प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ अधिकतम संयम बरते अधिकारी: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने किसान आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है.(प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-AP)

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने किसान आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है.(प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-AP)

Kisan Andolan: दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि आंदोलन अब तक 'अराजनीतिक' रहा है और 'आगे भी रहेगा' तथा किसी भी राजनीतिक दल के नेता को उसके मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 6, 2021, 12:53 AM IST
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जिनेवा. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने नये कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति भारतीय प्राधिकारों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है. साथ ही, इस बात पर जोर दिया कि सभी के मानवाधिकारों के सम्मान में ‘न्यायसंगत समाधान’ तलाशना जरूरी है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने ट्वीट कर कहा कि शांतिपूर्ण एकत्र होने एवं अभिव्यक्ति के अधिकारों की 'ऑनलाइन एवं ऑफलाइन' हिफाजत की जानी चाहिए.

ओएचसीएचआर ने ट्वीट किया, 'भारत: हम प्राधिकारों एवं प्रदर्शनकारियों से किसान आंदोलन के प्रति अधिकतम संयम बरतने का आह्वान करते हैं. शांतिपूर्ण एकत्र होने एवं अभिव्यक्ति के अधिकार की दोनों, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन, ही तरह से हिफाजत की जानी चाहिए. यह जरूरी है कि सभी के मानवाधिकारों की रक्षा करते हुए न्यायसंगत समाधान तलाशा जाए.'

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किसान आंदोलन 'अराजनीतिक' रहा है और आगे भी रहेगाः संयुक्त किसान मोर्चा

दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने बृहस्पतिवार को कहा कि आंदोलन अब तक ‘‘अराजनीतिक’’ रहा है और ‘‘आगे भी रहेगा’’ तथा किसी भी राजनीतिक दल के नेता को उसके मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने सिंघू, गाज़ीपुर, टीकरी एवं अन्य सीमाओं पर चल रहे प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया और केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है. इसके बाद, संयुक्त किसान मोर्चा का यह बयान आया है.

संयुक्त किसान मोर्चा के एक नेता, दर्शन पाल सिंह द्वारा एक बयान में मोर्चा ने कहा, ' यह आंदोलन शुरू से पूरी तरह से अराजनीतिक रहा है और अराजनीतिक रहेगा. इस आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के समर्थन का स्वागत है, लेकिन किसी भी सूरत में संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर राजनीतिक नेताओं को आने की इजाजत नहीं होगी.' मोर्चा ने प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट सेवा तत्काल बहाल करने की भी मांग की.





बयान में कहा गया है, 'असहमति की आवाज़ दबाने की सरकार की कोशिशें जारी हैं. इंटरनेट पर रोक से आंदोलन कर रहे किसानों के साथ ही, मीडिया कर्मी और स्थानीय लोगों को भी बहुत परेशानी हो रही है.' संगठन ने कहा कि खासकर, छात्र 'बड़ी समस्या' का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी परीक्षाएं आ रही हैं. बयान में कहा गया है कि एक ओर सरकार ‘‘डिजिटल इंडिया’’ जैसी योजनाओं का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश के लोगों को इंटरनेट से महरूम किया जा रहा है.

बयान में कहा गया है कि इस आंदोलन को लगातार देश और दुनिया से समर्थन मिल रहा है. यह शर्मनाक है कि सरकार ' आंतरिक मामला' बता कर इसे 'दबाना' चाहती है. बयान के मुताबिक, ' जो लोग किसानों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जो निंदनीय है.' बयान में कहा गया है कि अबतक मिली जानकारी के मुताबिक, 125 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और 21 प्रदर्शनकारी अब भी लापता हैं.
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