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क्या इंटेस्टाइन बीमारी के इलाज से कम हो सकता है कोरोना टीके का असर, जानें क्या कहता है रिसर्च

क्या इंटेस्टाइन बीमारी के इलाज से कम हो सकता है कोरोना टीके का असर, जानें क्या कहता है रिसर्च

असम के तेजपुर में एक महिला स्वास्थ्यकर्मी को कोरोना टीका देती एक नर्स. (पीटीआई फाइल फोटो)

असम के तेजपुर में एक महिला स्वास्थ्यकर्मी को कोरोना टीका देती एक नर्स. (पीटीआई फाइल फोटो)

India Coronavirus Vaccine: अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि टीएनएफ रोधी दवाएं ले रहे लोगों को कोविड रोधी टीके की दूसरी खुराक प्राथमिकता के आधार पर लगवानी चाहिए.

    नई दिल्ली. आंत रोग के इलाज के लिए आम तौर पर सुझाई जाने वाली दवा खा रहे लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे कोविड रोधी टीके की पहली खुराक के बाद कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित हो गए हैं. अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऐसे अनेक लोगों में टीकाकरण के बाद बननेवाली एंटीबॉडी की संख्या कम रही. पत्रिका जीयूटी में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में ऐसे 865 लोगों का जिक्र किया गया जो ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) रोधी ‘इन्फिलिक्सिमैब’ दवा ले रहे हैं. इन लोगों में फाइजर/बायोएनटेक या ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका के कोविड रोधी टीके लगाने के बाद एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देखी गई.


    इंपीरियल कॉलेज लंदन और ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के अनुसंधानकर्ताओं के अनुरूप टीएनएफ रोधी दवा रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी बीमारियों का प्रभावी उपचार है. उन्होंने कहा कि हालांकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर किए जाने से टीके का प्रभाव कम हो सकता है और गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. अध्ययन से जुड़ी टीम ने पाया कि जब ‘इन्फिलिक्सिमैब’ लेनेवाले लोगों से वैकल्पिक उपचार के तौर पर ‘वेडोलिजुमैब’ दवा लेनेवाले 428 लोगों की तुलना की गई, तो ‘इन्फिलिक्सिमैब’ लेनेवाले लोगों के शरीर में एंटीबॉडी की सांद्रता महत्वपूर्ण रूप से कम मिली.



    अध्ययन रिपोर्ट के सह-लेखक निक पॉवेल ने कहा कि यह सच में काफी महत्वपूर्ण अध्ययन है जिससे पता चलता है कि टीएनएफ दवा खाने वाले लोगों में कोविड रोधी टीके की पहली खुराक रक्षात्मक एंटीबॉडी बनाने में अपर्याप्त है. पॉवेल ने कहा, ‘यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में लाखों लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं. यह आश्वस्त करनेवाली बात है कि जिन रोगियों को टीके की दूसरी खुराक दी गई, उनमें से अधिकतर में शानदार प्रतिक्रिया (एंटीबॉडी संबंधी) देखने को मिली.’




    अध्ययन में ब्रिटेन के 92 अस्पतालों में ‘क्रोन्स’ और ‘अल्सरेटिव कोलाइटिस’ का इलाज करा रहे 6,935 रोगियों को शामिल किया गया. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि टीएनएफ रोधी दवाएं ले रहे लोगों को कोविड रोधी टीके की दूसरी खुराक प्राथमिकता के आधार पर लगवानी चाहिए.

    Tags: Coronavirus, Coronavirus vaccination, Coronavirus vaccine

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