्लाइट बुक कर बॉस खुद आए वाराणसी में घर छोड़ने, सैलरी भी दी
वाराणसी के 7 वर्कर चेन्‍नई में फंसे थे. (file Pic)

कंपनी में काम करने वाले ये सातों कामगार (Stranded Workers) पहली बार विमान पर सवार हुए और सोमवार को वाराणसी हवाई अड्डे पर उतरे.

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चेन्नई. कोरोना वायरस के संक्रमण (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से चेन्नई में फंसे उत्तर प्रदेश के सात कामगार घर लौटने को व्याकुल थे. कामगारों की इस व्याकुलता को नियोक्ता ने समझा और मानवता की मिसाल पेश करते हुए विमान से उनकी वापसी की व्यवस्था की.

पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी में काम करने वाले ये सातों कामगार पहली बार विमान पर सवार हुए और सोमवार को वाराणसी हवाई अड्डे पर उतरे. लॉकडाउन के बाद मजदूरों की पैदल हृदय-विदारक यात्रा की तस्वीरों के बीच इन मजदूरों के लौटने की घटना थोड़ी राहत देती है. 23 से 37 वर्ष उम्र के कामगार अपने बॉस की वजह से इंडिगो के विमान से वाराणसी पहुंचे.

वाराणसी विमान से उतरने पर सात कामगारों के समूह में शामिल संजय कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, 'हमारे मालिक ने अपने परिवार की तरह हमारी देखभाल की. उन्होंने आटा, दाल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई ताकि लॉकडाउन के दौरान हम अपना खाना खुद बना सकें. उन्होंने हमें वेतन भी दिया.'



चार साल पहले जैन पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी शुरू करने वाले संदीप जैन ने तीन अन्य कर्मचारियों को रेलगाड़ी के जरिये उनके घर भेजा है. जैन ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, 'वे मेरी सफलता के लिए काम करते हैं. इसलिए संकट के समय में उनके घर तक भेजने के लिए कुछ पैसे खर्च करने में मैं कुछ भी गलत नहीं मानता.' उन्होंने बताया कि उनके कामगार जिंदगी में पहली बार विमान पर सवार हुए हैं.
विमान से भेजे गए सभी सातों कामगार प्रयागराज जिले के हैं और जैन ने उनके मुफ्त में रहने और खाने की भी व्यवस्था की थी. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान दो महीने का वेतन दिया गया और रहने खाने और टिकट आदि पर चार लाख रुपये का खर्च आया.

जैन ने कहा, 'लॉकडाउन के कारण लगी पाबंदी की वजह से वे दो महीने से कमरे में बंद थे और टीवी पर कोरोना वायरस की महामारी की खबरों को देखकर परिवार को लेकर चिंतित थे. मेरे कामगारों ने घर लौटने की इच्छा जताई.' उल्लेखनीय है कि जब जैन तीन साल के तो उनके माता-पिता राजस्थान से चेन्नई आकर बस गए थे.

कामगारों की इच्छा जानने के तुरंत बाद उन्होंने 22 मई को इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान में उनके के लिए सात टिकटों की बुकिंग की. जैन सोमवार को खुद अपने कर्मचारियों को छोड़ने के लिए हवाई अड्डे पर गए.

जैन ने कहा, 'कोई काम नहीं होने और कोरोना वायरस की वजह से उत्पन्न भय की वजह से वे अपने घर जाकर परिवार के साथ रहना चाहते थे. जब सरकार ने विमानन क्षेत्र को खोला तो मैंने उनके लिए विमान के टिकटों की बुकिंग की.' कामगारों ने भरोसा दिया कि स्थिति सुधरने पर वे वापस लौटेंगे. वाराणसी पहुंचने पर कामगारों ने जैन को फोन किया और उन्हें धन्यवाद दिया.

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