ब्रह्मोस मिसाइल से लैस होगा सुखोई, बिना सीमा पार किए करेगा सर्जिकल स्‍ट्राइक

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) इस परियोजना को लागू कर रही हैं.

News18Hindi
Updated: June 9, 2019, 7:36 PM IST
ब्रह्मोस मिसाइल से लैस होगा सुखोई, बिना सीमा पार किए करेगा सर्जिकल स्‍ट्राइक
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
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Updated: June 9, 2019, 7:36 PM IST
बालाकोट हवाई हमलों के बाद सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए 40 से अधिक सुखोई लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस करने की प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 'युद्ध नीति संबंधी' परियोजना के कार्यान्वयन को तेज करने का फैसला बालाकोट हवाई हमले और उसके बाद पाकिस्तानी प्रतिक्रिया के करीब छह सप्ताह बाद उठाया गया है.

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) इस परियोजना को लागू कर रही हैं. सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड को यह परियोजना शीघ्र लागू करने के लिए कहा गया है. सरकार ने आदेश दिया है कि इसे तय समयसीमा दिसंबर 2020 से पहले पूरा किया जाए.

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि गहन निगरानी वाली इस रणनीतिक परियोजना का मकसद भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करना है. साल 2016 में सरकार ने 40 से अधिक सुखोई लड़ाकू विमानों में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तैनात करने का फैसला किया था.

सूत्रों ने बताया कि परियोजना पर असली काम 2017 के अंत तक शुरू हुआ, हालांकि इसका कार्यान्वयन काफी धीमा है. उन्होंने बताया कि बालाकोट हवाई हमलों और इसके बाद पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की पृष्ठभूमि में भारतीय वायु सेना को मजबूत करने के तरीकों की समीक्षा की गई तथा यह महसूस किया गया कि सुखोई विमानों को ब्रह्मोस से जल्द से जल्द लैस करना प्राथमिकता होनी चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि सरकार वायु सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है. एचएएल को खासतौर से ब्रह्मोस परियोजना में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मानवश्रम और संसाधनों को लगाने के लिए कहा गया है. एक बार जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो वायु सेना की लंबी दूरी से समुद्र या जमीन में किसी भी लक्ष्य को भेदने की शक्ति कई गुना बढ़ने की संभावना है. 40 सुखोई विमानों के बेड़े को मिसाइलों से लैस करने के लिए, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में उनके संरचनात्मक संशोधन किए जा रहे हैं.

भारत, अमेरिका गोपनीय रक्षा टेक्‍नोलॉजी पर कर रहे काम

भारत और अमेरिका महत्वपूर्ण सैन्य प्रौद्योगिकी और गोपनीय सूचनाएं साझा करने की रूपरेखा पर काम कर रहे हैं. ताकि अमेरिकी रक्षा कंपनियां संयुक्त उपक्रम के तहत भारतीय निजी क्षेत्र को ये प्रौद्योगिकी हस्तांरित कर सकें. यह जानकारी ऑटोमोबाइल क्षेत्र के सूत्रों ने दी.
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रूपरेखा में विशिष्ट उपायों का जिक्र होगा ताकि भारतीय कंपनियों के साथ साझा की गई संवेदनशील प्रौद्योगिकी और गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. सूत्रों ने बताया कि दोनों देश महत्वपूर्ण सैन्य प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए विशिष्ट रूपरेखा पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकारों के बीच रूपरेखा से जवाबदेही, बौद्धिक संपदा अधिकार और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता आएगी.

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अमेरिकी रक्षा उद्योग निजी क्षेत्र की भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ सैन्य हार्डवेयर एवं प्लेटफॉर्म के लिए इस तरह के समझौते की रूपरेखा चाहता है.

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First published: June 9, 2019, 7:27 PM IST
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