होम /न्यूज /राष्ट्र /भारत बना रहा है पहली 'हाइपरसोनिक मिसाइल', जानें कब तक बनकर हो जाएगी तैयार? ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने दी जानकारी

भारत बना रहा है पहली 'हाइपरसोनिक मिसाइल', जानें कब तक बनकर हो जाएगी तैयार? ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने दी जानकारी

ह्मोस मिसाइल इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल में गिनी जाती है. (फाइल फोटो)

ह्मोस मिसाइल इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल में गिनी जाती है. (फाइल फोटो)

Hypersonic Missile, BrahMos Aerospace: आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने सोमवार को सिल्वर जुबल ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: बह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ (Brahmos Aerospace Ceo) और एमडी अतुल राणे (Atul Rane) ने सोमवार को एक बड़ी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत-रूस डिफेंस ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) बनाने में पूरी तरह से सक्षम है और अगले पांच छह साल में भारत अपनी पहली हाइपरसोनिक मिसाइल बना लेगा.

बता दें कि आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने सोमवार को सिल्वर जुबली ईयर समारोह की शुरुआत की. सीईओ अतुल राणे ने कहा कि हम हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सक्षम हैं और अगले पांच से छह साल में भारत के पास हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल होगी. अतुल ब्रह्मोस मिसाइल के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन कार्यक्रम में बोल रहे थे.

गौरतलब है कि ब्रह्मोस मिसाइल इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर और रफ्तार के साथ अपने निशाने पर अचूक वार करने वाली क्रूज मिसाइल है. इस मिसाइल को दुनिया के सबसे सटीक और घातक हथियारों में गिना जाता है.

बता दे कि 12 जून 2022 को ब्रह्मोस मिसाइल की पहली सुपरसोनिक उड़ान को भरे हुए 21 साल हो गए हैं. अगले साल 12 फरवरी 2013 में ब्रह्मोस रेजिंग डे के दिन सिल्वर जुबली ईयर मनाया जाएगा और इसी दिन रजत जयंती समारोह खत्म होगा.

सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन में होंगे कई आयोजन
एएनआई की खबर के अनुसार ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन के दौरान कई अलग अलग समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है. इकाई राष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के कंपटीशन भी आयोजित करेगी. मिसाइल टेक्नोलॉजी में युवाओं का योगदान बढ़ाने के लिए एक एप्लीकेशन बेस्ड राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी.

यूपी में बनेगा ब्रह्मोस मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूपी में भी एक मैन्युफैक्टरिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए कंपनी को 80 हेक्टेयर की भूमि भी मिल चुकी है. इस मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में शुरुआती निवेश 300 करोड़ रुपये का होगा. कंपनी प्लान कर रही है कि इस सेंटर में मैन्युफैक्चरिंग से जुडे सभी कामों को 2024 तक पूरा कर लिया जाए. सूत्रों की मानें तो इस सेंटर के ऑपरेशनल होने के बाद हर साल करीब 100 ब्रह्मोस सिस्टम का उत्पादन हो सकेगा.

जानें कितनी घातक है हाइपरसोनिक मिसाइल की टेक्नोलॉजी
आपको बता दें कि भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस हाइपरसोनिक मिसाइल बना रहे हैं. इस मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का प्रयोग किया जाएगा जो इस मिसाइल को कई गुना रफ्तार देगा. एक्सपर्ट की मानें तो इस मिसाइल की 600 किमी तक की हो सकती है लेकिन इसे बढ़ाकर 1000 किलोमीटर तक किया जा सकता है. यह हाइपरसोनिक मिसाइल 9800 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से अपने टॉरगेट पर वार कर सकती है.

यह हाइपरसोनिक मिसाइल एंटी शिप, लैंड अटैक और सतह से सतह पर मार करने वाली हाइरपसोनिक क्रूज मिसाइल होगी. इस मिसाइल को युद्धपोत, पनडुब्बी, फाइटरजेट या फिर युद्ध क्षेत्र में मोबाइल लॉन्चर से भी लान्च किया जा सकता है. रफ्तार तेज होने की वजह से यह मिसाइल आसानी से राडार की पकड़ से भी बच सकती है. यह मिसाइल हवा में भी बड़ी आसानी से अपनी दिशा बदल सकती है.

Tags: Brahmos, Missile

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें